Tuesday, October 13, 2026
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Attempt Rape: महिला पर लेटना और मुंह दबाना, बिना प्रवेशन की दिशा में किसी कृत्य के, बलात्कार का प्रयास नहीं; यह तैयारी के चरण से आगे बढ़कर लज्जा भंग का अपराध है

पटना हाईकोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष

  1. ‘तैयारी’ (Preparation) और ‘प्रयास’ (Attempt) के बीच का अंतर:अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अमन कुमार मामले (Aman Kumar v. State of Haryana) का हवाला देते हुए कहा कि अभद्र हमलों (Indecent Assaults) को अक्सर बलात्कार के प्रयास के रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया जाता है। IPC 376/511 लागू करने के लिए ऐसा साक्ष्य होना अनिवार्य है जो यह दिखाए कि अभियुक्त ने अपनी वासना पूर्ति के लिए हर संभव प्रतिरोध के बावजूद यौन प्रवेश (Penetration) की दिशा में कदम बढ़ाया था।
  2. कपड़े न हटाना और पेनिट्रेशन का प्रयास न होना:न्यायामूर्ति संदीप कुमार ने अपने आदेश में दर्ज किया:“मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त ने खुद के या पीड़िता के वस्त्र हटाए थे, या यौन प्रवेश (Penetration) की दिशा में कोई कार्य किया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वह ‘तैयारी के चरण’ (Stage of Preparation) से आगे बढ़ा था।”
  3. IPC की धारा 354 (Outraging Modesty) के तहत दोषसिद्धि:अदालत ने माना कि रात के समय महिला के घर में घुसना, चिराग बुझाना, उसके ऊपर लेटना और मुंह दबाना निस्संदेह महिला की लज्जा और शालीनता को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। अतः IPC की धारा 354 के सभी तत्व पूरी तरह से स्थापित होते हैं।
  4. CrPC की धारा 222(2) का प्रयोग:दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 222(2) का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि मुख्य/बड़े अपराध (Major Offence – 376/511) के साक्ष्य अपर्याप्त हों, तो साबित तथ्यों के आधार पर अदालत अभियुक्त को छोटे अपराध (Minor Offence – 354) के तहत दोषी ठहरा सकती है—भले ही उस धारा में अलग से आरोप न तय किए गए हों।

पटना: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 सहपठित धारा 511 के तहत ‘बलात्कार के प्रयास’ (Attempt to Rape) बनाम धारा 354 के तहत ‘स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से हमला’ (Outraging Modesty) के बीच विधिक अंतर, आपराधिक विधि में ‘तैयारी’ (Preparation) और ‘प्रयास’ (Attempt) का सीमांकन, तथा दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 222(2) के तहत छोटे अपराध (Minor Offence) में दोषसिद्धि के सिद्धांतों पर पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

4 वर्ष के सश्रम कारावास के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई

न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने बेगूसराय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-V द्वारा 2013 में पारित दोषसिद्धि और 4 वर्ष के सश्रम कारावास के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा धारा 376/511 IPC के तहत दी गई सजा को खारिज कर अभियुक्त को धारा 354 IPC के तहत दोषी ठहराया और उसकी सजा को उसके द्वारा पहले ही जेल में बिताई गई अवधि (Period Already Undergone) तक सीमित कर दिया। अदालत ने व्यवस्था दी है कि केवल किसी महिला के ऊपर लेटना और उसका मुंह दबाना, जब तक कि प्रवेशन (Penetration) की दिशा में कोई ठोस कदम न उठाया गया हो या कपड़े उतारने/हटाने का साक्ष्य न हो, बलात्कार के प्रयास का अपराध गठित नहीं करता।

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उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक टिप्पणियां

1. ‘तैयारी और प्रयास के बीच का अंतर; प्रवेशन की दिशा में कोई कृत्य नहीं’

न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला देते हुए दर्ज किया:

“अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों पर पूर्वोक्त सिद्धांतों को लागू करते हुए, अपीलकर्ता द्वारा देर रात एक सोई हुई विधवा के आवासीय घर में प्रवेश करना, दीया बुझाना, उसके शरीर पर लेटना और उसका मुंह दबाना निस्संदेह एक ऐसा कृत्य है जो एक महिला की शालीनता की भावना (Sense of decency) को आहत करने में पूरी तरह सक्षम है।

