Tuesday, November 3, 2026
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VISCERA REPORT Delay: सितंबर 2024 की विसरा रिपोर्ट फरवरी 2025 में मिली… इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कह डाला

VISCERA REPORT Delay: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) से जांच एजेंसियों तक विसरा रिपोर्ट भेजने में हो रही देरी पर गंभीर रुख अपनाया है।

दहेज हत्या के एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई

यह निर्देश न्यायमूर्ति समीत गोपाल ने दहेज हत्या के एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी और स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) को आदेश दिया है कि ऐसी रिपोर्टें जल्द से जल्द जांच अधिकारियों तक पहुंचाई जाएं ताकि जांच प्रभावी ढंग से पूरी हो सके। विसरा परीक्षण किसी व्यक्ति की मौत के कारणों का पता लगाने या शरीर में जहर या नशीले पदार्थ की मौजूदगी की पुष्टि के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट सितंबर 2024 को बनी, एक फरवरी 2025 को मिली

अदालत ने अपने 7 नवंबर के आदेश में कहा कि इस मामले में मृतका का विसरा फरवरी 2024 में लैब भेजा गया था, रिपोर्ट सितंबर 2024 में तैयार हुई, लेकिन जांच अधिकारी को यह रिपोर्ट 1 फरवरी 2025 तक नहीं मिली। रिपोर्ट मिलने से पहले ही 13 सितंबर 2024 को चार्जशीट दाखिल कर दी गई और 11 नवंबर 2024 को संज्ञान भी ले लिया गया। अदालत ने कहा, “यह स्थिति चिंताजनक है। विसरा रिपोर्ट भेजने की कोई स्पष्ट और त्वरित प्रक्रिया होनी चाहिए ताकि जांच एजेंसियां समय पर उसका मूल्यांकन कर सकें।”

परिस्थितियों की कड़ी में अहम कड़ी” होती है विसरा रिपोर्ट

न्यायमूर्ति गोपाल ने कहा कि रिपोर्ट मिलने में हुई देरी से यह साफ होता है कि जांच अधूरी थी और मौत के कारणों को लेकर निष्कर्ष अस्पष्ट रह गए। उन्होंने कहा कि विसरा रिपोर्ट इस तरह के मामलों में “परिस्थितियों की कड़ी में अहम कड़ी” होती है, इसलिए इसे समय पर जांच अधिकारियों तक पहुंचना अनिवार्य है। अदालत ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर भेजी जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

आरोपी रामरतन की जमानत याचिका खारिज कर दी

इस मामले में एफआईआर मृतका के भाई ने दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी बहन को दहेज में मोटरसाइकिल और एक लाख रुपये की मांग को लेकर पति और ससुरालवालों ने प्रताड़ित किया। शिकायत में कहा गया कि मृतका के चेहरे, गले और शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। राज्य सरकार ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध किया। अदालत ने राज्य के तर्कों से सहमति जताते हुए आरोपी रामरतन की जमानत याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा, स्पष्ट है कि आरोपी मृतका का पति है और उसके खिलाफ दहेज की मांग, उत्पीड़न और प्रताड़ना के गंभीर आरोप हैं। मृतका की मौत शादी के सात साल के भीतर हुई है। ऐसे में आरोपी का मामला ससुर और सास से भिन्न है, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

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