Friday, August 14, 2026
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DRDO Campus: टाउनशिप परिसर से 21 आवारा कुत्ते कैसे रहस्मय तरीके से लापता हो गए…क्यों दिया गया जांच का आदेश, पढ़ें

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के टाउनशिप परिसर से अचानक 21 आवारा कुत्तों के रहस्यमय तरीके से गायब होने के मामले में एक बड़ा विधिक आदेश दिया है।

DRDO Campus:किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी

हाईकोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने ‘राकेश कुमार साहू व अन्य बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जानवरों के भी जीने के अधिकार हैं और उनके साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जा सकती, लेकिन जांच वास्तविक तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि एफआईआर में हवा-हवाई जोड़ी गई धाराओं के आधार पर। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जांच को आगे बढ़ाने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए DRDO के दो संपदा अधिकारियों (Estate Officers) को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।

मामला क्या था? DRDO Campus की सुरक्षा से 21 कुत्ते गायब

यह अजीबोगरीब और गंभीर कानूनी विवाद बेंगलुरु स्थित DRDO के एक विशाल और अत्यधिक सुरक्षित टाउनशिप परिसर से जुड़ा है।

रहस्यमय गुमशुदगी: 9 मार्च 2026 को परिसर की आंतरिक सड़कों पर घूमने वाले लगभग 21 आवारा कुत्ते अचानक लापता हो गए, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है।

अनैतिक तरीके से हटाने का आरोप: पशु क्रूरता निवारण कार्यकर्ताओं और बीबीएमपी (BBMP) के हस्तक्षेप के बाद शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इन जानवरों को बेहद क्रूर और अनैतिक तरीके से परिसर से हटाया या मारा गया है।

अधिकारियों पर एफआईआर: पुलिस ने इस मामले में DRDO के दो एस्टेट अधिकारियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। हाई कोर्ट ने पूर्व में 25 मार्च को इस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसे हटाने के लिए अभियोजन पक्ष ने अर्जी दी थी।

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कोर्ट की विधिक टिप्पणियां और दोनों पक्षों की दलीलें

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी कानूनी बहस देखने को मिली।

जानवरों के भी समान विधिक अधिकार हैं

याचिकाकर्ताओं (DRDO अधिकारियों) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अरविंद कामथ ने दलील दी कि इन अधिकारियों का कुत्तों के गायब होने से कोई सीधा संबंध नहीं है। केवल कैंपस में काम करने के आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस पर जस्टिस नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की और कहा, इस मामले की गहन जांच होनी ही चाहिए। जानवरों के साथ क्रूरता का व्यवहार नहीं किया जा सकता। उनके पास भी समान अधिकार हैं और उन्हें जीवित रहने का पूरा हक है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप किसी ऐसे अधिकारी पर मुकदमा चलाएं जो इसमें शामिल ही न हो।

हाई-सिक्योरिटी जोन में बाहरी दखल कैसे?

बीबीएमपी (BBMP) की वकील वैशाली हेगड़े और राज्य के मुख्य लोक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीश ने जांच का पुरजोर समर्थन किया। बीबीएमपी ने तर्क दिया कि DRDO परिसर एक अत्यंत सुरक्षित क्षेत्र है, जहां बिना अनुमति कोई प्रवेश नहीं कर सकता। तो फिर किसने कैंपस में प्रवेश किया, कुत्तों को अवैध रूप से पकड़ा और वे जानवर अब कहां हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अवैध कुत्ता पकड़ने वाले गिरोह सक्रिय हैं जो जानवरों को प्लास्टिक के थैलों में बंद कर घायल कर देते हैं।

आरोपी या गवाह? सीसीटीवी से खुलेगा राज

सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस के पास इस घटना से जुड़े कुछ CCTV फुटेज उपलब्ध हैं, जिनकी जांच की जानी है। उन्होंने संभावना जताई कि विस्तृत जांच के बाद DRDO अधिकारी शायद इस मामले में आरोपी न रहकर केवल विधिक गवाह (Witness) साबित हों।

हाई कोर्ट का विधिक आदेश और गाइडलाइंस

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने मामले को संतुलित करते हुए निम्नलिखित अंतरिम आदेश पारित किए।

जांच जारी रहेगी: अदालत ने पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन निर्देश दिया कि केवल उन्हीं विधिक अपराधों के तहत जांच की जाए जो वास्तव में जांच के दौरान सामने आते हैं, न कि उन धाराओं पर जो एफआईआर में बिना सोचे-समझे (loosely laid) लगा दी गई थीं।

अधिकारियों को अंतरिम सुरक्षा: दोनों DRDO अधिकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई (Coercive Action) नहीं की जाएगी और न ही उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। कोर्ट ने अधिकारियों को जांच में पूरी तरह सहयोग करने का आदेश दिया।

रिपोर्ट सीधे हाई कोर्ट में होगी पेश: अदालत ने निर्देश दिया कि पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट को निचली अदालत में दाखिल करने से पहले 6 सप्ताह के भीतर सीधे हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

DRDO Campus: केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुकर्नाटक उच्च न्यायालय का अंतरिम निर्णय (जून 2026)
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस एम. नागप्रसन्ना (एकल पीठ)
याचिकाकर्ता / आरोपीराकेश कुमार साहू और एक अन्य (DRDO एस्टेट ऑफिसर्स)
लागू विधिक धाराएंBNS की धारा 61(1), 240, 270, 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11
मुख्य कानूनी प्रश्नक्या किसी सुरक्षित सरकारी परिसर से बेजुबान जानवरों के गायब होने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए आपराधिक जांच जरूरी है?
अदालत का विधिक स्टैंडहाँ, जांच बेहद जरूरी है क्योंकि जानवरों को भी जीने का अधिकार है। हालांकि, अधिकारियों को बिना सबूत प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।
अदालत का अंतिम निर्देशपुलिस को 6 सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सीधे हाई कोर्ट में पेश करने का आदेश; अधिकारियों की गिरफ्तारी पर रोक।
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