Wednesday, October 21, 2026
HomeLaworder HindiFolio Size Paper: 2021 के प्रशासनिक आदेश पर क्या हुआ? अदालतों में...

Folio Size Paper: 2021 के प्रशासनिक आदेश पर क्या हुआ? अदालतों में कागजी अभिलेखों का बोझ और खर्च घटाने के लिए 75 GSM A4 पेपर पर दोनों तरफ छपाई अनिवार्य की जाए

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता के तर्क

  1. 22 फरवरी 2021 का पिछला आदेश:कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 फरवरी 2021 को अपने प्रशासनिक पक्ष (Administrative Side) से यह विचार करने का अनुरोध किया था कि अदालती याचिकाओं और फाइलिंग के लिए दोनों तरफ प्रिंटिंग वाले A4 आकार के कागज के उपयोग को अनिवार्य बनाया जाए।
  2. सार्वजनिक जानकारी का अभाव:अधिवक्ता आकाश शर्मा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड या नोटिस के माध्यम से 2021 के उस आदेश पर हुई प्रगति या अंतिम परिणाम का पता नहीं चल सका।
  3. ताजा मांग:इस जनहित याचिका का प्राथमिक उद्देश्य 22 फरवरी 2021 के आदेश के परिणाम का निर्धारण करना और राज्य की सभी अदालतों में 75 GSM A4 पेपर पर डुप्लेक्स प्रिंटिंग की एकसमान प्रथा लागू करने के लिए नए सिरे से विचार करना है।

ग्रीन कोर्ट पहल और ए4 (A4) पेपर प्रिंटिंग का महत्व

भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) और देश के कई अन्य उच्च न्यायालयों (जैसे दिल्ली, इलाहाबाद, और केरल हाईकोर्ट) ने पहले ही कानूनी याचिकाओं में A4 आकार के पेपर और दोनों तरफ प्रिंटिंग (Both Sides Printing) को अनिवार्य बना दिया है, जिससे हर साल करोड़ों पन्नों की बचत हो रही है।

कोलकाता: अदालती सुधारों एवं हरित न्यायशास्त्र (Green Jurisprudence), पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास (Sustainable Development under Article 21), न्याय प्रशासन में मुकदमों के पक्षकारों पर छपाई व फोटोकॉपी के अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करने (Cost of Litigation), पुराने ‘लीगल साइज’ (Legal/Folio Size Paper) के एकतरफा मुद्रण की ब्रिटिशकालीन परिपाटी को समाप्त करने, तथा पश्चिम बंगाल की सभी जिला व अधीनस्थ अदालतों में 75 GSM A4 आकार के कागज पर दोनों तरफ मुद्रण (Double-Side / Duplex Printing) को एक समान नियम के रूप में लागू करने की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

अधिवक्ता आकाश शर्मा द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कलकत्ता उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और राज्य न्यायिक प्रशासन को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि 22 फरवरी 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा अपनी ही प्रशासनिक शाखा (Administrative Committee) को A4 पेपर और डुप्लेक्स प्रिंटिंग लागू करने पर विचार करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद पांच वर्षों में इस दिशा में क्या ठोस प्रगति हुई, इसका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

अदालत ने इस जनहित याचिका को औपचारिक रूप से दर्ज करते हुए सुनवाई के लिए 23 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

जनहित याचिका के मुख्य आधार एवं विधिक मांगें

1. ’75 GSM A4 पेपर पर दोनों तरफ मुद्रण (Duplex Format) अनिवार्य हो’

याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकाश शर्मा ने रिट याचिका में मुख्य प्रार्थनाएं की हैं:

  • कलकत्ता उच्च न्यायालय (मूल शाखा एवं अपीलीय शाखा) सहित पूरे पश्चिम बंगाल की सभी जिला अदालतों, सत्र न्यायालयों और विशेष न्यायाधिकरणों में भौतिक याचिकाओं, अपीलों, हलफनामों और संलग्नकों (Pleadings, Applications, and Annexures) के लिए 75 GSM A4 साइज पेपर पर दोनों तरफ छपाई का एक समान विधिक नियम (Uniform Practice) अधिसूचित किया जाए।
  • लीगल साइज या फोलियो साइज के मोटे पन्नों पर केवल एक तरफ छपाई की पारंपरिक बाध्यता को पूर्णतः समाप्त किया जाए।

