संक्षेप मैट्रिक्स: Indian Judiciary Pendency Data (July 2026 – NJDG)
| अदालत का स्तर | कुल पेंडेंसी | 30+ साल पुराने केस | 20+ साल पुराने केस |
| सुप्रीम कोर्ट | 95,936 | 26 | 558 |
| 25 उच्च न्यायालय | 63.76 लाख | 80,634 | 4.51 लाख+ |
| जिला व अधीनस्थ अदालतें | 4.98 करोड़ | 81,275 | — |
Indian Judiciary Pendency: देश की शीर्ष न्यायपालिका से लेकर जिला अदालतों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और दशकों पुरानी पेंडेंसी को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 28 जुलाई 2026 तक देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में कुल 95,936 मामले लंबित थे, जिनमें से 26 मामले पिछले 30 से अधिक वर्षों से निष्पादन का इंतजार कर रहे हैं। राज्यसभा सांसद दिलीप कुमार राय द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों का कालक्रमानुसार ब्योरा
| पेंडेंसी की अवधि | लंबित मुकदमों की संख्या |
| 30 वर्ष से अधिक | 26 |
| 20 वर्ष से अधिक | 558 |
| 10 वर्ष से अधिक | 10,094 |
| 5 वर्ष से अधिक | 24,611 |
| 1 वर्ष से अधिक | 49,248 |
| कुल लंबित मामले | 95,936 |
देश के 25 उच्च न्यायालयों (High Courts) का हाल
देश के 25 हाई कोर्ट्स में कुल मिलाकर 63.76 लाख मुकदमे लंबित हैं। इनमें से:
- 80,634 मामले 30 साल से अधिक पुराने हैं।
- 4.51 लाख से अधिक मामले 20 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं।
- 16 लाख से अधिक मामले 10 साल से अधिक पुराने हैं।
सर्वाधिक पेंडेंसी वाले टॉप उच्च न्यायालय:
- इलाहाबाद हाई कोर्ट: पेंडेंसी के मामले में सबसे ऊपर है, जहां कुल 12.28 लाख मामले लंबित हैं। 30 साल से अधिक पुराने मुकदमों की संख्या भी यहीं सबसे ज्यादा (53,787) है। इसके अलावा 1.61 लाख केस 20+ सालों से पेंडिंग हैं।
- कलकत्ता हाई कोर्ट: 30 वर्ष से अधिक पुराने 11,417 मामले पेंडिंग।
- बॉम्बे हाई कोर्ट: कुल पेंडेंसी 6.57 लाख; 3,901 मामले 30 साल से अधिक पुराने।
- राजस्थान हाई कोर्ट: कुल पेंडेंसी 6.96 लाख मामले।
- मद्रास हाई कोर्ट: कुल पेंडेंसी 5.67 लाख मामले।
जिला और अधीनस्थ अदालतें (District & Subordinate Courts)
देश भर की निचली और जिला अदालतों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है:
- कुल लंबित मामले: लगभग 4.98 करोड़।
- 30 साल से अधिक पुराने केस: 81,275 मामले ऐसे हैं जो तीन दशकों से निचली अदालतों में लटके हुए हैं।

