Monday, November 2, 2026
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Public Examination: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026…पेपर्स लीक पर जेल-भारी जुर्माने का प्रावधान, यहां पूरा पढ़ें

संशोधन 2024 बनाम संशोधन 2026 (तुलनात्मक चार्ट)

प्रावधान2024 के मूल कानून में2026 के नए संशोधन अधिनियम में
व्यक्तिगत सजा (Jail Term)3 से 5 वर्ष5 से 10 वर्ष
व्यक्तिगत जुर्माना (Fine)₹10 लाख तक₹50 लाख तक
संगठित अपराध सजा5 से 10 वर्ष7 से 10 वर्ष
संगठित अपराध जुर्माना₹1 करोड़ तक₹10 करोड़ तक
जांच की समयसीमाकोई निश्चित सीमा नहीं2 महीने के भीतर
ट्रायल की समयसीमासामान्य प्रक्रियाफास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 महीने के भीतर

Public Examination: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक नेटवर्क पर नकेल कसने के उद्देश्य से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026] को अपनी मंजूरी दे दी है।

संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद बने इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य संगठित धोखाधड़ी सिंडिकेट को खत्म करना, पारदर्शी व समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है।

2024 के कानून में क्या-क्या बदले प्रमुख प्रावधान?

यह नया संशोधन कानून ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ के मुख्य प्रावधानों को संशोधित कर अधिक सख्त बनाता है।

संशोधन अधिनियम 2026 के कड़े प्रावधान
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      ▼              
व्यक्तिगत धांधली पर सजा           
• सजा: 5 से 10 वर्ष की जेल       
• जुर्माना: ₹50 लाख तक          
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संगठित अपराध (Paper Leaks)
  • सजा: 7 से 10 वर्ष की जेल 
 • जुर्माना: ₹10 करोड़ तक
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सर्विस प्रोवाइडर/संस्थानों पर
• जुर्माना: ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़
• बैन: 8 वर्षों तक परीक्षा कराने पर रोक

सजा व जुर्माने की दरों में बड़ा इजाफा

  • व्यक्तिगत परीक्षार्थियों/दोषियों हेतु: न्यूनतम सजा को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष (अधिकतम 10 वर्ष) कर दिया गया है। जुर्माना राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है।
  • संगठित पेपर लीक (Organised Crimes): संगठित गिरोहों के लिए न्यूनतम कारावास को 5 साल से बढ़ाकर 7 वर्ष (अधिकतम 10 वर्ष) और न्यूनतम जुर्माना राशि ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी गई है।
  • सर्विस प्रोवाइडर्स व प्रबंधन: परीक्षा आयोजित कराने वाली बाहरी एजेंसियों/कंपनियों द्वारा धांधली में संलिप्त पाए जाने पर अधिकतम जुर्माना ₹5 करोड़ कर दिया गया है। साथ ही ऐसी एजेंसियों को 8 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट (Debar) किया जाएगा। संलिप्त निदेशकों/वरिष्ठ अधिकारियों को न्यूनतम 5 वर्ष की जेल होगी।

समयबद्ध जांच, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट और अपील प्रक्रिया

2 महीने में जांच पूरी करने का नियम

कानून के तहत अपराध दर्ज होने के बाद 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन का अधिकार दिया गया है।

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट (Special Fast Track Courts)

  • प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से सत्र न्यायालय (Court of Session) को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करना होगा।
  • इन अदालतों में मुकदमों की सुनवाई प्रतिदिन (Day-to-Day basis) होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने (90 दिन) के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा।

अपीलीय व्यवस्था (Appellate Mechanism)

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों/आदेशों के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) के समक्ष होगी। हाई कोर्ट को भी ऐसी अपीलों का निपटारा प्रवेश की तिथि से 3 महीने के भीतर करना होगा।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

नीट-यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद संसद द्वारा लाया गया यह नया कानून अभ्यर्थियों के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा वैधानिक कदम है। समयबद्ध अदालती प्रक्रिया और कठोर आर्थिक व दंडात्मक प्रावधानों से पेपर लीक सिंडिकेट और भ्रष्ट संस्थानों पर लगाम लगने की उम्मीद है।

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