केस एवं कानूनी सारांश (Overview Matrix)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (August 2026) |
| माननीय पीठ | CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना (सर्वोच्च न्यायालय) |
| याचिकाकर्ता | अश्विनी कुमार उपाध्याय (अधिवक्ता एवं नेता) |
| संबंधित कानून | Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (NDPS) Act, 1985 |
| मुख्य चिंता | देश भर में ड्रग्स तस्करी का प्रसार, सीमा पार तस्करी (Golden Crescent) और युवाओं पर प्रभाव। |
| मांगे गए मुख्य सुधार | 1. FSL रिपोर्ट एवं जांच के लिए अनिवार्य समय-सीमा। 2. सैंपलिंग और जब्ती के लिए राष्ट्रीय SOP। 3. नए साइकोट्रॉपिक पदार्थों की पहचान हेतु विशेषज्ञ समिति। 4. तस्करों की संपत्तियों की त्वरित जप्ती। |
| अदालत का आदेश | केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी। |
NDPS Act: सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन (Drug Abuse) और तस्करी (Trafficking) के मामलों पर गहरा ध्यान और चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि मादक पदार्थों की तस्करी एक बेहद गंभीर स्थिति है, जो पूरे देश में फैल रही है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत प्रवर्तन उपायों और जांच प्रक्रियाओं में बड़े सुधारों की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
CJI सूर्य कांत ने टिप्पणी की: “यह एक बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। आखिरकार, यह कानून-व्यवस्था तंत्र पर निर्भर करता है, और यह (ड्रग्स का प्रसार) पूरे देश में फैल रहा है।” सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने सीमा पार से होने वाली ड्रग्स तस्करी, विशेषकर ‘गोल्डन क्रीसेंट’ (Golden Crescent) क्षेत्र की ओर इशारा करते हुए कहा:“ये सभी बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं। भारत की जिस तरह की अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ हैं, उसे देखते हुए आप गोल्डन क्रीसेंट (अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान क्षेत्र) और बर्मा (म्यांमार) की स्थिति देख सकते हैं।”
याचिका में क्या मांगें और सिफारिशें की गई हैं?
यह जनहित याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) के बीच के गठजोड़ को देश की आंतरिक सुरक्षा और युवाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया गया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख सुधारों की मांग की
- FSL रिपोर्ट के लिए अनिवार्य समय-सीमा: NDPS के सभी मामलों में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट जमा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा अनिवार्य की जाए।
- तलाशी, जब्ती और नमूना लेने हेतु SOP: छोटी और मध्यवर्ती मात्रा (Small & Intermediate Quantities) वाले मामलों में जब्ती और सैंपलिंग (Sampling) के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) बनाई जाए।
- समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई: मामलों की समयबद्ध जांच (Time-bound Investigation) और स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) के लिए एक व्यापक SOP तैयार हो।
- विशेषज्ञ समिति का गठन: नए प्रकार के साइकोट्रॉपिक (मनःप्रभावी) पदार्थों की त्वरित पहचान और उन्हें प्रतिबंधित सूची (Scheduling) में शामिल करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई जाए।
- तस्करों की संपत्ति की कुर्की: नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों, वित्तीय मदद देने वालों (Financiers) और उनके सहयोगियों की संपत्तियों को समयबद्ध तरीके से जब्त/कुर्क (Confiscation of Property) करने का निर्देश दिया जाए।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का रुख
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को महत्वपूर्ण मानते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
- अदालत अब इस मामले में राज्यों और केंद्र के जवाबों की समीक्षा करेगी ताकि NDPS कानून के प्रवर्तन को मजबूत और त्वरित बनाया जा सके।

