Thursday, September 24, 2026
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CRPC Section 193: अगर पुलिस ने आरोपी को छोड़ दिया हो…तब भी कोर्ट उसे ट्रायल में बुला सकती है

CRPC Section 193: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सेशंस कोर्ट ट्रायल की शुरुआत में ही किसी आरोपी को समन कर सकता है, भले ही पुलिस ने उसे चार्जशीट में नामित न किया हो।

किसी गवाह की मौखिक गवाही से उसकी भूमिका सामने आए, तब कार्रवाई हो

मंगलवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि अगर रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसे ट्रायल में बुलाया जा सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ऐसे व्यक्ति को केवल तब ही ट्रायल में बुलाया जा सकता है जब किसी गवाह की मौखिक गवाही से उसकी भूमिका सामने आए और तब CrPC की धारा 319 के तहत कार्रवाई हो।

यह भी रही कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा, “अगर जांच एजेंसी जानबूझकर किसी आरोपी को छोड़ देती है और मजिस्ट्रेट उसे सेशंस कोर्ट को नहीं भेजता, तो यह मान लेना कि सेशंस कोर्ट के पास उसे ट्रायल में बुलाने का अधिकार नहीं है, न्याय की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाएगा।”

मामला: रेप और मर्डर केस में आरोपी को चार्जशीट में नहीं जोड़ा गया था

यह फैसला एक केस में आया, जिसमें कल्लू नट उर्फ मयंक कुमार नगर को रेप और मर्डर केस में ट्रायल का सामना करने के लिए समन किया गया था, जबकि पुलिस ने उसे चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया था। मजिस्ट्रेट द्वारा केस सेशंस कोर्ट को भेजे जाने के बाद शिकायतकर्ता ने CrPC की धारा 193 के तहत आवेदन देकर कल्लू को आरोपी बनाने की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया, जिसके बाद कल्लू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट की व्याख्या: मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान लेता है, व्यक्ति का नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट केवल अपराध का संज्ञान लेता है, न कि किसी विशेष व्यक्ति का। उसका उद्देश्य केवल केस को सेशंस कोर्ट को भेजना होता है। कोर्ट ने कहा, “एक बार जब केस सेशंस कोर्ट को भेज दिया जाता है और संज्ञान लिया जा चुका होता है, तो CrPC की धारा 193 के तहत नया संज्ञान लेने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति को समन करना पहले से लिए गए संज्ञान की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाएगा।”

फैसला: याचिका खारिज, सभी हाईकोर्ट्स को भेजा जाएगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सेशंस कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस फैसले की कॉपी सभी हाईकोर्ट्स को भेजी जाए।

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