अपीलकर्ता का आपराधिक आशय स्वयं इस कृत्य से और पीड़िता द्वारा बताए गए उसके पूर्व आचरण से स्पष्ट है। अतः IPC की धारा 354 के सभी आवश्यक तत्व स्थापित होते हैं। परंतु, इस बात का कोई साक्ष्य न होने के कारण कि अपीलकर्ता ने स्वयं अपने या पीड़िता के कपड़े उतारे थे, या प्रवेशन (Penetration) की दिशा में कोई कृत्य किया था, यह नहीं माना जा सकता कि वह ‘तैयारी के चरण’ (Stage of preparation) से आगे बढ़ गया था और उसने कोई ऐसा कृत्य किया था जो यदि निर्बाध रहता तो बलात्कार का अपराध घटित हो जाता।”

2. सुप्रीम कोर्ट के अमन कुमार बनाम हरियाणा राज्य फैसले का संदर्भ:

  • अदालत ने शीर्ष अदालत के विधिक मानक को उद्धृत करते हुए कहा:“सर्वोच्च न्यायालय के शब्दों में, अक्सर अशोभनीय हमलों (Indecent assaults) को बढ़ा-चढ़ाकर बलात्कार के प्रयास का रूप दे दिया जाता है। बलात्कार के प्रयास का निष्कर्ष निकालने के लिए ऐसी सामग्री मौजूद होनी चाहिए जो यह दर्शाए कि अभियुक्त हर हाल में और पीड़िता के सभी प्रतिरोधों के बावजूद अपनी वासना को तृप्त करने का पक्का इरादा रखता था।”

3. CrPC की धारा 222(2) के तहत छोटे अपराध में दोषसिद्धि:

  • अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अभियुक्त पर अलग से धारा 354 IPC का आरोप तय नहीं किया गया था, फिर भी CrPC की धारा 222(2) (अब BNSS की धारा 245) के तहत यदि बड़े अपराध के घटक साबित नहीं होते लेकिन छोटे अपराध (Minor Offence) के घटक साबित होते हैं, तो अदालत अभियुक्त को छोटे अपराध में दोषी ठहरा सकती है।

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं ट्रायल कोर्ट का फैसला

विवरणघटनाक्रम एवं तथ्य
घटना की तिथि व समय8 फरवरी 2010, रात्रि लगभग 10:00 बजे।
स्थान एवं पक्षकारपीड़िता (एक विधवा जो अपने बच्चों के साथ फूस के घर में रहती थी) बेगूसराय, बिहार।
अभियोजन का कथानकअपीलकर्ता चुपके से घर में घुसा, जलता हुआ दीया बुझाया, सो रही महिला के ऊपर लेट गया और उसका मुंह दबा दिया ताकि वह शोर न मचा सके। महिला द्वारा शोर मचाने पर ग्रामीण एकत्र हुए और अभियुक्त को पकड़ लिया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला (2013)अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-V, बेगूसराय ने 29 जुलाई 2013 को अभियुक्त को दोषी ठहराया और 1 अगस्त 2013 को धारा 376/511 IPC के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास तथा धारा 448 IPC (गृह-अतिचार) के तहत 6 माह के कारावास की सजा सुनाई।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलेंअपीलकर्ता के वकीलों (परितोष परिमल और मोहम्मद फहीमुद्दीन) ने दलील दी कि पीड़िता के कपड़े फटे नहीं थे, शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे, कोई मेडिकल जांच नहीं कराई गई थी और उसे पकड़ने वाले ग्रामीणों का गवाही में परीक्षण नहीं कराया गया था।

विधिक विश्लेषण: ‘तैयारी’ (Preparation) बनाम ‘प्रयास’ (Attempt)

भारतीय आपराधिक विधि में किसी अपराध के चार चरण होते हैं:

