Fake Drug Racket: देश भर में लाइफस्टाइल और वजन घटाने वाली दवाओं की बढ़ती मांग के बीच, गुरुग्राम की एक अदालत ने बेहद गंभीर विधिक रुख अपनाया है।
अदालत ने Fake Drug Racket के आरोपी को जमानत नहीं दी
गुरुग्राम जिला अदालत के अपर सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) यशविंदर पॉल सिंह की अदालत ने अपने विधिक आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप अत्यंत गंभीर हैं और उसका यह कृत्य सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। कोर्ट ने मधुमेह (Diabetes) और मोटापा कम करने वाली विश्व प्रसिद्ध दवा ‘मूंजारो क्विकपेन’ (Mounjaro KwikPen) के नाम पर नकली, मिलावटी और मिसब्रांडेड इंजेक्शन बनाने व बेचने के मुख्य आरोपी अवि शर्मा की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज (Denied Bail) कर दिया है।
खुफिया इनपुट और लक्जरी कार से रिकवरी: क्या था मामला?
गुप्त सूचना पर छापेमारी: यह पूरा मामला गुरुग्राम के एक पॉश इलाके से जुड़ा हुआ है। ड्रग्स कंट्रोलर और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम को इनपुट मिला था कि गुरुग्राम के सुपर मार्ट-I के पास एक कार में नकली ‘मूंजारो क्विकपेन’ इंजेक्शनों का अवैध स्टॉक रखा गया है।
गाड़ी से बरामदगी: पुलिस ने जब संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली, तो उसमें से नामी फार्मा कंपनी ‘एली लिली’ (Eli Lilly) के लेबल वाले मूंजारो इंजेक्शन भारी मात्रा में बरामद हुए।
मास्टरमाइंड का खुलासा: कार में मौजूद एक सह-आरोपी मुजम्मिल खान ने पूछताछ में खुलासा किया कि इन नकली दवाओं का असली मालिक और सप्लायर अवि शर्मा है। इसके बाद मुख्य आरोपी अवि शर्मा को मौके पर बुलाया गया, जहां उसने विधिक रूप से अपनी ओनरशिप (स्वामित्व) स्वीकार की, जिसके बाद 19 अप्रैल 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
अदालत का विधिक विश्लेषण: ₹56 लाख का स्टॉक और ‘जापान’ के फर्जी लेबल
अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को रेखांकित किया और आरोपी की दलीलों को विधिक आधार पर खारिज कर दिया।
मूल निर्माता कंपनी ने किया इनकार
जब्त किए गए इंजेक्शनों पर ‘एली लिली इटालिया एसपीए, इटली’ का मार्का लगा था, जिसे भारत में ‘एली लिली एंड कंपनी (इंडिया)’ द्वारा आयात किया जाता है। जब जांचकर्ताओं ने मूल विनिर्माता कंपनी से संपर्क किया, तो कंपनी ने स्पष्ट विधिक बयान दिया कि बरामद किए गए प्रॉडक्ट्स उनके द्वारा निर्मित नहीं हैं और वे पूरी तरह नकली (Counterfeit) हैं।
घर से मिले फर्जी लेबल और तापमान की अनदेखी
आरोपी के पास इन प्रतिबंधित दवाओं को बेचने या आयात करने का कोई वैध लाइसेंस या बिल नहीं था। जांच टीम ने जब अवि शर्मा के आवासीय परिसर पर छापा मारा, तो वहां से दवाओं के जाली (Fabricated) लेबल बरामद हुए। बरामद किए गए स्टॉक की कुल अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹56.15 लाख से अधिक थी। सबसे खतरनाक बात यह थी कि इन सेंसिटिव इंजेक्शन्स को उनके लेबल पर निर्धारित कोल्ड-स्टोरेज (तापमान नियंत्रण) की शर्तों के बिना साधारण तरीके से रखा गया था, जिससे वे ज़हरीले या बेअसर हो सकते थे।
टोन अप (Tone Up) का जापानी फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अवि शर्मा “टोन अप” नाम से एक अन्य दवा भी बना रहा था। इसके लेबल पर वह दावा करता था कि यह प्रॉडक्ट ‘मेड इन जापान’ (Japan) है, जबकि उसके पास इस दवा के निर्माण का कोई वैध लाइसेंस तक नहीं था।
Fake Drug Racket: आरोपी की विधिक दलीलें बनाम कोर्ट का कड़ा स्टैंड
आरोपी के वकील विपिन गुप्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उनका मुवक्किल 19 अप्रैल से हिरासत में है और अब उससे कोई नई रिकवरी नहीं होनी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘टोन अप’ प्रोजेक्ट केवल एक प्रयोगात्मक (Experimental Stage) चरण में था और इसे बाजार में कभी नहीं बेचा गया। सरकारी वकील और ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर अमनदीप चौहान ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अवि शर्मा इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना है और उसकी रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है। अदालत ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए टिप्पणी की और कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं। उसका कृत्य प्रथम दृष्टया बड़े पैमाने पर आम जनता के साथ धोखाधड़ी करने और मिलावटी, नकली व मिसब्रांडेड दवाएं बेचने का प्रतीत होता है। ऐसे मामलों में रियायत नहीं दी जा सकती।
Fake Drug Racket: केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | गुरुग्राम सत्र न्यायालय का विधिक निर्णय (जून 2026) |
| संबंधित अदालत | जिला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम (हरियाणा) |
| माननीय न्यायाधीश | यशविंदर पॉल सिंह, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश |
| मुख्य आरोपी | अवि शर्मा (याचिकाकर्ता) [केस: अवि शर्मा बनाम राज्य] |
| लागू कानून/अधिनियम | औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act) |
| बरामदगी का मूल्य | ₹56.15 लाख से अधिक के नकली ‘Mounjaro KwikPen’ इंजेक्शन |
| अदालत का विधिक स्टैंड | जीवन रक्षक या वजन घटाने वाली दवाओं के नाम पर नकली सिंडिकेट चलाना जनता के साथ गंभीर धोखा है। |
| अंतिम न्यायिक परिणाम | जमानत याचिका खारिज (Bail Application Dismissed); आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेगा। |

