ई-नोटरी (e-Notarisation) कैसे काम करती है?
अदालत में प्रस्तुत ज्ञापन के अनुसार, ई-नोटरी की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की गई:
- लाइव ऑडियो-वीडियो कॉन्फ्रेंस: अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) और नोटरी एक ही लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े, जहां स्क्रीन पर हलफनामा प्रदर्शित हो रहा था।
- पहचान और सहमति का सत्यापन: नोटरी ने हस्ताक्षरकर्ता की पहचान की पुष्टि की, विषय-वस्तु की समझ दर्ज की और शपथ दिलाई।
- डिजिटल हस्ताक्षर: हस्ताक्षरकर्ता ने सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन/e-KYC के माध्यम से हलफनामे पर ई-साइन (e-sign) किया।
- ई-मुहर और नोटरी हस्ताक्षर: अंत में, नोटरी ने अपनी आधिकारिक डिजिटल मुहर लगाई और इलेक्ट्रॉनिक रूप से दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए।
डिजिटल कोर्ट (Paperless Courts) पर जोर
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने वकीलों को अदालती कार्यवाहियों में डिजिटल उपकरणों (जैसे iPads/Tablets) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहित किया:
“आशा है कि हम इन सभी अदालती कागजातों को स्कैन करवा सकेंगे। यदि आप iPads का उपयोग करना चाहते हैं, तो आपराधिक क्षेत्राधिकार (Criminal Jurisdiction) में भी इसका उपयोग कर सकते हैं ताकि यह भी एक पूरी तरह से डिजिटल कोर्ट बन सके।” — न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने न्यायिक डिजिटलीकरण और पेपरलेस अदालतों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उच्च न्यायालय और राज्य की सभी जिला अदालतों में ई-नोटरीकरण (e-Notarisation) की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार (न्यायिक) और रजिस्ट्रार (कंप्यूटर्स) को कर्नाटक हाईकोर्ट और निचली अदालतों में ई-फाइलिंग के दौरान ई-नोटरीकृत दस्तावेजों की स्वीकृति और व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने साइबर अपराध जांच के तहत बैंक खाते पर लगी पाबंदियों से जुड़े एक मामले में इलेक्ट्रॉनिक रूप से नोटराइज किए गए अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर लेते हुए यह आदेश दिया।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां और डिजिटल पहल
1. डिजिटल कोर्ट और टैबलेट/आईपैड का उपयोग अदालत के कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की वकालत करते हुए न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने वकीलों को प्रोत्साहित किया: “उम्मीद है कि हम इन सभी अदालती फाइलों और दस्तावेजों को स्कैन करवा सकेंगे। यदि वकील आपराधिक अधिकार क्षेत्र (Criminal Jurisdiction) में भी आईपैड या डिजिटल डिवाइस का उपयोग करना चाहते हैं, तो वे बेझिझक कर सकते हैं, ताकि यह अदालत पूरी तरह से एक ‘डिजिटल कोर्ट’ बन सके।”
2. ई-नोटरीकरण की विधिक वैधता अदालत ने माना कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और आधुनिक डिजिटल टूल्स के तहत किए गए वीडियो-आधारित सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर पूरी तरह वैध हैं और इन्हें नियमित अदालती प्रक्रियाओं में स्वीकार किया जाना चाहिए।
ई-नोटरीकरण (e-Notarisation) की कार्यप्रणाली: कोर्ट में प्रस्तुत प्रक्रिया
आईआईएफएल फाइनेंस लिमिटेड (IIFL Finance Ltd) की ओर से पेश वकील ने ‘मेमोरेंडम ऑफ फैक्ट्स’ के माध्यम से अदालत को समझाया कि ई-नोटरीकरण की पूरी प्रक्रिया कैसे सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई:
- लाइव ऑडियो-वीडियो कॉन्फ्रेंस: अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorised Signatory) और नोटरी पब्लिक दोनों एक सुरक्षित लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक के माध्यम से जुड़े, जहां स्क्रीन पर दोनों को एक ही हलफनामा प्रदर्शित हो रहा था।
- पहचान और सहमति का सत्यापन: नोटरी ने हस्ताक्षरकर्ता की पहचान, कंपनी के लिए कार्य करने के अधिकार, दस्तावेजों की समझ और स्वैच्छिक भागीदारी की पुष्टि की।
- डिजिटल शपथ ग्रहण: नोटरी ने हस्ताक्षरकर्ता को हलफनामे की सत्यता की पुष्टि के लिए शपथ दिलाई।
- इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (e-KYC): हस्ताक्षरकर्ता ने बायोमेट्रिक/ओटीपी-आधारित सुरक्षित डिजिटल सत्यापन प्रणाली (e-KYC) के माध्यम से हलफनामे पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए।
- नोटरी की डिजिटल सील व हस्ताक्षर: इसके बाद नोटरी पब्लिक ने हलफनामे पर अपनी आधिकारिक डिजिटल मुहर लगाई और स्वयं के डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) से दस्तावेज को प्रमाणित कर दिया।
प्रशासनिक निर्देश
- रजिस्ट्रार (कंप्यूटर/आईटी) को निर्देश: हाईकोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि ई-फाइलिंग पोर्टल और केस मैनेजमेंट सिस्टम को इस प्रकार अपग्रेड किया जाए कि जिला न्यायालयों और उच्च न्यायालय में ई-नोटरीकृत हलफनामों और दस्तावेजों को बिना किसी तकनीकी या प्रक्रियात्मक रुकावट के स्वीकार किया जा सके।
विधिक विवरण
- विषय: कर्नाटक उच्च न्यायालय और जिला अदालतों में ई-नोटरीकरण का क्रियान्वयन
- याचिकाकर्ता (IIFL Finance Ltd) की ओर से: अधिवक्ता प्रियंका एस. भट
- पीठ: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज
मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज |
| मुख्य पक्षकार/संस्था | IIFL फाइनेंस लिमिटेड (साइबर अपराध जांच से जुड़े बैंक खाते का मामला) |
| मुख्य आदेश | हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों में ई-नोटरीयुक्त हलफनामों को स्वीकार करने व लागू करने के निर्देश। |