2. कागजी अभिलेखों के भौतिक आकार और मुकदमों के खर्च में भारी कमी:

याचिका में आंकड़ों और व्यावहारिक तर्कों के आधार पर रेखांकित किया गया है:

  • कागज की 50% बचत: दोनों तरफ प्रिंटिंग अनिवार्य करने से न्यायपालिका में कागज की दैनिक खपत सीधे आधी हो जाएगी, जिससे लाखों पेड़ों की कटाई और पानी की बर्बादी रुकेगी।
  • अदालती रिकॉर्ड रूम में स्थान की बचत: अदालतों में मुकदमों की फाइलों के बंडलों से रिकॉर्ड रूम और अलमारियां भरी पड़ी हैं। डुप्लेक्स छपाई से अदालती अभिलेखों का भौतिक आकार (Physical Bulk of Court Records) आधा रह जाएगा, जिससे फाइलों का रखरखाव और डिजिटलीकरण सुगम होगा।
  • पक्षकारों पर मुकदमों का खर्च कम: फोटोकॉपी, टाइपिंग और पेपर के खर्च में भारी गिरावट आएगी, जिससे आम नागरिकों के लिए न्याय सुलभ और सस्ता (Affordable Access to Justice) होगा।

3. 22 फरवरी 2021 के आदेश के हश्र पर सवाल:

  • याचिका में याद दिलाया गया है कि 22 फरवरी 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक न्यायिक आदेश के जरिए अपनी ही प्रशासनिक शाखा को यह निर्देश दिया था कि वह अदालती फाइलिंग में दोनों तरफ प्रिंटिंग वाले A4 पेपर के उपयोग को अनिवार्य करने पर गंभीरता से विचार करे।
  • याचिकाकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक डोमेन, गजट या आधिकारिक नोटिस बोर्ड पर ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है जिससे यह पता चल सके कि प्रशासनिक समिति ने 2021 के उस आदेश के बाद क्या निर्णय लिया। अतः अदालत से प्रार्थना की गई है कि वह 2021 के आदेश के परिणाम को स्पष्ट करे और राज्य भर की अदालतों के लिए एक बाध्यकारी प्रशासनिक अधिसूचना जारी करे।

Also Read; Matrimonial Dispute: जब विवाह समाप्त हो चुका है और पक्षकार मित्रवत रूप से खुशी-खुशी अलग हो चुके हैं, तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्याय के हित के विपरीत होगा

न्यायिक सुधारों की पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों का रुख

भारत के सर्वोच्च न्यायालय और देश के अधिकांश उच्च न्यायालयों ने पर्यावरण संरक्षण और दक्षता के उद्देश्य से पहले ही A4 डुप्लेक्स प्रिंटिंग को अपना लिया है:

न्यायालय / मंचसुधार और विधिक अधिसूचनाप्रभाव
भारत का सर्वोच्च न्यायालय (SC)5 मार्च 2020 एवं 1 अप्रैल 2020 के परिपत्रों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय नियम, 2013 में संशोधन किया गया। सभी याचिकाओं के लिए दोनों तरफ मुद्रित A4 पेपर (75 GSM) अनिवार्य किया गया।कागजी खपत में भारी कमी; वकीलों और वादियों को बड़ी राहत।
दिल्ली उच्च न्यायालयपरिपत्र जारी कर हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतों में A4 साइज (दोनों तरफ प्रिंट) अनिवार्य किया।रिकॉर्ड का आकार घटा।
केरल एवं कर्नाटक उच्च न्यायालयनियम बनाकर लीगल साइज को पूरी तरह प्रतिबंधित किया और A4 डुप्लेक्स को मानक प्रारूप बनाया।पर्यावरण-अनुकूल न्याय प्रणाली की स्थापना।
कलकत्ता उच्च न्यायालय22 फरवरी 2021 को प्रशासनिक स्तर पर विचार करने का आदेश हुआ, किंतु राज्यव्यापी नियम अब तक लंबित।वर्तमान जनहित याचिका (23 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध)।

