Monday, August 31, 2026
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Sunset of his virility: मर्दानगी के ढलने तक जेल में रहे विकृत सोच का अपराधी…7 साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या के दोषी के लिए यह कहा, पढ़ें

Sunset of his virility: 7 साल की मासूम बच्ची के साथ बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म और उसकी हत्या करने वाले 27 वर्षीय दोषी आनंद सिंह की फांसी की सजा (Death Sentence) को बदलते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने यह बेहद सख्त टिप्पणी की है।

दोषी के मौत की सजा को 50 वर्ष कठोर कारावास में बदला

हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस रमेश चंद्र दिमरी की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा को 50 साल की कठोर कैद (बिना किसी छूट के) और ₹50 लाख के भारी-भरकम जुर्माने में बदल दिया है। अदालत ने कहा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह विकृत सोच (Pervert) का अपराधी समाज की अन्य बच्चियों के लिए कभी कोई खतरा न बन सके, उसका अपनी मर्दानगी के ढलने (Sunset of his virility) तक जेल की सलाखों के पीछे रहना बेहद जरूरी है। अदालती सजा ऐसी होनी चाहिए जो न केवल दोषी को उसके किए की सजा दे, बल्कि समाज को भी सुरक्षित रखे।

मामला क्या है?: पड़ोसी की दरिंदगी की शिकार हुई मासूम

यह रूह कंपा देने वाला मामला मई 2021 का है, जो हरियाणा के पलवल जिले से जुड़ा है।

वारदात: 24 मई 2021 को मध्य प्रदेश के मूल निवासी एक आदिवासी मजदूर (जो पलवल के एक टाइल प्लांट में काम करते थे) की 7 साल की बेटी अचानक लापता हो गई।

पड़ोसी की घिनौनी करतूत: बच्ची के माता-पिता काम पर गए हुए थे। इस बात का फायदा उठाकर पड़ोसी आनंद सिंह ने मासूम को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया। उसने बच्ची के साथ बर्बरता से दुष्कर्म किया और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उसने शव को एक गड्ढे में छिपा दिया था।

ट्रायल कोर्ट का फैसला: जुलाई 2023 में निचली अदालत ने डीएनए (DNA) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अकाट्य वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर आनंद सिंह को दोषी पाया और उसे ‘मृत्युदंड’ (Death Penalty) की सजा सुनाई थी। इसके बाद इस फैसले की पुष्टि और दोषी की अपील पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

हाई कोर्ट का रुख: “फांसी तो नहीं, लेकिन 50 साल से पहले जेल से बाहर नहीं आएगा दोषी”

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने माना कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने आनंद सिंह के खिलाफ अपराध को बिना किसी संदेह के पूरी तरह साबित किया है। हालांकि, विभिन्न अदालती मिसालों और सुधारात्मक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा को विशेष श्रेणी की उम्रकैद में बदल दिया।

मर्दानगी के ढलने तक कैद (Sunset of his Virility): कोर्ट ने साफ किया कि कम उम्र (27 वर्ष) और सुधरने की गुंजाइश जैसे कुछ कम करने वाले कारकों (Mitigating Factors) के कारण मृत्युदंड की जगह अधिकतम संभव कैद दी जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दोषी आनंद सिंह को कम से कम 50 साल की वास्तविक जेल की सजा काटनी होगी, और इससे पहले उसे किसी भी तरह की रिहाई या छूट नहीं दी जाएगी।

₹50 लाख का ऐतिहासिक जुर्माना: कोर्ट ने हत्या (धारा 302 IPC) के मामले में दोषी पर ₹50 लाख का भारी जुर्माना लगाया है। यदि वह इस राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो उसे 500 दिन (लगभग 1.3 वर्ष) की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।

विधिक केस शीट: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट सजा समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान रिकॉर्ड
संबंधित अदालतपंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस रमेश चंद्र दिमरी
दोषी व्यक्तिआनंद सिंह (उम्र 27 वर्ष)
केस का नामस्टेट ऑफ हरियाणा बनाम आनंद सिंह
न्यायालय का आदेशमौत की सजा को बदलकर 50 साल की बिना छूट वाली कठोर उम्रकैद और ₹50 लाख जुर्माना।
सजा न चुकाने पर अतिरिक्त कैद₹50 लाख न देने पर 500 दिन की अतिरिक्त जेल।

कोर्ट ने “मर्दानगी ढलने तक सलाखों के पीछे रखने” की जो बात कही है, वह समाज में घूम रहे ऐसे विकृत मानसिकता वाले अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब तक यह अपराधी बूढ़ा होकर समाज के लिए पूरी तरह बेअसर नहीं हो जाता, तब तक वह खुली हवा में सांस नहीं ले पाएगा।

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