केस मैट्रिक्स एवं प्रशासनिक सारांश (Overview Matrix)
| प्रशासनिक श्रेणियां / बिंदु | सुप्रीम कोर्ट का नया कदम |
| समिति का उद्देश्य | मामलों की लिस्टिंग, कॉज़ लिस्ट के सरलीकरण और दैनिक क्रम (Sequencing) में सुधार |
| समिति के सदस्य (Judges) | जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस वी. मोहना |
| प्रशासनिक पीठ (CJI Bench) | CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना |
| संबंधित संस्था | सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) |
| मुख्य समस्या | सुबह 10:30 बजे अचानक केस सीक्वेंस बदलने से वकीलों को कोर्ट रूम बदलने में होने वाली असुविधा |
| अदालत का रुख | फुल कोर्ट के फैसले के बाद समिति गठित; सिफारिशों के आधार पर जल्द नया सिस्टम लागू होगा |
Uniform Sequencing: सुप्रीम कोर्ट में मामलों की दैनिक सुनवाई (Cause List) में पारदर्शिता, स्थिरता और एकरूपता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
यह समिति दैनिक कॉज़ लिस्ट (Daily Cause List) को सरल बनाने, मामलों को उनके सूचीबद्ध क्रम के अनुसार सुने जाने को सुनिश्चित करने, तथा सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) द्वारा दिए गए सुझावों का परीक्षण करने का कार्य करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की लिस्टिंग प्रक्रिया में सुधार करने और दैनिक मुकदमों की क्रमिक सुनवाई (Uniform Sequencing) सुनिश्चित करने के लिए तीन न्यायाधीशों की एक विशेष समिति का गठन किया है।
समिति का गठन और संरचना (Committee Formation & Structure)
28 जुलाई 2026 को जारी एक प्रशासनिक आदेश के अनुसार, इस 3-सदस्यीय समिति में निम्नलिखित न्यायाधीश शामिल हैं।
- जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath)
- जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा (Justice PS Narasimha)
- जस्टिस वी. मोहना (Justice V. Mohana)
इसके अलावा, रजिस्ट्रार (जुडिशियल लिस्टिंग) भी समिति को उसकी कार्यप्रणाली में सहायता प्रदान करेंगे।
मामला क्या था? (Background & Main Concerns)
- अदालत शुरू होने से ठीक पहले मामलों के क्रम में अंतिम समय पर होने वाले बदलावों को लेकर वकीलों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
- वकीलों की मुख्य समस्या: सुबह की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मुद्दे को उठाया।
- अंतिम समय में बदलाव: भाटिया ने कहा कि सुबह 10:29 या 10:30 बजे (अदालत शुरू होने से ठीक एक मिनट पहले) संशोधित क्रमिक सूची जारी की जाती है। इससे अधिवक्ताओं को यह पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें किस कोर्ट रूम में उपस्थित होना है। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए मानवीय रूप से संभव नहीं है कि हम इस तरह अदालत की सहायता कर सकें।”
- SCAORA का प्रतिनिधित्व: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने लंबे समय से लिस्टिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, कुशल और अनुमानित (Predictable) बनाने के लिए इस मुद्दे को उठाया था।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का रुख
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकीलों की चिंताओं को वाजिब ठहराते हुए कहा कि इस मुद्दे को पहले ही फुल कोर्ट (Full Court) की बैठक में रखा गया था।
“मामले को फुल कोर्ट में उठाया गया था। मैं इस तरह के मुद्दों पर अकेले फैसला नहीं लेता। मैंने सभी साथी न्यायाधीशों के समक्ष इस मामले को रखा, जिसके बाद एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। समिति का गठन हो चुका है और वह काम कर रही है। सिफारिशें आने के बाद हम इसका स्थायी समाधान निकालेंगे।”
मुख्य न्यायाधीश ने बार (Bar) के सदस्यों को आश्वासन दिया कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद इस समस्या का व्यावहारिक समाधान खोज लिया जाएगा।

