Tuesday, September 22, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Declining Standards of Legal Education: लॉ छात्र की शून्य अंक वाली उत्तरपुस्तिका...

Declining Standards of Legal Education: लॉ छात्र की शून्य अंक वाली उत्तरपुस्तिका BCI और लॉ कमीशन को भेजी…हालात पर यह की टिप्पणी

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति विनोद दिवाकर (इलाहाबाद उच्च न्यायालय)
केस साइटेशनXXX बनाम यूपी राज्य एवं 3 अन्य (2026 LiveLaw (AB) 545)
संबंधित संस्थानप्रयाग विधि महाविद्यालय, प्रयागराज
मुख्य मुद्दाशून्य अंक वाली उत्तरपुस्तिका के आधार पर कानूनी शिक्षा के गिरते मानकों पर चिंता
हाई कोर्ट का एक्शनयाचिका खारिज; उत्तरपुस्तिका BCI और विधि आयोग को सुधार प्रस्तावों हेतु भेजी गई।

Declining Standards of Legal Education: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेजों में कानूनी शिक्षा के गिरते स्तर (Declining Standards of Legal Education) पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने 9वें सेमेस्टर के छात्र की पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) याचिका को खारिज करते हुए ये निर्देश जारी किए। हाई कोर्ट ने एक B.A. LL.B. छात्र की मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका (Answer Sheet) जिसमें उसे शून्य (0) अंक दिए गए थे, की एक प्रति (Redacted Copy) और प्रश्न पत्र को भारतीय बार काउंसिल (Bar Council of India – BCI) और भारतीय विधि आयोग (Law Commission of India) को भेजने का निर्देश दिया है।

Also Read; Integrated Law Course: पांच वर्षीय लॉ कोर्स की मंजूरी में देरी…क्योंकि निरीक्षण टीम के दौरे का शेड्यूल तय नहीं, BCI मनमाना प्रतिबंध लगाने से बचे

मामले की पृष्ठभूमि (Case in Brief)

  • मामला: याचिकाकर्ता प्रयागराज स्थित प्रयाग विधि महाविद्यालय (Prayag Vidhi Mahavidyalaya) का B.A. LL.B. छात्र है। उसने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के 9वें सेमेस्टर की ‘जैव-विविधता संरक्षण कानून’ (Bio-Diversity Protection Law) परीक्षा में शून्य अंक मिलने के बाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
  • छात्र का दावा: छात्र का तर्क था कि उसने सभी प्रश्नों के उत्तर दिए थे और 50 से अधिक अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने उसे पूरे पेपर में शून्य अंक दे दिए। आरटीआई (RTI) से उत्तरपुस्तिका की कॉपी मिलने के बाद उसने पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी।

अदालत में क्या हुआ? (High Court’s Findings)

  1. अदालत में पढ़ा गया उत्तर:सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने मूल उत्तरपुस्तिका मंगवाई और राज्य के स्थायी वकील (Standing Counsel) को खुली अदालत में छात्र द्वारा लिखा गया एक उत्तर पढ़ने को कहा।
  2. कानूनी समझ का पूर्ण अभाव:उत्तर सुनने के बाद स्थायी वकील ने स्वीकार किया कि वह उत्तर का अर्थ समझ पाने या उसमें पूछे गए प्रश्न/कानूनी विषय से संबंधित कोई सुसंगत तर्क या तथ्य ढूंढ पाने में असमर्थ हैं।
  3. हाई कोर्ट का निष्कर्ष:उत्तरपुस्तिका का स्वयं अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा:“प्रश्न संख्या 3-C का उत्तर विषय की किसी भी विधिक समझ को प्रकट नहीं करता है। इसके परिणामस्वरूप, उक्त उत्तर के लिए शून्य अंक देने वाले परीक्षक के मूल्यांकन में कोई त्रुटि नहीं पाई जा सकती। उत्तरपुस्तिका में शामिल शेष उत्तरों की स्थिति भी ऐसी ही है।”

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक मामलों में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) तभी संभव है जब मूल्यांकन में दुर्भावना, मनमानापन या वैधानिक उल्लंघन साबित हो, जो इस मामले में मौजूद नहीं था।

Also Read; Faculty of Law: सप्लीमेंट्री परीक्षा नियम के खिलाफ डीयू लॉ फैकल्टी के छात्रों की भूख हड़ताल का 8वां दिन…2017 के नियम को वापस लेने की मांग

केवल छात्र की गलती नहीं, संस्थान भी जिम्मेदार

याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह केवल एक छात्र का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ी संस्थागत विफलता (Systemic Failure) को दर्शाता है:

  • न्याय वितरण प्रणाली की नींव: कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानूनी शिक्षा न्याय वितरण प्रणाली (Justice Delivery System) का आधार है। यदि संस्थागत स्तर पर शैक्षणिक मानकों में गिरावट आती है, तो इसका असर केवल वकालत के पेशे पर ही नहीं, बल्कि न्याय प्रशासन पर भी पड़ता है।
  • संस्थानों की जवाबदेही: कोर्ट ने कहा कि यदि छात्र को परीक्षा से पहले सही मार्गदर्शन (Orientation Program) दिया गया होता और ठीक से पढ़ाया गया होता, तो वह ऐसे उत्तर नहीं लिखता। यह विफलता छात्र से ज्यादा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में संस्थान की नाकामी को दर्शाती है।

BCI और लॉ कमीशन को दिए गए निर्देश

  1. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश:
    • BCI को यह जांचने के लिए कहा गया है कि संबंधित कॉलेज (प्रयाग विधि महाविद्यालय) निर्धारित शैक्षणिक और ढांचागत मानकों को पूरा कर रहा है या नहीं।
    • BCI इस बात पर विचार करे कि क्या वैश्विक मानकों के मुकाबले देश में कानूनी शिक्षा के अनुमोदन (Approval), संबद्धता (Affiliation) व आवधिक निरीक्षण (Periodic Inspection) की मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
  2. विधि आयोग (Law Commission of India) को निर्देश:
    • लॉ कमीशन देश में कानूनी शिक्षा के समग्र मानकों की जांच करे और यदि उचित समझे तो आवश्यक सुधारों के लिए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
34 ° C
34 °
34 °
59 %
3.6kmh
47 %
Tue
34 °
Wed
35 °
Thu
26 °
Fri
24 °
Sat
28 °

Recent Comments