केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | कानूनी ब्योरा |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) |
| माननीय पीठ | मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली एवं जस्टिस जसप्रीत सिंह |
| याचिकाकर्ता | कोमल जायसवाल (Komal Jaiswal) |
| प्रतिवादी | UPSSSC एवं उत्तर प्रदेश राज्य |
| संविधान के तहत अधिकार | अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन एवं आजीविका का अधिकार) |
| अंतिम निर्णय | गर्भावस्था के आधार पर टेस्ट स्थगित करने की अनुमति; 4 सप्ताह में PET कराने का आदेश। |
Pregnancy Is Not A Ground: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय सुनाते हुए कहा है कि गर्भावस्था (Pregnancy) के आधार पर किसी महिला को सार्वजनिक रोजगार (Public Employment) से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली (Chief Justice Arun Bhansali) और जस्टिस जसप्रीत सिंह (Justice Jaspreet Singh) की खंडपीठ ने कोमल जायसवाल (Komal Jaiswal) की विशेष अपील (Special Appeal) को स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने माना कि किसी महिला को ‘मां बनने’ और ‘नौकरी’ में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करना उसके प्रजनन अधिकारों (Reproductive Rights) और आजीविका के अधिकार (Right to Livelihood) दोनों का सीधा उल्लंघन है।
मामला क्या था?
- भर्ती एवं योग्यता: कोमल जायसवाल ने वर्ष 2023 में ‘फॉरेस्ट गार्ड’ और ‘वाइल्डलाइफ गार्ड’ भर्ती के लिए आवेदन किया था। उन्होंने लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थी।
- फिजिकल टेस्ट में अड़चन: फरवरी 2026 में उन्हें फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET)—जिसमें 14 किलोमीटर की पैदल चाल शामिल थी—के लिए बुलाया गया। उस समय याचिकाकर्ता 9 महीने की गर्भवती थीं।
- आयोग का इनकार: याचिकाकर्ता ने बच्चे के जन्म तक PET को स्थगित (Defer) करने की मांग की। हालांकि, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि भर्ती नियमों में टेस्ट स्थगित करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद सिंगल जज की पीठ ने भी उनकी रिट याचिका खारिज कर दी थी, जिसे डबल बेंच में चुनौती दी गई।
हाई कोर्ट की प्रमुख और ऐतिहासिक टिप्पणियां
संवैधानिक अधिकार एवं लैंगिक समानता
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प्रजनन का अधिकार (Reproductive Rights) आजीविका का अधिकार (Right to Livelihood)
• मां बनने या रोजगार में से किसी एक को चुनने • वैवाहिक स्थिति या गर्भावस्था सार्वजनिक रोजगार में
के लिए मजबूर करना असंवैधानिक है। अयोग्यता (Disqualification) नहीं बन सकती।
नौकरी और मातृत्व में से चुनने का दबाव असंवैधानिक
पीठ ने आयोग और राज्य सरकार के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, गर्भावस्था के आधार पर अपीलकर्ता को PET स्थगित करने से इनकार करना अनिवार्य रूप से एक महिला को बच्चा पैदा करने या रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करता है। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह उसके दोनों अधिकारों—प्रजनन के अधिकार और रोजगार के अधिकार में हस्तक्षेप करता है।
मानवीय दृष्टिकोण (Humane Approach) की आवश्यकता
अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन और परीक्षा प्रक्रिया के बीच 2 साल से अधिक का समय बीत गया था। इतने समय में विवाह और गर्भावस्था जीवन की स्वाभाविक घटनाएं हैं। चूंकि भर्ती नियमों में PET स्थगित करने पर कोई स्पष्ट रोक नहीं थी, इसलिए आयोग को ऐसी असाधारण परिस्थितियों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।
समानता और निष्पक्षता के सिद्धांत का पालन
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को उसके स्वाभाविक जीवन चक्र की परिस्थितियों के लिए दंडित करना समानता और निष्पक्षता (Principles of Equality and Fairness) के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
उच्च न्यायालय के निर्देश
- सिंगल जज का आदेश और आयोग का निर्णय रद्द: कोर्ट ने UPSSSC के इनकार वाले आदेश और सिंगल जज के पिछले फैसले को निरस्त कर दिया।
- 4 सप्ताह के भीतर PET आयोजित करने का आदेश: आयोग को निर्देश दिया गया कि वह याचिकाकर्ता का फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) अगले 4 हफ्तों के भीतर आयोजित करे।
- परिणाम एवं सेवा लाभ (Consequential Benefits): यदि याचिकाकर्ता PET और आगे के चरणों को उत्तीर्ण कर लेती हैं, तो उन्हें OBC महिला श्रेणी में उनसे कम अंक पाने वाली उम्मीदवार के समान तारीख से ही नियुक्ति और सभी परिणामी लाभ (Seniority & Benefits) दिए जाएंगे।
- पद सुरक्षित रखने का निर्देश: प्रक्रिया पूरी होने तक OBC महिला श्रेणी में एक पद (One Post) खाली रखने का आदेश दिया गया है।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला देश भर में महिलाओं के लिए रोजगार और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी जीत है। अदालत ने साफ कर दिया है कि मातृत्व कभी भी किसी महिला के करियर या सरकारी नौकरी पाने के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता।

