ITAT दिल्ली के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
- धारा 270A (Section 270A) लागू न होना: ITAT ने माना कि धारा 270A केवल तब लागू होती है जब करदाता ने अपनी आय छिपाई हो या गलत आय घोषित की हो। इस मामले में ₹1.17 करोड़ की पूरी आय ITR में पहले से दिखाई गई थी।
- केवल टैक्स रेट पर विवाद पेनल्टी का आधार नहीं: ट्रिब्यूनल ने कहा कि DTAA के तहत लागू होने वाले टैक्स रेट पर विभाग और करदाता के बीच कानूनी व्याख्या का अंतर हो सकता है, लेकिन इसे धोखाधड़ी या अंडर-रिपोर्टिंग नहीं कहा जा सकता।
- TDS क्रेडिट मुद्दा: अतिरिक्त TDS क्रेडिट दावे के मुद्दे पर भी ट्रिब्यूनल ने पाया कि करदाता का स्पष्टीकरण संतोषजनक था और यह पेनल्टी लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
नई दिल्ली: आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT), दिल्ली पीठ ने प्रत्यक्ष कर न्यायशास्त्र और पेनल्टी प्रावधानों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए करदाता को बड़ी राहत दी है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि जब करदाता ने अपने आयकर रिटर्न (ITR) में नाबालिग बच्चे की संपूर्ण आय का विधिवत खुलासा किया हो और विवाद केवल भारत-यूएई दोहरे कराधान परिहार समझौते (India-UAE DTAA) के तहत लागू टैक्स दर (Tax Rate) की व्याख्या को लेकर हो, तो इसे ‘आय की कम रिपोर्टिंग’ (Under-reporting of Income) मानकर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 270A के तहत पेनल्टी नहीं लगाई जा सकती। आईटीएटी दिल्ली ने निर्धारण अधिकारी (AO) और सीआईटी (अपील) द्वारा लगाए गए ₹12.83 लाख के दंडात्मक आदेश को पूरी तरह निरस्त (Delete) कर दिया।
ITAT दिल्ली की प्रमुख टिप्पणियां और विधिक सिद्धांत
1. ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ और ‘टैक्स दर के विधिक विवाद’ में अंतर
अधिकरण ने धारा 270A के मूल तत्वों की व्याख्या करते हुए कहा: “आयकर अधिनियम की धारा 270A का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब करदाता द्वारा आय की कम रिपोर्टिंग (Under-reporting) या गलत रिपोर्टिंग (Misreporting) की गई हो। ₹1.17 करोड़ की ब्याज आय से जुड़ा विवाद किसी आय को छुपाने (Concealment) या गैर-प्रकटीकरण का नहीं था, बल्कि केवल भारत-यूएई संधि (DTAA) के तहत रियायती टैक्स दर लागू होने की विधिक व्याख्या से संबंधित था। चूंकि विवादित आय का ITR में पूर्ण प्रकटीकरण था और वह आकलित आय (Assessed Income) में शामिल थी, इसलिए पेनल्टी का कोई विधिक आधार नहीं बनता।”
2. टीडीएस क्रेडिट (TDS Credit) विवाद पर पेनल्टी अनुचित
- एओ ने ₹2.62 लाख के टीडीएस क्रेडिट के दावे को भी पेनल्टी का आधार बनाया था।
- आईटीएटी ने करदाता के स्पष्टीकरण को संतोषजनक पाते हुए कहा कि इस तकनीकी मुद्दे को भी करदाता के आचरण को ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ या दुर्भावनापूर्ण साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि
- आय की घोषणा (ITR): नई दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर निवासी करदाता ने 4 नवंबर 2022 को दाखिल अपने ITR में ₹8.43 करोड़ की कुल आय घोषित की थी, जिसमें उनके नाबालिग बच्चे की ₹1.17 करोड़ की ब्याज आय भी शामिल थी।
- विवाद की वजह (India-UAE DTAA): करदाता ने नाबालिग की रेजिडेंसी स्थिति के आधार पर भारत-यूएई संधि (DTAA) के तहत रियायती टैक्स दर का दावा किया था।
- एओ की कार्रवाई (22 मार्च 2025):
- एसेसिंग ऑफिसर (झंडेवालान, दिल्ली) ने आय को पिता के हाथों में क्लब करते हुए DTAA की रियायती दर देने से इनकार कर दिया और सामान्य दर से टैक्स लगाया।
- इसके अतिरिक्त, एओ ने करदाता पर धारा 270A के तहत देय कर का 50% यानी ₹12.83 लाख की पेनल्टी ठोक दी।
- अपील: सीआईटी (अपील्स) द्वारा पेनल्टी आदेश की पुष्टि किए जाने के बाद करदाता ने आईटीएटी दिल्ली के समक्ष अपील दायर की थी।
नाबालिग की आय के कराधान से जुड़े प्रमुख विधिक नियम (Clubbing of Income)
| प्रावधान / नियम | कानूनी स्थिति व सीमा |
| आय का जुड़ना (धारा 64(1A)) | 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग की आय उस माता या पिता की आय में जोड़ी (Club) जाती है, जिसकी कर योग्य आय अधिक हो। |
| छूट की सीमा (धारा 10(32)) | क्लबिंग की स्थिति में प्रति नाबालिग बच्चे पर प्रति वित्तीय वर्ष ₹1,500 तक की कर छूट स्वीकार्य है। इससे अधिक आय पर सामान्य स्लैब से टैक्स लगता है। |
| अपवाद (स्वयं का कौशल/हुनर) | यदि नाबालिग अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा, विशेष ज्ञान, खेल (जैसे क्रिकेट, शतरंज), अभिनय, गायन, कोडिंग या मैनुअल वर्क से आय अर्जित करता है, तो वह आय क्लब नहीं होगी और नाबालिग के अपने पैन पर टैक्स लगेगा। |
आईटीएटी का अंतिम आदेश
- पेनल्टी आदेश रद्द: आईटीएटी दिल्ली ने 28 जुलाई 2026 के आदेश के तहत धारा 270A के तहत लगाए गए ₹12.83 लाख के संपूर्ण जुर्माने को निरस्त कर दिया।
- करदाता को राहत: अधिकरण ने स्पष्ट किया कि विधिक राय या संधि के लाभ के वास्तविक दावे को दुर्भावनापूर्ण छिपाव नहीं कहा जा सकता।
Penalty Over Minor Child:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित ट्रिब्यूनल | आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT), दिल्ली पीठ |
| फैसले की तारीख | 28 जुलाई 2026 |
| मुख्य विवाद | नाबालिग बच्चे की ₹1.17 करोड़ ब्याज आय पर ₹12.83 लाख की पेनल्टी |
| विवादित धारा | इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A (Under-reporting of Income) |
| मुख्य मुद्दा | India-UAE DTAA के तहत रियायती टैक्स दर का दावा |
| ITAT का फैसला | पेनल्टी का आदेश पूरी तरह रद्द किया गया। |

