Sunday, August 23, 2026
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Lawyer Vs Police: वकील और पुलिस के बीच तीखी नोंकझोक का रोचक केस…पुलिस के केस पर एनसीबी क्यों बना पक्षकार, पढ़ें केस

Lawyer Vs Police: केरल हाईकोर्ट ने एक युवा प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में फिलहाल कठोर कार्रवाई करने पर अंतिम रोक लगा दी है।

वकील पर लोक सेवक को डराने-धमकाने का आरोप

हाईकोर्ट के जस्टिस सी.एस. डियास की एकल पीठ ने 30 वर्षीय वकील द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। जब एक अधिवक्ता (Lawyer) और जांच अधिकारी के बीच कानूनी कार्यवाही के दौरान तीखी बहस हो और वकील पर लोक सेवक को डराने-धमकाने का आरोप लगे, तो मामले की निष्पक्षता जांचने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषकर तब, जब वकील खुद पर ड्रग्स के झूठे मामलों में फंसाए जाने का अंदेशा जता रहा हो।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को मामले में अतिरिक्त प्रतिवादी बनाया

दरअसल, केरल के एक युवा प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में एक नया मोड़ आया है। केरल हाईकोर्ट ने 3 जुलाई 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को इस मामले में एक अतिरिक्त प्रतिवादी (Additional Respondent) के रूप में शामिल (Implead) करने का आदेश दिया है। इससे पहले अदालत ने याचिकाकर्ता वकील को बड़ी राहत देते हुए जांच अधिकारी द्वारा किसी भी तरह की दंडात्मक या कठोर कार्रवाई (Coercive Action) करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

मामला क्या है?: कोर्ट परिसर में बहस और BNS के तहत मुकदमा

यह कानूनी विवाद एर्नाकुलम (कोच्चि) में एक वकील के पेशेवर कर्तव्यों और जांच अधिकारी की शिकायत के टकराव से जुड़ा है।

अधिकारी का आरोप: एर्नाकुलम टाउन पुलिस स्टेशन में एक इंटेलिजेंस ऑफिसर की निजी शिकायत (Private Complaint) के आधार पर वकील के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। आरोप है कि वकील ने एर्नाकुलम स्थित सीबीआई स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court) के परिसर में अधिकारी को धमकाया। अधिकारी का कहना है कि वकील ने उनके एनडीपीएस (NDPS – ड्रग्स) केस के एक आरोपी (जो वकील का मुवक्किल है) के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को लेकर भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, ताकि वे अपने शासकीय दायित्वों का पालन न कर सकें।

लागू धाराएं: पुलिस ने इस शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) [अवांछित धमकी/Criminal Intimidation] और धारा 224 [लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी/Threat of Injury to Public Servant] के तहत मामला दर्ज किया था।

वकील का पलटवार: कस्टोडियल वॉयलेंस उठाने पर काउंटर-ब्लास्ट

पुलिस और जांच अधिकारी के इन आरोपों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता वकील ने अधिवक्ता पी.टी. शीजीश के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एफआईआर को पूरी तरह रद्द (Quash) करने की मांग की। वकील का पक्ष निम्नलिखित है:

पेशेवर कर्तव्य: वकील का दावा है कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया यह मुकदमा उनके खिलाफ केवल एक ‘काउंटर-ब्लास्ट’ (जवाबी कार्रवाई) है। उन्होंने केवल अपने पेशेवर दायित्वों का पालन करते हुए अपने मुवक्किल (NDPS आरोपी) से अदालत के सामने पुलिस हिरासत में हुई हिंसा (Custodial Violence) का खुलासा करने को कहा था, जिससे नाराज होकर अधिकारी ने यह झूठी कहानी रची।

फंसाने की धमकी: वकील ने अपनी याचिका में यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से उन्हें परेशान करने वाले फोन कॉल्स आ रहे हैं और उन्हें किसी झूठे ड्रग्स या नारकोटिक्स मामले (False Narcotics Case) में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।

हाई कोर्ट द्वारा एनसीबी (NCB) को शामिल करने के मायने

चूंकि मामला एक एनडीपीएस (NDPS) केस की जांच और देश की सबसे बड़ी ड्रग्स विरोधी एजेंसी (NCB) के संभावित इनपुट या मुवक्किल से जुड़ा है, और वकील ने खुद पर ड्रग्स केस में फंसाए जाने का आरोप लगाया है, इसलिए केरल हाई कोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को औपचारिक रूप से इस मुकदमे में पक्षकार बना दिया है।

अब 10 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में एनसीबी और राज्य पुलिस को अदालत के सामने अपना रुख स्पष्ट करना होगा। तब तक वकील की गिरफ्तारी या किसी भी कठोर कार्रवाई पर हाई कोर्ट की रोक जारी रहेगी।

केस शीट: केरल उच्च न्यायालय निर्देश (जुलाई 2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्देश
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस सी.एस. डियास (एकल पीठ)
आदेश की तिथिशुक्रवार, 3 जुलाई 2026
नया प्रतिवादीनारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
आरोपी पर धाराएंभारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) और धारा 224
अदालत का अंतरिम आदेशवकील को गिरफ्तारी/कठोर कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण बरकरार।
अगली सुनवाई की तिथि10 जुलाई 2026 (शुक्रवार)

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