Monday, September 21, 2026
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PIL For Public Publicity: हर कोई केवल पब्लिसिटी के लिए PIL दाखिल कर रहा है…संसद भवन की सुरक्षा समीक्षा वाली याचिका पर टिप्पणी पढ़ें

PIL For Public Publicity: संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने और इस संबंध में विशेष कानून बनाने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस (CJ) देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। उच्च न्यायालय ने जनहित याचिकाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि संसद अपनी सुरक्षा की देखभाल करने में पूरी तरह सक्षम है और अदालत इस मामले में कोई निर्देश जारी नहीं करेगी।

अदालत को भाषण की आवश्यकता नहीं: हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता (अधिवक्ता राज सिंह) ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में संसद की सुरक्षा सर्वोपरि है, तो मुख्य न्यायाधीश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी: “यह किस तरह की याचिका है? क्या आपको लगता है कि संसद अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने में असमर्थ है? अब क्या हम यह निर्देश जारी करेंगे कि संसद की सुरक्षा कैसे की जानी चाहिए? आपके पास बहुत अच्छे सुझाव हो सकते हैं, लेकिन यह PIL का विषय नहीं बन सकता। हर कोई केवल प्रचार (Publicity) पाने के लिए PIL दाखिल कर रहा है।”

अदालत ने आगे कहा: “देश में हर व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है। हमें संसदीय लोकतंत्र पर भाषण (Lecture) सुनने की आवश्यकता नहीं है। आपकी चिंता केवल संसद तक ही क्यों सीमित है? रेलवे स्टेशनों पर भगदड़, हवाई अड्डों पर सुरक्षा चूक और पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर आपका ध्यान क्यों नहीं जाता?”

याचिकाकर्ता की मांग और तर्क

  • सुरक्षा चूकों का हवाला: याचिकाकर्ता ने 2001 के संसद हमले, 2023 की लोकसभा सुरक्षा चूक और हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शनों के दौरान संसद की ओर किए गए ‘संसद चलो’ मार्च का हवाला दिया था।
  • उभरते खतरे: याचिका में ड्रोन तकनीक, साइबर घुसपैठ और AI-जनित भ्रामक सूचनाओं जैसे आधुनिक खतरों से संसद की सुरक्षा को अपडेट करने की मांग की गई थी।
  • खुद का ड्राफ्ट किया ‘कांसेप्ट नोट’: याचिकाकर्ता ने स्वयं “प्रस्तावित संसद (सुरक्षा, पवित्रता और संरक्षण) अधिनियम, 2026” शीर्षक से एक अवधारणा पत्र (Concept Note) तैयार किया था और कोर्ट से मांग की थी कि वह सरकार को इस नोट की समीक्षा करने और एक निर्धारित समय सीमा के भीतर कानून बनाने का निर्देश दे।

दिल्ली हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता द्वारा तैयार किए गए व्यक्तिगत ड्राफ्ट को सरकार से पास कराने या समीक्षा कराने के निर्देश देने की मांग पर आश्चर्य व्यक्त किया:

  1. संसद का विशेषाधिकार: कोर्ट ने माना कि संसद और केंद्र सरकार अपनी प्रशासनिक, तकनीकी और साइबर सुरक्षा प्रणालियों की समीक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। इसके लिए अदालत को निर्देश जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  2. अनुच्छेद 226 का दुरुपयोग नहीं: संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत किसी व्यक्ति द्वारा निजी तौर पर तैयार किए गए विधेयक/कांसेप्ट नोट पर सरकार को निर्णय लेने का आदेश अदालत द्वारा जारी नहीं किया जा सकता।

इन आधारों के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

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