Friday, July 31, 2026
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Isha Foundation Defamation: सद्गुरु की संस्था ईशा फाउंडेशन के खिलाफ 44 और वीडियो हटाने का गूगल व अन्य सोशल मीडिया को आदेश

केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)

पहलूविधिक विवरण
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramonium Prasad)
साइटेशन (Citation)I.A. 11822/2026
केस का नामईशा फाउंडेशन बनाम गूगल एलएलसी एवं अन्य (Isha Foundation v. Google LLC & Ors.)
मुख्य निर्देश39 शॉर्ट + 5 अंग्रेजी (कुल 44) मानहानिकारक वीडियो को गूगल/यूट्यूब से टेकडाउन करने का आदेश।
अगली सुनवाई की तिथि5 अगस्त 2026 (रोस्टर पीठ के समक्ष)

Isha Foundation Defamation: सद्गुरु की संस्था ईशा फाउंडेशन (Isha Foundation) द्वारा दायर मानहानि मुकदमे में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramonium Prasad) की एकल पीठ ने गूगल एलएलसी (Google LLC) और अन्य प्रतिवादियों को ईशा फाउंडेशन से जुड़े 39 शॉर्ट वीडियो (Short Videos) और 5 अंग्रेजी भाषा के वीडियो (कुल 44 अतिरिक्त वीडियो) को तुरंत हटाने (Takedown) का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये सभी वीडियो फाउंडेशन के पक्ष में पारित पिछले अंतरिम आदेश के दायरे में ही आते हैं और इन्हें हटाया जाना अनिवार्य है।

हाई कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु

अंतरिम आदेश का दायरा और टेकडाउन निर्देश
             │
         ┌───────┴───
         ▼                                      
44 अतिरिक्त वीडियो हटाने का आदेश      
• 39 शॉर्ट वीडियो और 5 अंग्रेजी वीडियो टेकडाउन होंगे।                                   
• यूट्यूब (गूगल) और नकीरन पब्लिकेशंस पर लागू।                                            

 19 मार्च के आदेश में संशोधन
 • नया आदेश 19 मार्च 2026 के मूल अंतरिम आदेश के साथ 
 संयुक्त रूप से पढ़ा और लागू किया जाएगा।

19 मार्च 2026 के अंतरिम आदेश का स्पष्टीकरण व संशोधन

  • मूल आदेश (19 मार्च 2026): हाई कोर्ट ने तमिल साप्ताहिक पत्रिका ‘नकीरन पब्लिकेशंस’ (Nakkheeran Publications) और उसके संपादक को ईशा फाउंडेशन के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री बनाने या साझा करने से रोकते हुए कई वीडियो हटाने का आदेश दिया था।
  • फाउंडेशन का रुख: ईशा फाउंडेशन ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि 19 मार्च के आदेश में मूल याचिका (Plaint) के पैराग्राफ 10 में उल्लिखित 39 शॉर्ट वीडियो और 5 अंग्रेजी वीडियो का स्पष्ट संदर्भ छूट गया था, जबकि उनकी सामग्री भी मानहानिकारक ही है।
  • प्रतिवादियों की आपत्ति: तमिल मीडिया संस्थान ने तर्क दिया कि यह याचिका पुनरीक्षण (Review Plea) जैसी है और फाउंडेशन अंतरिम रोक के दायरे को बढ़ाना चाहता है।
  • कोर्ट का निष्कर्ष: जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने माना कि भले ही यह आवेदन संशोधन के रूप में दायर किया गया है, लेकिन ये 44 अतिरिक्त वीडियो मूल याचिका का ही हिस्सा थे। इसलिए, पिछले आदेश के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए इस संशोधन को मंजूरी देना आवश्यक है।

मानहानिकारक सामग्री के निर्माण पर रोक जारी

अदालत ने प्रतिवादी संख्या 2 और 3 (नकीरन पब्लिकेशंस और उसके संपादक) को अगली सुनवाई तक ईशा फाउंडेशन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी नई सामग्री बनाने, अपलोड करने या सोशल मीडिया पर साझा करने से प्रतिबंधित रखा है।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  1. ₹3 करोड़ का मानहानि मुकदमा: ईशा फाउंडेशन ने तमिल मीडिया हाउस ‘नकीरन’ पर आरोप लगाया था कि वह लगातार झूठी और मानहानिकारक खबरें प्रकाशित कर रहा है, जिससे संस्था की साख को नुकसान पहुंचा है। इसके एवज में ₹3 करोड़ के मुआवजे की मांग की गई थी।
  2. सर्वोच्च न्यायालय से हाई कोर्ट वापसी: नकीरन ने मामला चेन्नई ट्रांसफर करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, लेकिन जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने ईशा फाउंडेशन को अपनी अंतरिम राहत की अर्जी हाई कोर्ट के सामने ही उठाने का निर्देश दिया था।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश से यह साफ हो गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मानहानिकारक वीडियो के छोटे क्लिप या अलग भाषा के संस्करणों को भी अदालत के अंतरिम स्थगनादेश से अलग नहीं माना जा सकता। गूगल और संबंधित मीडिया हाउस को इन सभी लिंक्स को तुरंत हटाना होगा।

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