Tuesday, September 1, 2026
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Criminal Trespass: अपना घर है, ट्रेसपास नहीं…पति के खिलाफ दर्ज 9 वें केस पर क्यों लगाई रोक, वैवाहिक विवाद का मामला देखिए

Criminal Trespass: यदि कोई व्यक्ति अपने ही घर में प्रवेश करता है, तो उसे ‘आपराधिक अतिचार’ नहीं माना जा सकता।

पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी

एक वैवाहिक विवाद के बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति पर पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए ‘हाउस ट्रेसपास’ के मामले में बड़ी राहत देते हुए पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जिस घर को लेकर विवाद है, वह या तो पति के नाम पर है या दोनों के संयुक्त स्वामित्व में है, इसलिए पति को अपने घर में घुसने से नहीं रोका जा सकता।

मामला क्या है?: 9वीं एफआईआर और ‘अतिचार’ का आरोप

पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी।

विवाद की जड़: पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति (जो अलग रह रहा है) अवैध रूप से उस घर में घुस आया जहाँ वह रह रही थी। इस पर पुलिस ने IPC की धारा 447 (या BNS की संबंधित धारा) के तहत मामला दर्ज कर लिया था।

अदालत का अवलोकन: कोर्ट ने नोट किया कि यह पति के खिलाफ पत्नी द्वारा दर्ज कराया गया नौवां (9th) आपराधिक मामला है। पति लंबे समय के बाद यूनाइटेड किंगडम से लौटा था और उसने केवल अपना व्यक्तिगत सामान लेने के लिए घर में प्रवेश किया था।

अदालत का फैसला: जस्टिस नागप्रसन्ना ने तार्किक रूप से कहा कि जब घर पति के नाम पर या संयुक्त रूप से है, तो उसका वहां जाना अपराध की श्रेणी में नहीं आ सकता। इस आधार पर कोर्ट ने फिलहाल पुलिस की किसी भी आगे की कार्रवाई (investigation) पर रोक लगा दी है।

अदालत की तीखी टिप्पणी: पुरुषों के लिए भी कानून की जरूरत

सुनवाई के दौरान, जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पत्नी ने एक के बाद एक कई आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं और पुरुषों के लिए भी सुरक्षा के समान प्रावधान होने चाहिए, तो जज ने “हल्के-फुल्के अंदाज में” (in a lighter vein) एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की, हम विधायिका को निर्देश देंगे कि वह महिलाओं द्वारा पुरुषों के प्रति घरेलू हिंसा से सुरक्षा के लिए भी कानून बनाए। शायद अब वह दिन आ गया है।

पक्षमुख्य दलील
याचिकाकर्ता (पति)घर उसका है (कीमत लगभग ₹3 करोड़), सामान लेने गया था। पत्नी ने 10 से ज्यादा केस कर रखे हैं, जिससे वह रोज अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर है।
प्रतिवादी (पत्नी)पति ने उसे धोखा दिया है। पति जब घर आया तो साथ में ‘पेन कैमरा’ या ‘स्पाई कैमरा’ लेकर आया था, जिससे उसका इरादा संदिग्ध लगता है।

कानूनी स्थिति (Legal Takeaway)

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि वैवाहिक विवादों में ‘आपराधिक कानूनों का दुरुपयोग’ अदालतों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

संपत्ति का अधिकार: किसी संपत्ति के मालिक या सह-मालिक को अपनी ही संपत्ति में प्रवेश करने से ‘ट्रेसपास’ (अतिचार) मानकर अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।

कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग: जब एक ही विवाद पर लगातार नौ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, तो कोर्ट को यह जांचना पड़ता है कि क्या यह न्याय की मांग है या कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग। अदालत ने इस मामले में न केवल राहत दी है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि वैवाहिक कानूनों के तहत केवल एकतरफा सुरक्षा नहीं, बल्कि संतुलन की आवश्यकता है। याचिका पर अगली सुनवाई तक जांच पर रोक बनी रहेगी। इस मामले में अदालत द्वारा कानूनों के दुरुपयोग पर की गई टिप्पणी को आप किस रूप में देखते हैं क्या यह समय की जरूरत है, या यह वैवाहिक कानूनों के उद्देश्य को कमजोर करेगा?

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