Wednesday, July 22, 2026
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Cruelty by Wife: 2 महीने का साथ-10 साल का विवाद…पत्नी की ‘क्रूरता’ पर कैसे दहेज के केस से मुक्त हुआ पति, फैसला पढ़कर जानिए

Cruelty by Wife: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में सामान्य और अस्पष्ट (General and Omnibus) आरोपों के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने पति की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि जब कुटुंब अदालत पहले ही पत्नी को क्रूरता का दोषी मानकर तलाक दे चुकी है, तो ऐसे में पति पर मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग है। अदालत ने एक तलाकशुदा व्यक्ति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न (498A) की FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि महज 2 महीने के साथ ने 10 साल की कानूनी जंग को जन्म दे दिया।

मामले की विचित्र पृष्ठभूमि (Short Marriage, Long Battle)

  • विवाह: अप्रैल 2016 में शादी हुई।
  • अलगाव: पति के अनुसार, पत्नी जून 2016 में ही घर छोड़कर चली गई थी। कुल मिलाकर दोनों केवल 2 महीने साथ रहे।
  • तनाव: पत्नी के व्यवहार के कारण पति मानसिक तनाव का शिकार हुआ और उसे लगभग एक महीने तक मनोरोग अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
  • तलाक: 2018 में पति ने तलाक की अर्जी दी, और जनवरी 2022 में फैमिली कोर्ट ने ‘पत्नी द्वारा क्रूरता’ के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया।

FIR की टाइमिंग और अस्पष्ट आरोप

  • पत्नी ने अगस्त 2021 में (शादी के 5 साल बाद और तलाक की कार्यवाही के दौरान) FIR दर्ज कराई थी। कोर्ट ने इसमें कई विसंगतियां पाईं:
  • गलत जानकारी: पत्नी ने दावा किया कि वह 2020 तक पति के साथ रही, जबकि रिकॉर्ड बताते हैं कि वे 2017 से अलग थे।
  • Omnibus Allegations: FIR में 10 लाख रुपये और होंडा सिटी कार की मांग के सामान्य आरोप लगाए गए थे, लेकिन किसी विशेष तारीख, स्थान या घटना का जिक्र नहीं था।
  • कोर्ट की टिप्पणी: “दहेज के सामान्य और सर्वव्यापी आरोप, बिना किसी सटीक विवरण के, ससुराल वालों को परेशान करने के लिए इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।”

क्रूरता का उल्टा होना (Cruelty by Wife)

हाई कोर्ट ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि फैमिली कोर्ट ने पहले ही यह फैसला सुना दिया था कि पत्नी ने पति के साथ क्रूरता की है। पत्नी ने इस तलाक के डिक्री (Decree) के खिलाफ कोई अपील भी नहीं की थी, जिसका मतलब है कि उसने क्रूरता के आरोप को स्वीकार कर लिया था। ऐसी स्थिति में पति पर 498A (क्रूरता) का मामला चलाना प्रथम दृष्टया (Prima-facie) गलत है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्तातलाकशुदा पति और उसके परिजन।
आरोपIPC की धारा 498A (दहेज उत्पीड़न) और 34 (सामान्य इरादा)।
मुख्य तथ्यदंपत्ति केवल 2 महीने साथ रहे; 2017 से अलग रह रहे थे।
कोर्ट का आदेशFIR और पूरी कानूनी कार्यवाही को रद्द (Quash) कर दिया गया।

झूठी शिकायतों पर कड़ा संदेश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला उन मामलों के लिए एक नजीर है जहाँ वैवाहिक विवादों में बदला लेने के उद्देश्य से पूरे परिवार को ‘दहेज कानून’ में घसीट लिया जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि 498A का उपयोग किसी को प्रताड़ित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब वैवाहिक रिश्ता सालों पहले खत्म हो चुका हो और आरोप बिना किसी ठोस आधार के हों।

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