Monday, August 10, 2026
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Digital rape case: कोर्ट ने क्या कहा?—‘डिजिटल और पेनाइल पेनिट्रेशन में कोई अंतर नहीं’

Digital rape case: दिल्ली की एक अदालत ने 2 साल की बच्ची के साथ डिजिटल दुष्कर्म करने वाले 30 वर्षीय आरोपी को 25 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है।

दीवाली की पूर्व संध्या (20 अक्टूबर 2025) को हुई थी

यह वारदात पिछले महीने दीवाली की पूर्व संध्या (20 अक्टूबर) को हुई थी। अदालत ने कहा कि डिजिटल रेप भी उतना ही गंभीर अपराध है, जितना पेनाइल रेप—इसमें कोई कानूनी अंतर नहीं है। फैसला 20 नवंबर 2025 को एडिशनल सेशंस जज बबीता पुनिया ने सुनाया। आरोपी को 19 नवंबर को POCSO Act की धारा 6 (अत्यंत जघन्य यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था। जांच और ट्रायल एक महीने के भीतर पूरे हुए।

आरोपी ने “डिजिटल रेप” किया, इसलिए कम सज़ा दी, ऐसा नहीं होगा

जज पुनिया ने बचाव पक्ष की यह दलील खारिज कर दी कि आरोपी ने “डिजिटल रेप” किया, इसलिए उसे कम सज़ा दी जाए। अदालत ने कहा, “कानून डिजिटल पेनिट्रेशन और पेनाइल पेनिट्रेशन में कोई फर्क नहीं करता। रेप में पेनाइल/वेजाइनल, पेनाइल/ओरल, पेनाइल/एनल, ऑब्जेक्ट या फिंगर/वेजाइनल और फिंगर/एनल—सभी तरह की पेनिट्रेशन शामिल हैं।”

‘नशा और अशिक्षा कोई सहानुभूति का आधार नहीं’

अदालत ने आरोपी की यह दलील भी ठुकरा दी कि वह वारदात के समय नशे में था या अशिक्षित है। जज ने कहा, “नशा उसकी अपनी पसंद थी, यह कोई mitigating factor नहीं।” “अशिक्षा को भी बच्चों के खिलाफ अपराध में सहानुभूति का आधार नहीं बनाया जा सकता, यह कृत्य कानूनी ही नहीं, नैतिक रूप से भी घोर आपत्तिजनक है।”

कोर्ट ने दी 25 साल की सख्त कैद और 13.5 लाख का मुआवजा

अदालत ने कहा कि 25 साल की सजा समाज की रक्षा करेगी, न्यायपूर्ण प्रतिफल देगी, और आरोपी को उसके कृत्य की गंभीरता का एहसास भी कराएगी। जज ने यह भी कहा कि Nirbhaya और Kathua जैसे मामलों की वजह से भले ही समाज में आक्रोश बढ़ा और कानून में बदलाव हुए हों, लेकिन अदालतें भावनाओं से प्रभावित होकर फैसला नहीं दे सकतीं।

ट्रस्ट का क्रिमिनल ब्रेक — ‘घर में बच्ची सबसे सुरक्षित थी, लेकिन…’

अदालत ने कहा कि आरोपी पीड़िता के पिता का मित्र था और गांव से मिलने आया था। “घर बच्ची की दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह होती है, लेकिन आरोपी ने उसी भरोसे को तोड़ा। रोशनी का त्योहार बच्ची के परिवार के लिए अंधकार में बदल गया।” अदालत ने माना कि बच्ची और परिवार के दर्द की भरपाई संभव नहीं, लेकिन कुछ वित्तीय सहारा मिल सके, इसलिए ₹13.5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया।

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