  1. आशय (Intention)
  2. तैयारी (Preparation) — सामान्यतः दंडनीय नहीं (कुछ अपवादों जैसे देशद्रोह या डकैती को छोड़कर)।
  3. प्रयास (Attempt) — धारा 511 IPC / धारा 62 BNS के तहत दंडनीय।
  4. अपराध का निष्पादन (Commission of Offence)
┌─────────────────────────────────┐
│ अपराध के चरण: धारा 354 बनाम धारा 376/511 IPC  │
└─────────────────┬───────────────┘
                                    │
┌────────────────┴───────────────┐
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【धारा 354 IPC: लज्जा भंग (Outraging Modesty)】        【धारा 376/511 IPC: बलात्कार का प्रयास】
• आपराधिक बल का प्रयोग या हमला।                     • तैयारी के चरण को पूरी तरह पार कर जाना।
• स्त्री की शालीनता/लज्जा को ठेस पहुंचाने का आशय।   • प्रवेशन (Penetration) का प्रत्यक्ष कदम उठाना।
• कपड़े न उतरना या प्रवेशन का प्रयास न होना भी      • यदि कोई बाहरी रुकावट न आए, तो कृत्य सीधे
  इस धारा के तहत दंडनीय है।                            बलात्कार में परिणत होने की दहलीज पर होना चाहिए।

चूंकि 2013 के आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम से पूर्व धारा 354 जमानती और अधिकतम 2 वर्ष के कारावास से दंडनीय थी, और घटना 2010 की थी, इसलिए अदालत ने संशोधन-पूर्व प्रावधानों के तहत मामले का मूल्यांकन किया।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: आपराधिक अपील (एसजे) संख्या: बेगूसराय सत्र विचारण से उत्पन्न [पटना उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति संदीप कुमार (एकल पीठ)
  • निर्णय की तिथि: अक्टूबर 2026
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • अपीलकर्ता (अभियुक्त) की ओर से: अधिवक्ता परितोष परिमल एवं अधिवक्ता मोहम्मद फहीमुद्दीन
    • प्रतिवादी (राज्य) की ओर से: अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) अनीता कुमारी सिंह
  • संशोधित दोषसिद्धि:
    • धारा 376/511 IPC के तहत दोषसिद्धि रद्द की गई।
    • दोषसिद्धि को धारा 354 IPC (2013 संशोधन से पूर्व की स्थिति) एवं धारा 448 IPC (अतिचार) में परिवर्तित किया गया।
  • सजा में राहत का आधार: घटना फरवरी 2010 की थी (16 वर्ष पुराना मामला), अपीलकर्ता का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं था, और वह 13 वर्षों से अधिक समय से जमानत पर था बिना किसी स्वतंत्रता के दुरुपयोग के। अदालत ने सजा को उसके द्वारा पहले ही काटी गई हिरासत की अवधि तक सीमित किया।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • भारतीय दंड संहिता (IPC) — धारा 354, धारा 376, धारा 511 एवं धारा 448
    • दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) — धारा 222(2) (लघु अपराध में दोषसिद्धि)
  • संबद्ध न्यायिक नजीरें:
    • अमन कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2004, SC) — ‘अशोभनीय हमले और बलात्कार के प्रयास के बीच अंतर; वासना की पूर्ति के लिए सभी प्रतिरोधों के बावजूद दृढ़ संकल्प का साक्ष्य आवश्यक।’
  • अंतिम परिणाम: अपील आंशिक रूप से स्वीकार; धारा 376/511 से बरी, धारा 354 IPC के तहत दोषसिद्धि बरकरार; सजा भुगती गई अवधि तक घटाई गई।

Attempt Rape:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतपटना उच्च न्यायालय (Patna High Court)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति संदीप कुमार
निचली अदालत का फैसलाIPC 376/511 (बलात्कार का प्रयास) के तहत 4 वर्ष और IPC 448 (गृह-अतिचार) के तहत 6 माह की सजा
घटना की पृष्ठभूमि8 फरवरी 2010 की रात बेगूसराय में एक विधवा महिला के घर में घुसकर चिराग बुझाना, ऊपर लेटना और मुंह दबाना
मुख्य कानूनी सवालक्या केवल मुंह दबाना और ऊपर लेटना IPC 376/511 (Attempt to Rape) है या IPC 354 (Assault to Outrage Modesty)?
हाईकोर्ट का फैसलासजा में बदलाव; IPC 376/511 का अपराध सिद्ध नहीं, अभियुक्त IPC 354 और IPC 448 के तहत दोषी। सजा को बिताई गई अवधि (Period Already Undergone) तक घटाया गया।
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