केस का संक्षिप्त विवरण (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल |
| याचिकाकर्ता | योगेंद्र बाबू शर्मा |
| लंबित मामलों की संख्या | 1,45,097 मामले (16 जुलाई 2026 तक) |
| मुख्य मुद्दा | जांच पूरी होने के बाद भी CrPC धारा 173(2) के तहत क्लोजर रिपोर्ट/चार्जशीट का अदालतों में दाखिल न होना |
| अगली सुनवाई | 18 अगस्त 2026 |
Pendency of Closure Report: जांच पूरी होने के बाद भी अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट (Closure Report) दाखिल न किए जाने के बड़े पैमाने पर लंबित मामलों को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने पाया कि बैकलाग में मामूली कमी आने के बावजूद राज्य में ऐसे 1,45,000 से अधिक मामले अभी भी लंबित पड़े हैं। हाई कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे उन सभी मामलों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट (Updated Status Report) पेश करें, जिनमें जांच तो पूरी हो चुकी है लेकिन रिपोर्ट संबंधित अदालतों के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा (Chief Justice Ramesh Sinha) और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल (Justice Ravindra Kumar Agrawal) की खंडपीठ ने योगेंद्र बाबू शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।
मामला क्या था?
- मूल याचिका: याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), रायपुर को एक मामले में प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट पर उचित आदेश पारित करने और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(2) के तहत क्लोजर रिपोर्ट पर जताई गई आपत्तियों का निपटारा करने का निर्देश देने की मांग की थी।
- हाई कोर्ट का पिछला निर्देश: सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी को पूरे राज्य का ऐसा डेटा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था, जिसमें जांच पूरी होने के बावजूद क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में जमा नहीं की गई है।
डीजीपी के हलफनामे में चौंकाने वाले आंकड़े
डीजीपी द्वारा अदालत में पेश किए गए हलफनामे में निम्नलिखित स्थिति सामने आई।
- 1.45 लाख से अधिक केस पेंडिंग: 16 जुलाई 2026 तक पूरे राज्य में 1,45,097 ऐसे मामले थे, जिनमें पुलिस जांच पूरी हो चुकी है लेकिन सक्षम अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है।
- मामूली प्रगति: 20 मई 2026 को यह संख्या 1,47,714 थी, जिसका अर्थ है कि दो महीनों के दौरान केवल 2,617 मामलों में ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकी।
- पुलिस कप्तानों को निर्देश: हलफनामे में कोर्ट को बताया गया कि पुलिस कमिश्नर (रायपुर), रेंज आईजी और संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों (SPs) को जांच पूरी होने के बाद समय पर चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट जमा करने और इसकी निरंतर निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
हाई कोर्ट का अगला निर्देश
अदालत ने इन आंकड़ों पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी छत्तीसगढ़ को सुनवाई की अगली तारीख से पहले एक नया हलफनामा (Fresh Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की ताजा प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
जांच पूरी होने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने में देरी से न केवल अदालती कार्यवाही प्रभावित होती है, बल्कि पीड़ित और आरोपी दोनों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की यह सख्त निगरानी राज्य पुलिस प्रशासन को मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए जवाबदेह बनाएगी।

