Friday, July 31, 2026
HomeHigh CourtA Place Of Commercial Activities: थाने बन गए कारोबार के अड्डे... बलिया...

A Place Of Commercial Activities: थाने बन गए कारोबार के अड्डे… बलिया में सिपाही के ट्रांसपोर्ट बिजनेस के केस में यूपी पुलिस पर टिप्पणी, पढ़ें

केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)

पहलूविधिक विवरण
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल
संबंधित जिला/थानाबलिया जिला (रसड़ा थाना)
आरोपी पुलिसकर्मीसिपाही संतोष कुमार (ट्रैफिक/ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने का आरोप)
मुख्य मुद्दाड्यूटी पर रहते हुए सरकारी धन (GPF) का उपयोग कर प्राइवेट बिजनेस चलाना व पुलिस तंत्र का दुरुपयोग
अगली सुनवाई11 अगस्त 2026

A Place Of Commercial Activities: उत्तर प्रदेश के पुलिस थानों में कानून व्यवस्था के बजाय व्यापारिक गतिविधियों में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

यह आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल (Justice Rohit Ranjan Agarwal) की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता हरेंद्र यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस स्टेशन अब कानून व्यवस्था संभालने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के अड्डे बन गए हैं। अदालत ने यह टिप्पणी बलिया जिले के रसड़ा थाने में तैनात एक कांस्टेबल पर परिवहन व्यवसाय चलाने के आरोप से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। बलिया जिले के रसड़ा थाने में तैनात एक सिपाही (Constable) द्वारा कथित रूप से ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने और उसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संरक्षण देने के मामले पर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए।

साथ ही रसड़ा थाने के सभी पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को कहा। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद हलफनामों और तथ्यों से ऐसा लगता है कि पूरा थाना ही व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय निजी कारोबार में व्यस्त नजर आ रहे हैं, जो बेहद गंभीर मामला है।

अदालत ने कहा कि “थाने व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बन गए हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय लगातार बिजनेस करने में व्यस्त हैं।”

मामला क्या था?

  • ट्रक ब्लैकलिस्ट करने का विवाद: याचिकाकर्ता (हरेंद्र यादव) के ट्रक को सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO), बलिया ने ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसके ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी।
  • सिपाही के साथ बिजनेस विवाद: यह कार्रवाई रसड़ा थाने में तैनात सिपाही संतोष कुमार और याचिकाकर्ता के बीच ट्रक के मालिकाना हक (Ownership Dispute) के विवाद के बाद सब-इंस्पेक्टर शिव मूर्ति तिवारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई थी।
  • GPF से पैसे निकाल कर शुरू किया बिजनेस: सुनवाई के दौरान जज ने जब सिपाही से सीधे सवाल-जवाब किए, तो सिपाही ने स्वीकार किया कि उसने अपने जीपीएफ (GPF) खाते से पैसे निकालकर अपने भाई के नाम पर याचिकाकर्ता के साथ मिलकर ट्रांसपोर्ट बिजनेस शुरू किया था और ट्रक खरीदा था।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख और टिप्पणियां

                                                        थाने में कमर्शियल गतिविधि का मामला
                                                                          │
        ┌────────────────────────────────┴────────────────────────────────┐
        ▼                                                                                                                                  ▼
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संरक्षण                                                                                          DGP एवं गृह सचिव को निर्देश
• SP बलिया और थाना प्रभारी ने सिपाही के                                                                  • रसड़ा थाने के सभी पुलिसकर्मियों पर विभागीय
  पक्ष में रिपोर्ट भेजकर उसे बचाया।                                                                           कार्यवाही और 10 दिनों में शपथ पत्र मांगा।

अगर यही हाल रहा तो कानून-व्यवस्था कैसे बचेगी?

अदालत ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गहरा सदमा (Shock) व्यक्त करते हुए कहा, अदालत यह देखकर स्तब्ध है कि थाने व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन गए हैं। पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय व्यापारिक गतिविधियों में लगे हुए हैं। यदि यही स्थिति रही तो कोई कानून-व्यवस्था कायम नहीं रखी जा सकती, क्योंकि थाने अब बिजनेस की जगह बन चुके हैं।

उच्च अधिकारियों ने सिपाही को बचाया

हाई कोर्ट ने नोट किया कि पुलिस अधीक्षक (SP) बलिया द्वारा दाखिल हलफनामे में यह कहीं नहीं लिखा था कि थाने में तैनात रहकर बिजनेस करने वाले सिपाही के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। इसके उलट, थाना प्रभारी और SP बलिया ने सिपाही का पक्ष लेते हुए ARTO को रिपोर्ट भेजी, जिसके आधार पर ट्रक को ब्लैकलिस्ट किया गया।

पूरा थाना कमर्शियल एक्टिविटी में शामिल

विभिन्न अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामों का अवलोकन करने के बाद पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित पूरा का पूरा थाना ही व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त है।

उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश

  1. DGP जांच के आदेश: यूपी के डीजीपी को रसड़ा थाने में चल रही कथित व्यावसायिक गतिविधियों की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।
  2. विभागीय कार्यवाही (Disciplinary Proceedings): डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश को रसड़ा थाने (बलिया) में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया।
  3. 10 दिनों में हलफनामा: डीजीपी को 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट के साथ अदालत के समक्ष हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया गया है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख पुलिस महकमे में बढ़ती व्यावसायिकता और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार है। अदालत ने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी का इस्तेमाल निजी बिजनेस चलाने या कानून को अपने हाथ में लेने के लिए किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
33.2 ° C
33.2 °
33.2 °
56 %
6.7kmh
99 %
Fri
34 °
Sat
36 °
Sun
31 °
Mon
33 °
Tue
34 °