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Bhojshala Dispute: राजा भोज के वास्तुशास्त्र से मेल खाता है ढांचा…पेश किए ‘समरांगण सूत्रधार’ और ASI सर्वे के प्रमाण, पढ़ें पूरी कार्यवाही

Bhojshala Dispute: धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में चल रही सुनवाई एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है।

हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने विस्तृत दलीलें पेश कीं। उन्होंने भोजशाला को मूल रूप से एक ‘सरस्वती मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र’ बताया। हिंदू पक्ष ने 11वीं सदी के राजा भोज द्वारा रचित वास्तुशास्त्र के ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का हवाला देते हुए दावा किया है कि इस संरचना का एक-एक हिस्सा मंदिर निर्माण के प्राचीन मानकों पर आधारित है।

‘समरांगण सूत्रधार’ का आधार (The Architectural Link)

  • हिंदू पक्ष की दलीलों का मुख्य केंद्र राजा भोज की पुस्तक थी।
  • वास्तु मानक: वकील ने दावा किया कि परिसर का प्रवेश द्वार, गर्भगृह और स्तंभों की बनावट ‘समरांगण सूत्रधार’ में बताए गए परमार कालीन मंदिर स्थापत्य कला के बिल्कुल अनुरूप है।
  • हवनकुंड का प्रमाण: ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि परिसर के केंद्र में स्थित ‘हवनकुंड’ और मुख्य भवन की नींव में इस्तेमाल ईंटें एक ही भट्टी (Kiln) की हैं। इसका मतलब है कि हवनकुंड शुरुआत से ही वहां मौजूद था, जो केवल मंदिर का हिस्सा हो सकता है।

ऐतिहासिक ग्रंथों का हवाला

  • याचिकाकर्ता ने ऐतिहासिक साक्ष्यों को जोड़ते हुए कई बिंदु रखे।
  • शारदा सदन: ऐतिहासिक ग्रंथों में इस स्थान को “सरस्वती कंठाभरण” या “शारदा सदन” कहा गया है, जो एक उच्च शिक्षण केंद्र था।
  • संवैधानिक स्थिति: वकील ने तर्क दिया कि कानूनन “एक बार जहाँ मंदिर स्थापित हो गया, वह सदैव मंदिर ही रहता है।” इसलिए वहां केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए।
  • मुस्लिम पक्ष का विरोध: हिंदू पक्ष ने इस्लामी शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि किसी स्थान पर जबरन कब्जा करके मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता।

राम जन्मभूमि’ फैसले का संदर्भ

  • सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले का भी जिक्र हुआ।
  • वकील ने कहा कि जिस तरह राम जन्मभूमि मामले में प्राचीन साहित्य और दस्तावेजों को कानूनी मान्यता मिली थी, उसी तरह भोजशाला के मामले में राजा भोज की अपनी कृतियों और सरकारी गजेटियर (1908) को प्रमाण माना जाना चाहिए।

मामले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुहिंदू पक्ष का दावा
संरचना की प्रकृतिसरस्वती मंदिर-सह-संस्कृत अध्ययन केंद्र।
तकनीकी साक्ष्यASI सर्वे रिपोर्ट में हवनकुंड और मुख्य ढांचे की ईंटों का एक समान होना।
धार्मिक अधिकारकेवल हिंदुओं को नियमित पूजा का पूर्ण अधिकार मिले।
अगली प्रक्रियाफिलहाल याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जा रही हैं, इसके बाद मुस्लिम पक्ष अपनी बात रखेगा।

इतिहास और पुरातत्व का संगम

भोजशाला का विवाद अब केवल आस्था का नहीं, बल्कि पुरातत्व विज्ञान (Archaeology) और प्राचीन साहित्य (Sanskrit Literature) के गहरे विश्लेषण का विषय बन गया है। 6 अप्रैल से शुरू हुई यह नियमित सुनवाई मध्य प्रदेश के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक विवादों में से एक का भविष्य तय करेगी।

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