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 Anticipatory bail approach: क्या अग्रिम जमानत के लिए पहले सेशन कोर्ट जाना जरूरी?…तीन जजों की बेंच में होगी बहस

 Anticipatory bail approach: सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम सवाल तीन जजों की बेंच को भेजा है कि क्या किसी आरोपी को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए सीधे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने का अधिकार है, या पहले सेशन कोर्ट का रुख करना अनिवार्य होना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने न्याय मित्र किया नियुक्त

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, “यह मुद्दा तीन जजों की पीठ द्वारा सुना जाना चाहिए।” अदालत ने निर्देश दिया कि मामला तब सूचीबद्ध किया जाए जब तीन जजों की बेंच गठित हो जाए। इस मामले में शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा को अमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) नियुक्त किया है ताकि वह अदालत की सहायता कर सकें।

केरल हाईकोर्ट में सीधे अग्रिम जमानत पर सुनवाई हो रही

सुप्रीम कोर्ट ने यह मुद्दा 8 सितंबर को उस समय उठाया था जब उसने केरल हाईकोर्ट की प्रथा पर सवाल किया था कि वहां सीधे अग्रिम जमानत की याचिकाएं स्वीकार कर ली जाती हैं, बिना आवेदक के पहले सेशन कोर्ट जाने के। अदालत ने कहा था, “एक बात जो हमें चिंतित कर रही है, वह यह है कि केरल हाईकोर्ट में नियमित रूप से ऐसा देखा गया है कि अग्रिम जमानत की याचिकाएं सीधे स्वीकार की जाती हैं। अन्य किसी राज्य में ऐसा नहीं होता। क्यों?”

बीएनएसएसएस में न्यायालयों की एक स्पष्ट श्रेणी तय

पीठ ने यह भी कहा था कि भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और अब लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 — दोनों में न्यायालयों की एक स्पष्ट श्रेणी (hierarchy) तय की गई है। BNSS की धारा 482 में गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से संबंधित प्रावधान हैं। मामला दो याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है, जिन्होंने सेशन कोर्ट जाने के बजाय सीधे केरल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

केरल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाएं सीधे हाईकोर्ट में दाखिल होती हैं, तो सेशन कोर्ट के स्तर पर तथ्यात्मक जांच का मौका नहीं मिल पाता, जिससे रिकॉर्ड अधूरा रह सकता है। पीठ ने कहा, “हम यह तय करना चाहते हैं कि क्या हाईकोर्ट में सीधे अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करना याचिकाकर्ता की इच्छा पर निर्भर रहेगा, या पहले सेशन कोर्ट में जाना अनिवार्य होना चाहिए।” अदालत ने इस मुद्दे पर केरल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया है। अब तीन जजों की बेंच इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर अंतिम निर्णय देगी।

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