केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | कानूनी ब्योरा |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस जसमीत सिंह (Justice Jasmeet Singh) |
| मामला/साइटेशन | Aditya Institute of Technology v. Govt of NCT of Delhi [2026 LiveLaw (Del) 710] |
| चुनौतीपूर्ण नियम | इंफॉर्मेशन बुलेटिन 2026-27 का क्लॉज़ 9 (अनिवार्य CET) |
| संवैधानिक प्रावधान | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) |
| अंतिम आदेश | क्लॉज़ 9 रद्द; BTE संस्थान भी 10वीं के अंकों पर खाली/मैनेजमेंट सीटें भर सकेंगे। |
Full Time Diploma Course: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा बीटीई (Board of Technical Education) से संबद्ध निजी संस्थानों में फुल-टाइम डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) को अनिवार्य बनाने की शर्त को रद्द कर दिया है।
अदालत ने पाया कि दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (DSEU) के तहत आने वाले संस्थानों को इस CET परीक्षा से छूट दी गई थी, जबकि समान पाठ्यक्रम चलाने वाले BTE से संबद्ध निजी संस्थानों पर इसे थोपा गया था—जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
यह निर्णय जस्टिस जसमीत सिंह (Justice Jasmeet Singh) की एकल पीठ ने आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Aditya Institute of Technology) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया।
मामला क्या था?
- विवादित नियम (Clause 9): दिल्ली सरकार द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी सूचना बुलेटिन (Information Bulletin) के क्लॉज़ 9 के तहत BTE से संबद्ध निजी संस्थानों के लिए केवल CET के माध्यम से ही दाखिला लेना अनिवार्य किया गया था।
- याचिकाकर्ता की दलील: आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने क्लॉज़ 9 को चुनौती देते हुए मांग की कि उसे भी DSEU संस्थानों की तरह 10वीं कक्षा के अंकों (Class X marks) के आधार पर छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति दी जाए।
- विभेद का आधार: DSEU और BTE दोनों ही एक समान डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। इसके बावजूद DSEU को बिना कोई कारण बताए CET से छूट दी गई और निजी BTE संस्थानों पर CET अनिवार्य रखा गया।
दिल्ली हाई कोर्ट का कानूनी विश्लेषण और फैसला
समान डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया
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DSEU संस्थान (सरकारी/संबद्ध) BTE से संबद्ध निजी संस्थान
• प्रवेश का आधार: 10वीं कक्षा के अंक (CET से छूट) • प्रवेश का आधार: अनिवार्य CET (रद्द क्लॉज़ 9)
• कोर्ट का फैसला: गैर-संवैधानिक भेद
कोई तर्कसंगत अंतर (Intelligible Differentia) नहीं
जस्टिस जसमीत सिंह ने अपने आदेश में कहा कि एक ही जैसा डिप्लोमा कोर्स कराने वाले BTE और DSEU से संबद्ध संस्थानों के लिए दो अलग-अलग मूल्यांकन तंत्र (Assessment Mechanisms) रखने का कोई तर्कसंगत आधार या औचित्य नहीं है:
“प्रवेश के लिए दो अलग-अलग parallel सिस्टम बनाए गए हैं—एक तरफ CET और दूसरी तरफ बिना CET के 10वीं के अंक। एक ही डिप्लोमा कोर्स कराने वाले संस्थानों के लिए दो अलग-अलग प्रवेश तंत्र का उस उद्देश्य से कोई तर्कसंगत संबंध (Rational Nexus) नहीं है, जिसे हासिल किया जाना है—अर्थात योग्य छात्रों को प्रवेश देना।”
अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
अदालत ने माना कि निजी संस्थानों में प्रवेश चाहने वाले छात्रों को DSEU की तुलना में केवल BTE संस्थानों पर CET लागू करके नुकसान की स्थिति में डाला गया। यह वर्गीकरण मनमाना (Arbitrary) और असंवैधानिक है। कोर्ट ने क्लॉज़ 9 को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द (Set aside) कर दिया।
चालू सत्र (2026-27) के लिए निर्देश
चूंकि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए CET प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और छात्रों को कॉलेज आवंटित किए जा चुके हैं, इसलिए कोर्ट ने चल रही प्रवेश प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता संस्थान में मैनेजमेंट कोटा और खाली पड़ी सीटों (Vacant Seats) को अब 10वीं के अंकों के आधार पर भरा जा सकता है।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि समान पाठ्यक्रम संचालित करने वाले शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रवेश नियमों को लेकर सरकार मनमाना या भेदभावपूर्ण वर्गीकरण नहीं कर सकती। BTE से संबद्ध निजी कॉलेजों को अब DSEU के समान अवसर प्राप्त होंगे।

