Cyber Fraud: साइबर अपराधों के जरिए जुटाए गए काले धन को सफेद करने वाले ‘मनी म्यूल’ (Money Mule) खातों के बढ़ते नेटवर्क पर चिंता जताते हुए केरल हाईकोर्ट ने युवा वकीलों के लिए एक बेहद गंभीर और चेतावनी भरा दिशा-निर्देश जारी किया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अनजाने में ही सही, लेकिन जूनियर वकील साइबर ठगों के खातों को दोबारा चालू करवाकर अपराध को बढ़ावा देने का जरिया बन रहे हैं। शुरुआती दौर में आसान कमाई और बिना ज्यादा मेहनत के कोर्ट से राहत मिलने के लालच में जूनियर वकील साइबर अपराधियों के ‘मोहरे’ (Mules) न बनें। इस क्षेत्र में कई युवा वकील केवल और केवल अपनी लापरवाही के कारण दलदल में फंस रहे हैं।
मामला क्या है?: ‘आसान वकालत और पक्की राहत’ का जाल
हाई कोर्ट ने युवा वकीलों के स्वतंत्र कामकाज के एक नए और खतरनाक ट्रेंड को रेखांकित किया।
आसान प्रैक्टिस का जरिया: कोर्ट ने नोट किया कि हाल के दिनों में कई नए वकीलों ने बार काउंसिल में इनरोल होते ही स्वतंत्र वकालत शुरू कर दी। उनके लिए साइबर सेल द्वारा फ्रीज किए गए बैंक खातों को ‘अनफ्रीज’ कराना एक बड़ा और आकर्षक (Lucrative) जरिया बन गया।
अदालतों के पुराने रुख का गलत फायदा: पूर्व में, अदालतें अक्सर ऐसे मामलों में यह राहत दे देती थीं कि जितनी राशि पर विवाद है (Lien Amount), उसे छोड़कर बाकी खाते का संचालन शुरू कर दिया जाए। जूनियर्स को लगा कि इसमें एक जैसा ड्राफ्ट (Pleadings) फाइल करना है और कोर्ट से अंतरिम राहत (Interim Order) पक्की है।
एआई (AI) का संदिग्ध इस्तेमाल: कोर्ट ने एक पुराने मामले को भी याद किया जहां एक वकील अदालत के बुनियादी सवालों का जवाब भी नहीं दे पाया था। तब अदालत को संदेह हुआ था कि याचिका का पूरा ड्राफ्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें वकील ने अपना दिमाग ही नहीं लगाया था।
कोर्ट का नया सख्त रुख: हर केस में स्थानीय पुलिस बनेगी पक्षकार
अदालत ने इन फर्जीवाड़ा करने वाले खाताधारकों (Money Mules) पर लगाम लगाने के लिए अब प्रक्रिया को बेहद कड़ा कर दिया है।
अनिवार्य नियम: हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि भविष्य में बैंक खाता अनफ्रीज कराने के लिए जितनी भी रिट याचिकाएं (Writ Petitions) दायर होंगी, उनमें संबंधित पुलिस स्टेशन (Jurisdictional Police Station) को अनिवार्य रूप से पक्षकार (Party) बनाना होगा ताकि याचिकाकर्ता की पूरी सच्चाई वेरीफाई की जा सके।
असर: जस्टिस हकीम ने नोट किया कि इस सख्त निर्देश के बाद, बैंक खातों को अनफ्रीज कराने के लिए आने वाली नई रिट याचिकाओं की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है।
वर्तमान मामला: 21 साल की युवती के खिलाफ संगठित अपराध (BNS 111) के तहत FIR का आदेश
यह पूरी टिप्पणी कोर्ट ने 21 वर्षीय एक युवती की याचिका को खारिज करते हुए की, जिसने अपना बैंक खाता अनफ्रीज कराने की मांग की थी।
कोर्ट का निष्कर्ष: अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया यह खाता केवल और केवल साइबर धोखाधड़ी के पैसों के लेन-देन (Money Laundering) के लिए खोला गया था।
कड़ा आदेश: कोर्ट ने तानूर पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) को निर्देश दिया कि वे इस युवती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 (संगठित अपराध – Organized Crime) के तहत तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करें और मामले की गहन जांच करें।
क्या होते हैं ‘मनी म्यूल’ (Money Mule) खाते?
साइबर ठग आम लोगों (विशेषकर छात्रों या बेरोजगारों) को थोड़े से कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। ठगी का शिकार हुए लोगों से लूटा गया पैसा इन खातों में आता है और फिर उसे ट्रेस होने से बचाने के लिए छोटे-छोटे हिस्सों में दर्जनों अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
युवाओं की क्षमता पर भरोसा, पर ‘सीनियर बार’ से मार्गदर्शन जरूरी
जस्टिस हकीम ने स्पष्ट किया कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य युवा वकीलों के मनोबल को गिराना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, आज के लॉ ग्रेजुएट्स मूट कोर्ट, इंटर्नशिप और बेहतरीन पाठ्यक्रम के कारण बेहद होनहार, तकनीक के जानकार (Tech-savvy) और सक्षम हैं। भारतीय न्याय प्रणाली का भविष्य सुरक्षित हाथों में है, बशर्ते इन तीक्ष्ण दिमागों को सीनियर वकीलों (Senior Bar) और बेंच से सही विधिक मार्गदर्शन और नैतिक दिशा मिलती रहे।
विधिक केस शीट: केरल हाई कोर्ट बैंक खाता अनफ्रीजिंग एवं साइबर गाइडलाइन (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्देश |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (High Court of Kerala) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम (Justice MA Abdul Hakhim) |
| आदेश की तिथि | 10 जुलाई 2026 |
| मुख्य कानूनी धारा (दोषी पर) | भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111 (संगठित अपराध) |
| नया अनिवार्य नियम | अनफ्रीजिंग की प्रत्येक रिट याचिका में स्थानीय थाना (Police Station) पक्षकार होगा। |
साइबर अपराध के इस दौर में, डिजिटल साक्ष्य और बैंक खाते किसी भी अपराध की रीढ़ होते हैं। वकीलों का कर्तव्य न्याय में मदद करना है, न कि अनजाने में अपराधियों का सुरक्षा कवच बनना। एआई (AI) आधारित ड्राफ्टिंग और बिना सोचे-समझे राहत की पैरवी करने पर कोर्ट की यह सख्ती बार (Bar) की गरिमा और सुरक्षा दोनों को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

