Monday, September 21, 2026
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Disobey Court Order: वह दौर चला गया जब अवमानना शब्द से रूह कांप जाती थी…अदालती आदेशों की अनदेखी पर मद्रास हाई कोर्ट की कड़वी टिप्पणी

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुमद्रास उच्च न्यायालय की स्थिति (अगस्त 2026)
मामले का नामसेंथिल कुमार बनाम अनु जॉर्ज व अन्य
माननीय पीठजस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन
मुख्य विषयट्रांसफर स्टे ऑर्डर का पालन न करने पर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना
अदालत का कड़ा संदेशकेवल तारीख मांगना बंद करें; आदेश का अनुपालन न करने वाले IAS अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी।

Disobey Court Order: सरकारी अधिकारियों द्वारा अदालती आदेशों की अवहेलना और अवमानना मामलों में ढुलमुल रवैये पर मद्रास हाईकोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है।

जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने पशु चिकित्सा सहायक सर्जन (Veterinary Assistant Surgeon) द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि अब वह समय बीत चुका है जब ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) का नाम सुनते ही प्रशासनिक अधिकारियों में कानून का खौफ हुआ करता था।

अनुपालन एक नियम था, अवहेलना एक अपवाद: हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वामीनाथन ने एक वरिष्ठ वकील के साथ हुई अपनी पुरानी बातचीत को याद करते हुए कहा,

मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणी: “वह दौर अब चला गया जब ‘अवमानना’ शब्द सुनते ही किसी की रूह कांप जाती थी। एक समय था जब अवमानना की कार्यवाही इतनी दुर्लभ होती थी कि सुनवाई के दिन पूरा कोर्ट हॉल वकीलों और लोगों से भर जाता था। तब आदेश का अनुपालन (Compliance) एक नियम था और अवहेलना (Defiance) एक दुर्लभ अपवाद। लेकिन आज स्थिति और भी बदतर हो गई है।”

अदालत ने अधिकारियों के लापरवाही भरे रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हर बीतते दिन के साथ जब अदालती आदेशों का पालन नहीं होता, तो न्यायपालिका की साख और गरिमा (Majesty of the Court) प्रभावित होती है।

मामला क्या था? (Case Background)

  • याचिकाकर्ता: तमिलनाडु पशुपालन विभाग में कार्यरत पशु चिकित्सा सहायक सर्जन डॉ. सेंथिलकुमार।
  • ट्रांसफर का विवाद: डॉ. सेंथिलकुमार का जून 2025 में डिंडीगुल से तिरुवन्नमलाई ट्रांसफर किया गया, फिर अक्टूबर 2025 में तूतुकुडी भेज दिया गया। उन्होंने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर कोर्ट ने रोक (Stay) लगा दी।
  • आदेश का उल्लंघन: इसके बाद 14 मई 2026 को फिर से ट्रांसफर का नया आदेश जारी किया गया। 29 मई को जस्टिस स्वामीनाथन ने इस आदेश पर भी 31 जुलाई तक रोक लगा दी।
  • अवमानना का कारण: याचिकाकर्ता का आरोप है कि स्टे ऑर्डर और मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने के बावजूद अधिकारियों ने उन्हें ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति नहीं दी और न ही उनका वेतन जारी किया। इसके खिलाफ उन्होंने अवमानना याचिका दायर की।

IAS अधिकारियों को नोटिस और सख्त तेवर

  1. शीर्ष IAS अधिकारी जवाबदेह: सुनवाई के दौरान बताया गया कि 15 जुलाई तक IAS अधिकारी एस.पी.ए. अम्रित पशुपालन विभाग के निदेशक थे, जिसके बाद IAS अधिकारी एच. कृष्णा उरनी ने पदभार संभाला। कोर्ट ने माना कि अवमानना मामले में दोनों अधिकारी जवाबदेह हैं।
  2. सरकारी वकीलों और अधिकारियों पर नाराजगी: कोर्ट द्वारा 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी जब सरकारी वकील अधिकारियों से निर्देश प्राप्त नहीं कर पाए, तो जस्टिस स्वामीनाथन ने कड़ी नाराजगी जताई:“जब सरकार का सचिव पहला प्रतिवादी हो, तो अधिकारियों का इतना गैर-जिम्मेदाराना रवैया मुझे चौंकाता है। सरकारी वकीलों को अग्रिम निर्देश लेकर आना चाहिए। सिर्फ तारीख (Adjournment) मांगना काफी नहीं होगा।”
  3. जस्टिस बट्टू देवांगन के कड़े मॉडल को अपनाने का संकेत: जस्टिस स्वामीनाथन ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बट्टू देवांगन का उदाहरण दिया, जो अवमानना मामलों में देरी से किए गए अनुपालन को भी माफ नहीं करते थे और अधिकारियों को कड़ी सजा सुनाते थे। उन्होंने कहा:“मुझे लगता है कि हम सभी को उनके (जस्टिस बट्टू देवांगन) दिखाए गए सख्त रास्ते का अनुकरण करना होगा।”

कोर्ट का आदेश

मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व निदेशक एस.पी.ए. अम्रित (IAS) और वर्तमान निदेशक एच. कृष्णा उरनी (IAS) दोनों को अदालत की अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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