Tuesday, August 11, 2026
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Climate Change case: जर्मनी की अदालत में ऐतिहासिक जलवायु मुकदमा…पढ़िए पूरा मामला

Climate Change case: जर्मनी की अदालत एक ऐतिहासिक जलवायु मुकदमे में फैसला सुनाने जा रही है।

ऊर्जा कंपनी RWE के खिलाफ दायर

यह मुकदमा पेरू के किसान और पर्वत गाइड साल लुसियानो लियुया ने ऊर्जा कंपनी RWE के खिलाफ दायर किया है। किसान का आरोप है कि RWE की ऐतिहासिक ग्रीनहाउस गैसों की वजह से उनके शहर हुआराज के ऊपर स्थित ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे विनाशकारी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि RWE ने पेरू में कभी काम नहीं किया है और उसने इस मामले में अपनी कानूनी जिम्मेदारी से इनकार किया है।

मुकदमे पर रहेगी सभी की नजर

कंपनी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक मुद्दा है, जिसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी जर्मनी के हैम शहर की अदालत में चल रहा यह मामला जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार बड़ी कंपनियों को जवाबदेह ठहराने की दिशा में एक अहम मिसाल बन सकता है।

नीदरलैंड में शेल कंपनी पर फैसला पलटा

एक पर्यावरण संगठन ने डच सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह निचली अदालत के उस ऐतिहासिक फैसले को बहाल करे, जिसमें ऊर्जा कंपनी शेल को 2030 तक 2019 के मुकाबले 45% कार्बन उत्सर्जन घटाने का आदेश दिया गया था। हालांकि नवंबर में अपीलीय अदालत ने यह फैसला पलट दिया था। 2021 में आया यह फैसला पर्यावरण संगठनों के लिए बड़ी जीत माना गया था।

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में भी सुनवाई

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने दिसंबर में दो हफ्ते तक यह सुनवाई की कि दुनियाभर के देशों की जलवायु परिवर्तन से निपटने की कानूनी जिम्मेदारियां क्या हैं। यह मामला उन द्वीपीय देशों की पहल पर शुरू हुआ, जो समुद्र के बढ़ते जलस्तर से डूबने के खतरे में हैं। अदालत का फैसला बाध्यकारी नहीं होगा, लेकिन यह अन्य कानूनी कार्रवाइयों की नींव बन सकता है।

समुद्री प्रदूषण पर भी राय दी गई

एक अन्य मामले में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को समुद्री प्रदूषण माना जा सकता है और देशों को इसके दुष्प्रभावों को कम करने और अनुकूलन के लिए कदम उठाने होंगे।

मानवाधिकार के आधार पर भी सुनवाई

कोलंबिया और चिली ने इंटर-अमेरिकन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से यह राय मांगी है कि क्या देश जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं और अगर हां, तो उनकी मानवाधिकारों के तहत क्या जिम्मेदारियां बनती हैं। इस महीने ब्राजील के अमेजनास राज्य में चार दिन की सुनवाई हुई। फैसला साल के अंत तक आने की उम्मीद है। सुनवाई में लैटिन अमेरिका के आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर खास जोर रहा।

अमेरिका में भी कई मुकदमे

  • अमेरिका के कई राज्य और स्थानीय सरकारें फॉसिल फ्यूल कंपनियों पर मुकदमे कर रही हैं। उनका आरोप है कि इन कंपनियों ने जनता को गुमराह किया कि उनके उत्पाद जलवायु परिवर्तन में कैसे योगदान दे सकते हैं। इन मुकदमों में अरबों डॉलर के नुकसान की भरपाई की मांग की गई है।
  • मार्च में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल्स की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें डेमोक्रेटिक राज्यों द्वारा तेल और गैस कंपनियों पर जलवायु मुकदमे रोकने की मांग की गई थी। मैसाचुसेट्स, हवाई और कोलोराडो की राज्य सुप्रीम कोर्ट्स ने भी तेल कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर मुकदमों को आगे बढ़ने की अनुमति दी है। हालांकि ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग ने हाल ही में हवाई और मिशिगन राज्यों पर मुकदमा किया है ताकि वे जलवायु परिवर्तन से हुए नुकसान के लिए फॉसिल फ्यूल कंपनियों से मुआवजा न मांग सकें। इसके अलावा न्यूयॉर्क और वरमोंट की क्लाइमेट सुपरफंड कानूनों को भी चुनौती दी गई है, जिनके तहत कंपनियों को पुराने उत्सर्जन के आधार पर राज्य फंड में भुगतान करना होगा।
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