केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस संदीप मेहता |
| केस का नाम | जॉइंट फोरम ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (JFMTI) व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य |
| संबंधित अधिनियम | राष्ट्रीय अलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशंस अधिनियम, 2021 (NCAHP Act, 2021) |
| केंद्र सरकार के वकील | अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी |
| याचिकाकर्ता के वकील | एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जोबी पी. वर्गीज, राशि, एबी पी. वर्गीज एवं जगमीत सिंह रंधावा |
| अगली सुनवाई तिथि | 22 सितंबर 2026 |
हेल्थकेयर प्रोफेशंस एक्ट: अलाइड और पैरामेडिकल स्वास्थ्य पेशेवरों के नियमों और काउंसिल गठन से जुड़े ‘राष्ट्रीय अलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशंस एक्ट, 2021’ (NCAHP Act) के क्रियान्वयन में हो रही भारी देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य सचिवों और ‘राष्ट्रीय अलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशंस आयोग’ (NCAHP) को निर्देश दिया है कि वे कानून लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करें।
जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath) और जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग दो साल पहले (12 अगस्त 2024 को) दिए गए निर्देशों के बावजूद अधिकांश राज्यों और आयोग ने अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश और चेतावनियां
NCAHP अधिनियम 2021 लागू करने का सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम
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22 सितंबर 2026 की अंतिम समयसीमा
• स्टेट काउंसिल गठन और नियमों/विनियमों के नोटिफिकेशन
की स्थिति पर एफिडेविट जमा करने का आदेश।
व्यक्तिगत उपस्थिति की सख्त चेतावनी
• अनुपालन न करने पर मुख्य सचिवों व स्वास्थ्य सचिवों
को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।
व्यक्तिगत उपस्थिति की चेतावनी (Personal Attendance Warning)
अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक उसके निर्देशों का पालन नहीं किया गया और अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं हुआ, तो कोर्ट संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने के लिए मजबूर होगा। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 तय की गई है।
“इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए कि 12 अगस्त, 2024 के आदेश में दिए गए निर्देशों का अब तक पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है, हम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य सचिवों और राष्ट्रीय आयोग को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं…” — सुप्रीम कोर्ट
आदेश की तत्काल प्रतियां भेजने का निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति तुरंत सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, गृह सचिवों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और राष्ट्रीय आयोग को भेजी जाए ताकि अविलंब अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
मामला क्या है और याचिकाकर्ताओं का क्या तर्क है?
- याचिकाकर्ता: यह आदेश ‘जॉइंट फोरम ऑफ मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया’ (JFMTI) और अन्य द्वारा दायर एक रिट याचिका (Article 32) पर आया, जिसमें 2021 के इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई है।
- 2021 कानून का उद्देश्य: यह कानून पैरामेडिकल/अलाइड हेल्थकेयर क्षेत्र (जैसे- लैब टेक्नीशियन, रेडियोलॉजिस्ट आदि) की शिक्षा, प्रशिक्षण, मानक और बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अवैध संस्थानों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया था।
- लापरवाही और बार-बार डेडलाइन विस्तार:
- कानून 25 मई 2021 को लागू हुआ था।
- केंद्र सरकार ने इसकी समयसीमा को 5 बार बढ़ाया।
- 12 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2024 तक इसे पूर्ण रूप से लागू करने का रोडमैप मांगा था।
- अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष: याचिकाकर्ताओं ने पीठ को बताया कि राष्ट्रीय आयोग ने धारा 66 के तहत अब तक नियम/विनियम (Regulations) नहीं बनाए हैं। केवल 15 राज्यों ने नियम बनाकर काउंसिल का गठन किया है, लेकिन वे भी या तो अधिसूचित (Notified) नहीं हैं या निष्क्रिय (Non-functional) हैं।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
देश भर के लाखों अलाइड और पैरामेडिकल हेल्थकेयर पेशेवरों के भविष्य और मानक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा आदेश मील का पत्थर साबित हो सकता है। 22 सितंबर 2026 तक यदि राज्य सरकारों ने राज्य काउंसिल और नियमों को अधिसूचित नहीं किया, तो वरिष्ठ अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा।

