Saturday, September 26, 2026
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Commercial Courts: कारोबार में सुगमता के लिए वाणिज्यिक विवादों का तेजी से निपटारा जरूरी; राज्यों से कमर्शियल कोर्ट्स के आंकड़े मांगे गए

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (10 अगस्त 2026)
माननीय पीठCJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
संबंधित अधिनियमCommercial Courts Act, 2015
मुख्य उद्देश्यEase of Doing Business को बढ़ावा देना और वाणिज्यिक मुकदमों का समयबद्ध निपटारा
मांगा गया डेटा31 जनवरी 2026 तक लंबित मामलों की संख्या, कोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और भविष्य का अनुमान
अगली सुनवाईदो सप्ताह बाद

Commercial Courts: सुप्रीम कोर्ट ने देश में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए वाणिज्यिक मुकदमों (Commercial Disputes) के त्वरित निपटारे को बेहद अहम बताया है। शीर्ष अदालत ने राज्यों में मामलों के बढ़ते रुझान का आकलन करते हुए अधिक संख्या में वाणिज्यिक न्यायालयों (Commercial Courts) की आवश्यकता पर बल दिया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने देश भर में लंबित वाणिज्यिक मामलों की संख्या और इन अदालतों को प्रदान किए गए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर नवीनतम डेटा मांगा है।

CJI सूर्य कांत ने कमर्शियल कोर्ट्स की स्थापना के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा: वाणिज्यिक अदालतों की पूरी अवधारणा मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है… ‘इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) का एक प्रमुख हिस्सा यह भी है कि अदालतों द्वारा वाणिज्यिक विवाद का फैसला कितनी तेज़ी से किया जाता है।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और दिशा-निर्देश

  1. राज्यवार और चरणबद्ध (Phased) मूल्यांकन की आवश्यकता:
    • मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त अदालतों की आवश्यकता हर राज्य में अलग-अलग होगी।
    • CJI ने टिप्पणी की: “कुछ राज्यों में बड़े महानगरीय या शहरी क्षेत्र हैं जहां अन्य ग्रामीण बहुल राज्यों की तुलना में वाणिज्यिक मुकदमेबाजी बहुत अधिक हो सकती है। बुनियादी ढांचे और न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता के कारण एक बार में सभी अदालतें स्थापित करना संभव नहीं है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से आवश्यकता का आकलन करना होगा।”
  2. 31 जनवरी 2026 तक का नवीनतम डेटा तलब:
    • अदालत ने 31 जनवरी 2026 तक लंबित वाणिज्यिक मुकदमों की अद्यतन स्थिति और कमर्शियल कोर्ट्स को उपलब्ध कराए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
  3. मुकदमेबाजी के बढ़ते रुझान का अनुमान:
    • सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को राज्यों में वाणिज्यिक मुकदमों के बढ़ते रुझान पर राज्यवार डेटा एकत्र करने और अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतों की आवश्यकता का एक अनुमानित खाका तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि इस संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए जा सकें।

मामले का संदर्भ (Context)

  • न्याय मित्र (Amicus Curiae) का पक्ष: एमीकस क्यूरी ने पीठ को सूचित किया कि अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी उच्च न्यायालयों को वाणिज्यिक मामलों के निपटारे में लगने वाले समय का ब्योरा देने के निर्देश के बावजूद, यह जानकारी अभी तक ऑन-रिकॉर्ड नहीं रखी गई है।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने भी अदालत से सहमति जताते हुए कहा कि वाणिज्यिक मुकदमों का भार और नए कोर्ट्स की जरूरत हर राज्य के औद्योगिक व आर्थिक परिदृश्य के हिसाब से अलग-अलग है।

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