Monday, September 21, 2026
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CJP Protest: उनकी बात सुनें, समझें कि वे क्यों चिल्ला रहे हैं’: छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुसर्वोच्च न्यायालय की स्थिति (अगस्त 2026)
माननीय पीठCJI सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
मुख्य विषयCJP छात्र प्रदर्शन के आयोजकों की जवाबदेही और कार्रवाई की मांग
अदालत की मुख्य सलाहप्रदर्शनकारी युवाओं के साथ बल प्रयोग के बजाय संवाद (Counseling) व सुनने (Listening) की नीति अपनाना।
परिणामयाचिका पर नोटिस जारी; लंबित छात्र विरोध मामलों के साथ संलग्न (Tagged)।

CJP Protest: हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलनों और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर प्रशासन को संयम बरतने की सलाह दी है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ पूर्व वायुसेना अधिकारियों द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 20 जुलाई के प्रदर्शनों में भड़काऊ बयान देने और हिंसा भड़काने के लिए CJP के आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारी युवाओं पर बल प्रयोग करने के बजाय उनकी चिंताओं को सुनना और समझना ज्यादा प्रभावी कदम है।

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सुनना सबसे शक्तिशाली हथियार है: सुप्रीम कोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्या कांत ने पुलिस और प्रशासन को सख्त आक्रामकता से बचने की सलाह देते हुए कहा,

CJI सूर्या कांत का अवलोकन: “हमें बहुत सावधानी से आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि ये युवा हिंसा के रास्ते पर न जाएं। सबसे बेहतर तरीका यह है कि उन्हें परामर्श (Counsel) दिया जाए और शांत किया जाए। सबसे शक्तिशाली जरिया सुनना है। उनकी बात सुनें और समझें कि वे क्यों चिल्ला रहे हैं।”

अदालत ने आगे कहा, मुख्य प्राथमिकता शांतिपूर्ण मार्च को बढ़ावा देना है। यदि कोई घटना घटती है, तो पुलिस को भी अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है ताकि स्थिति हाथ से बाहर न निकले। हालांकि, इस तरह की स्थितियों से कैसे निपटना है, इसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) की समझ पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

मामला और याचिकाकर्ता के तर्क

  • पृष्ठभूमि: NEET 2026 पेपर लीक को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुए थे, जिन्होंने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस के साथ झड़पें हुईं, जिसमें लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे (25 जुलाई) के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया था।
  • याचिकाकर्ता (पूर्व वायुसेना अधिकारी) का पक्ष:
    • याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सरकार और पुलिस की जवाबदेही पर तो चर्चा हो रही है, लेकिन घटना के 15 दिन बीत जाने के बाद भी भड़काऊ बयान देने वाले आयोजकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
    • उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी धार्मिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में भगदड़ या आग लगने पर आयोजक सबसे पहले जिम्मेदार होते हैं, उसी तरह संसद की ओर बिना अनुमति मार्च करने वाले आयोजकों की भी कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
    • उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र की ओर अवैध मार्च की अनुमति दी गई, तो यह देश की सुरक्षा के लिए एक खतरनाक नजीर (Dangerous Precedent) बन जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और आदेश

  1. अस्थायी राहत बरकरार: इससे पूर्व 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था।
  2. याचिका को टैग किया गया: कोर्ट ने माना कि आंदोलन से जुड़े परस्पर विरोधी पहलुओं पर अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं। अतः पीठ ने पूर्व वायुसेना अधिकारियों की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे मुख्य मामलों के साथ टैग (Tag) कर दिया।

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