Arrested Men
BRIBE JUDGE: मुंबई की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक सिविल कोर्ट क्लर्क-कम-टाइपिस्ट को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
एडीजे पर भी मामला दर्ज
यह मामला हाल के वर्षों में ऐसा पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें किसी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि यह रकम उसने एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की ओर से अनुकूल फैसला दिलाने के लिए ली थी। एसीबी ने न्यायाधीश को भी वांछित आरोपी (wanted accused) घोषित किया है।
यह दी एसीबी ने जानकारी
एसीबी के अनुसार, गिरफ्तार क्लर्क का नाम चंद्रकांत वासुदेव है। उसे मंगलवार को पकड़ा गया, जबकि मझगांव सिविल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश इजाजुद्दीन सलाउद्दीन काज़ी को वांछित आरोपी बताया गया है। एसीबी की जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता से शुरुआत में 25 लाख रुपये की मांग की गई थी, जो बाद में घटाकर 15 लाख कर दी गई। इस राशि में 10 लाख रुपये वासुदेव के लिए और 15 लाख रुपये न्यायाधीश काज़ी के लिए तय किए गए थे। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। क्लर्क वासुदेव को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि न्यायाधीश काज़ी अब भी फरार हैं। एसीबी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।
भूमि विवाद से जुड़ा हुआ मामला
मामला एक भूमि विवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की पत्नी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कंपनी की जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप लगाया गया था। अप्रैल 2016 में हाईकोर्ट ने जमीन पर तीसरे पक्ष के अधिकारों के निर्माण पर रोक लगा दी थी। चूंकि जमीन का मूल्य 10 करोड़ रुपये से कम था, इसलिए मामला मझगांव सिविल सत्र न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था।
चेम्बूर के एक कॉफी शॉप में बुलाया
9 सितंबर 2025 को क्लर्क वासुदेव ने शिकायतकर्ता के सहयोगी से संपर्क किया और बाद में चेम्बूर के एक कॉफी शॉप में मुलाकात कर 25 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता द्वारा इंकार करने पर वासुदेव ने बार-बार फोन कर रिश्वत की मांग की, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने 10 नवंबर को एसीबी से संपर्क किया। एसीबी के निर्देश पर शिकायतकर्ता ने कोर्ट परिसर में वासुदेव से मुलाकात की और 15 लाख रुपये देने पर सहमति जताई। इस दौरान वासुदेव ने न्यायाधीश काज़ी को कॉल कर भुगतान की जानकारी दी और न्यायाधीश ने कथित रूप से उस पर सहमति जताई। इसके बाद एसीबी ने वासुदेव को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।