विधिक एवं पर्यावरणीय विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • संविधान का अनुच्छेद 21 और हरित न्यायपालिका (Green Judiciary):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने एम.सी. मेहता और विभिन्न पर्यावरण संबंधी निर्णयों में स्पष्ट किया है कि प्रदूषण-मुक्त वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
    • न्यायपालिका स्वयं भारी मात्रा में कागज की खपत करने वाली संस्था रही है। कागज के उपयोग को युक्तिसंगत बनाना पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक सिद्धांत के अनुकूल है।
  • संविधान का अनुच्छेद 39A (सुलभ और सस्ता न्याय):
    • राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 39A राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि कानूनी प्रणाली का संचालन न्याय को बढ़ावा दे और आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे।
    • फाइलों के अनावश्यक भारी-भरकम प्रारूप, अत्यधिक फोटोकॉपी और महंगे विशेष लीगल कागजों की अनिवार्यता मुकदमों के खर्च को बढ़ाती है, जो गरीब वादियों के प्रतिकूल है।
  • उच्च न्यायालय की नियम-निर्माण शक्ति (अनुच्छेद 227 सहपठित धारा 122 CPC):
    • संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ सभी न्यायालयों के अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है।
    • सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 122 के तहत उच्च न्यायालय अपनी और अपने अधीनस्थ न्यायालयों की प्रक्रिया और फाइलिंग को विनियमित करने के लिए नियम बनाने के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसके लिए किसी विधायी संशोधन की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है; यह एक प्रशासनिक अधिसूचना द्वारा तुरंत लागू किया जा सकता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: आकाश शर्मा बनाम रजिस्ट्रार जनरल, कलकत्ता उच्च न्यायालय व अन्य [जनहित याचिका (PIL) – कलकत्ता उच्च न्यायालय]
  • याचिकाकर्ता: अधिवक्ता आकाश शर्मा (Advocate Akash Sharma)
  • प्रतिवादी:
    1. रजिस्ट्रार जनरल, कलकत्ता उच्च न्यायालय
    2. राज्य सरकार / संबंधित विधिक प्राधिकारी
  • सूचीबद्ध सुनवाई की तिथि: 23 नवंबर 2026
  • पूर्व संदर्भित न्यायिक आदेश: कलकत्ता उच्च न्यायालय का प्रशासनिक आदेश दिनांक 22 फरवरी 2021
  • प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), अनुच्छेद 39A (समान न्याय व विधिक सहायता), अनुच्छेद 226 (जनहित याचिका अधिकारिता) एवं अनुच्छेद 227 (अधीनस्थ न्यायालयों का अधीक्षण)
    • सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) — धारा 122 व 129 (उच्च न्यायालयों की नियम निर्माण शक्तियां)
    • कलकत्ता उच्च न्यायालय नियम (मूल व अपीलीय शाखा) — फाइलिंग विनिर्देश संबंधी नियम
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • न्यायिक कार्यप्रणाली में पर्यावरण संरक्षण और सरलीकरण: ‘अदालती दस्तावेजों के लिए 75 GSM A4 पेपर पर दोनों तरफ छपाई की एक समान व्यवस्था लागू करना न केवल कागज की भारी खपत और मुकदमों के खर्च को घटाता है, बल्कि यह न्याय प्रशासन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और जन-सुलभ बनाने का एक अनिवार्य कदम है।’
  • वर्तमान स्थिति: याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष पंजीकृत; प्रशासनिक पक्ष से पूर्व आदेश के अनुपालन और राज्यव्यापी नीति निर्धारण पर जवाबदेही तय करने हेतु सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।

Folio Size Paper: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
मामले का नामआकाश शर्मा बनाम रजिस्ट्रार जनरल, कलकत्ता उच्च न्यायालय व अन्य (Akash Sharma v. Registrar General, High Court at Calcutta and Another)
संबंधित अदालतकलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court)
याचिकाकर्ताअधिवक्ता आकाश शर्मा
मुख्य मांगपूरे राज्य की अदालतों में 75 GSM A4 पेपर पर डबल-साइड (Duplex) प्रिंटिंग अनिवार्य की जाए।
अगली सुनवाई तिथि23 नवंबर
मुख्य उद्देश्यपर्यावरणीय नुकसान रोकना, वकीलों व मुवक्किलों की लागत कम करना और अदालती फाइलों का आकार छोटा करना।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
22.1 ° C
22.1 °
22.1 °
78 %
2.1kmh
0 %
Tue
22 °
Wed
30 °
Thu
31 °
Fri
31 °
Sat
31 °

Recent Comments