Monday, September 21, 2026
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Women Police Facility: महिला पुलिसकर्मियों के लिए थाने में अलग शौचालय और सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें बनाएं…हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुदिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश (अगस्त 2026)
माननीय पीठमुख्य न्यायाधीश (CJ) देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया
याचिकाकर्ताजस्टिस फॉर Rights फाउंडेशन (महिला सेल)
मुख्य मुद्दादिल्ली के थानों में महिला पुलिसकर्मियों हेतु शौचालयों व सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों की कमी
अदालत का निर्देश6 सप्ताह में सभी थानों का सर्वे; सेनेटरी वेंडिंग मशीनें व शौचालय उपलब्ध कराकर हलफनामा दाखिल करने का आदेश।

Women Police Facility: दिल्ली की अदालतों में महिलाओं के बुनियादी स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़े मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

प्रभारी मुख्य न्यायाधीश (CJ) देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाए। हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) को राष्ट्रीय राजधानी के सभी पुलिस स्टेशनों का तत्काल सर्वेक्षण करने और जहां भी कमी हो, वहां महिला पुलिसकर्मियों के लिए समर्पित शौचालय (Exclusive Washrooms) और सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाने का आदेश दिया है।

6 सप्ताह के भीतर सर्वेक्षण और अनुपालन का निर्देश

अदालत ने माना कि महिला पुलिसकर्मियों को बिना बुनियादी सैनिटेशन और मेंस्ट्रुअल हाइजीन (मासिक धर्म स्वच्छता) सुविधाओं के काम करने पर मजबूर करना उनके मूलभूत अधिकारों का हनन है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश: “दिल्ली पुलिस आयुक्त 6 सप्ताह के भीतर सभी पुलिस स्टेशनों का सर्वेक्षण कराएंगे। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें और महिला पुलिसकर्मियों के विशेष उपयोग के लिए अलग शौचालय सुनिश्चित करने के कदम उठाए जाएंगे। अगली सुनवाई तक दिल्ली पुलिस हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करे।”

याचिका का आधार: RTI से खुलासा और मौलिक अधिकार

  • जनहित याचिका (PIL): यह याचिका एनजीओ जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन (Justice for Rights Foundation) की महिला सेल प्रतिनिधि मुस्कान सिंह बांकुरा द्वारा दायर की गई थी।
  • RTI से हुआ खुलासा: याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि दिल्ली के थानों में क्रियाशील सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनों, मासिक धर्म अपशिष्ट भस्मकों (Menstrual Waste Incinerators) और समर्पित बजट आवंटन की भारी कमी है।
  • संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: याचिका में तर्क दिया गया कि चौबीसों घंटे सेवा देने वाली हजारों महिला पुलिसकर्मियों को बुनियादी सैनिटेशन के बिना ड्यूटी करने पर मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव के खिलाफ अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमा, स्वास्थ्य और निजता के साथ जीने का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
  • अन्य मॉडलों का उदाहरण: याचिका में मुंबई पुलिस की ‘स्मार्ट मैत्रिण’ (Smart Maitrin) परियोजना, सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों और लेह जिला पुलिस द्वारा दी गई आधुनिक सुविधाओं का भी उदाहरण दिया गया।

इन अधिवक्ताओं ने पैरवी की

  • याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता कर्णिका बहुगुणा, पूजा कुशवाहा और विपाशा जैन प्रस्तुत हुईं।
  • दिल्ली पुलिस की ओर से: अदालत ने प्रतिवादी (दिल्ली पुलिस) को अगले हलफनामे में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

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