Friday, October 9, 2026
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Abuses At Judges: सुप्रीम कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा…याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम में फेंके पेपर्स, CJI को दी गाली!, यहां पढ़िए विस्तार से हुआ क्या

Abuses At Judges: एक आम याचिकाकर्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जजों को सीधे ‘आदेश’ देने और उसके बाद कोर्ट रूम के भीतर अपशब्दों का प्रयोग करते हुए दस्तावेज हवा में उछालने की एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ के सामने शुक्रवार को हुई इस अभूतपूर्व घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों को तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए उस व्यक्ति को जबरन कोर्ट रूम से बाहर निकालना पड़ा।

मामला क्या है?: हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने आया था शख्स

यह पूरी घटना इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान घटी। याचिकाकर्ता किसी वकील के माध्यम से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से (Litigant-in-person) अपनी पैरवी करने कोर्ट रूम में उपस्थित हुआ था।

जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, कोर्ट रूम का माहौल बेहद तनावपूर्ण और नाटकीय हो गया:

शुरुआती आक्रामक रुख: अपनी दलीलें शुरू करते ही याचिकाकर्ता ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया और सीधे बेंच पर बैठे जजों को संबोधित करते हुए कहा कि वह उन्हें लखनऊ के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का ‘आदेश’ दे रहा है।

जजों की हैरानी: याचिकाकर्ता के इस अप्रत्याशित आचरण और भाषा पर हैरानी जताते हुए जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा, “आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?”

बहस और हंगामा: इसके जवाब में उस व्यक्ति ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही है। सब कुछ रिकॉर्ड पर मौजूद है।”

सुप्रीम कोर्ट रूम में यूं किया याचिकाकर्ता ने हंगामा

शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को सुप्रीम कोर्ट में एक इन-पर्सन याचिकाकर्ता (petitioner-in-person) की अपील पर सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम के अंदर जमकर हंगामा किया, केस के पेपर्स हवा में उछाले और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

यह पूरा मामला जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने आया। दरअसल, प्रबल प्रताप नाम का एक व्यक्ति इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अपनी रिट पिटीशन खारिज होने के खिलाफ खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दिए गए अपने आवेदन को एक प्राइवेट कंप्लेंट केस में बदलने के फैसले को चुनौती दे रहा था।

“मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको ऑर्डर देता हूं…”

जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता ने बेंच के सामने एक बेहद अजीबोगरीब बयान दिया। उसने कहा, “मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक सेवक), मैं आपको आदेश देता हूँ कि आप लखनऊ के एसीपी विकास नगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें।” इस पर हैरान होते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा, “आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?”

इसके तुरंत बाद, बिना किसी उकसावे के, याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम में केस के सारे पेपर्स फेंक दिए और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगा। सुप्रीम कोर्ट के सिक्योरिटी स्टाफ ने तुरंत उसे दबोच लिया और कोर्टरूम से बाहर निकाला। इस पूरे ड्रामे के दौरान बेंच पूरी तरह शांत रही, कोई रिएक्शन नहीं दिया और कॉज लिस्ट में शामिल बाकी मामलों की सुनवाई जारी रखी।

फाइलें हवा में उछालीं, खुले कोर्ट में दी गालियां

विवाद यहीं शांत नहीं हुआ। जजों से तीखी बहस के तुरंत बाद याचिकाकर्ता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने कोर्ट रूम की गरिमा को पूरी तरह ताक पर रख दिया। उसने अपने हाथ में मौजूद केस की फाइल (दस्तावेजों) को हवा में उछाल दिया। इसके बाद उसने भरी अदालत (Open Court) में जजों की तरफ देखते हुए अपशब्द और गालियां देना शुरू कर दिया।

सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई

अदालत के भीतर इस तरह की अराजकता फैलते ही वहां तैनात सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मचारी (Security Staff) तुरंत हरकत में आए। उन्होंने हंगामा कर रहे याचिकाकर्ता को शारीरिक रूप से काबू में किया और जबरन घसीटते हुए कोर्ट रूम से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

आपको याद दिला दें कि पिछले साल 6 अक्टूबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा ही वाकया हुआ था। तब एक वकील ने सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर अपना जूता निकालने और फेंकने की कोशिश की थी। उस वक्त भी सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत बाहर कर दिया था। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उस वकील का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उसकी मेंबरशिप खत्म कर दी थी। हालांकि, बाद में पूर्व CJI गवई ने आरोपी वकील के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने की बात कही थी।

केस शीट: सुप्रीम कोर्ट रूम ड्रामा (2026)

घटना और प्रशासनिक श्रेणियांविवरण और विधिक स्थिति
संबंधित अदालतउच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे
याचिकाकर्ता की स्थितिव्यक्तिगत रूप से पेश (In-Person Litigant) – नाम स्पष्ट नहीं
मूल विवादइलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील (लखनऊ पुलिस अधिकारी पर FIR की मांग)
अदालत के भीतर कृत्यजजों को आदेश देना, फाइलें हवा में फेंकना और खुले कोर्ट में अपशब्द/गालियां देना।
प्रशासनिक कार्रवाईसुरक्षाकर्मियों द्वारा कोर्ट रूम से जबरन बाहर निकाला गया; अवमानना की कार्यवाही संभव।
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