Tuesday, September 29, 2026
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Using ‘Slang’ Against Judge: जज के खिलाफ ‘अपशब्द’ का प्रयोग करने पर वकील को कड़ी फटकार, लाइवस्ट्रीम पर माफी मांगने का निर्देश

⚖️ अवलोकनीय बिंदु (Key Takeaways Matrix)

पहलूविवरण
मामलाIn Re : Firdous Samim (कलकत्ता उच्च न्यायालय)
पीठACJ तपाब्रत चक्रवर्ती एवं न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी
मुख्य मुद्दालाइव कोर्ट कार्यवाही के दौरान जज के खिलाफ असंसदीय भाषा/अपशब्द का प्रयोग
अदालत का आदेशसंबंधित जज के समक्ष लाइवस्ट्रीम पर माफी मांगना + लिखित हलफनामा (Undertaking) देना।
कानूनी स्थितिमाफी मांगने के बाद खंडपीठ तय करेगी कि आपराधिक अवमानना जारी रखनी है या नहीं।

Using ‘Slang’ Against Judge: कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के न्यायाधीश के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा (Slang) का प्रयोग करने वाले एक वकील (फिरदौस समीम) को कड़ी फटकार लगाई है।

अदालत ने वकील को संबंधित जज के समक्ष अदालत की लाइव कार्यवाही (Livestream) के दौरान सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में ऐसा आचरण न दोहराने का लिखित वचनबद्धता पत्र (Written Undertaking/Affidavit) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही को बंद किया जाए या आगे बढ़ाया जाए।

🏛️ सुनवाई की मुख्य बातें एवं कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

  1. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तपाब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की पीठ
    • संस्थान की साख को नुकसान: कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह हमारे उच्च न्यायालय का वकील है। पूरे देश में यह संदेश जा रहा है कि आपके उच्च न्यायालय में ऐसे वकील हैं और आप लोग चुप रहते हैं तथा कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाते।”
    • वकील और आम नागरिक का अंतर: कोर्ट ने टिप्पणी की कि वकील कोई आम नागरिक (Layman) नहीं है जो दबाव या अनजाने में ऐसी गलती कर दे। याचिका खारिज होने के बाद अदालत में बहस को अपशब्द के साथ समाप्त करना बेहद गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना है।
  2. गुस्सा या दबाव कोई बहाना नहीं
    • वकील के वकील (वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मित्रा) की इस दलील को खारिज करते हुए कि यह अत्यधिक काम के दबाव के कारण हुआ, कोर्ट ने कहा: “वकील के पास बहुत काम हो सकता है, गुस्सा आ सकता है, लेकिन यह व्यवहार अपेक्षित नहीं है। यदि आप नाराज हैं तो कोर्ट रूम से बाहर जाकर अपने दोस्तों से चर्चा कर सकते हैं, लेकिन खुली अदालत में जज के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी नहीं कर सकते।”
  3. वकालत की मर्यादा (Standard of Advocacy)
    • पीठ ने वकालत के सिद्धांतों को याद दिलाते हुए कहा: “कानून का मूल प्रशिक्षण यही है कि हम यह नहीं कह सकते कि ‘Your Lordship is wrong’ (आप गलत हैं)। हमें यह कहना होता है कि ‘Your Lordship may give a second thought’ (आप इस पर पुनर्विचार कर सकते हैं)… यही वास्तविक वकालत है।”
  4. केवल माफी से छूट नहीं:
    • कोर्ट ने कहा कि केवल “मुझे खेद है” कहकर छूट जाने देने से गलत मिसाल कायम होगी। कल को कोई भी याचिका खारिज होने पर अपशब्द कहकर माफी मांग लेगा। इतिहास में यह नहीं दर्ज होना चाहिए कि हाईकोर्ट के जजों पर अशोभनीय टिप्पणी करने के बाद किसी वकील को केवल एक साधारण माफीनामे के आधार पर छोड़ दिया गया।

📂 मामले की पृष्ठभूमि (Case History)

  • घटना: यह मामला 23 जुलाई को एकल पीठ के समक्ष हुई सुनवाई से जुड़ा है, जहां याचिका खारिज होने पर वकील फिरदौस समीम पर लाइव सुनवाई के दौरान असंसदीय शब्द का प्रयोग करने का आरोप लगा।
  • सुओ मोटो अवमानना: उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को इस घटना का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए वकील को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
  • अगला कदम: वकील संबंधित जज के सामने लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान माफी मांगेंगे और हलफनामा देंगे। उसके बाद ही अवमानना पीठ तय करेगी कि मामला समाप्त किया जाए या अवमानना का औपचारिक नियम (Rule of Contempt) जारी किया जाए।

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