Gratuity vs. Illegal Stay: कलकत्ता हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों द्वारा सरकारी आवास पर अवैध कब्जे को लेकर एक कड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस शम्पा दत्त ने ‘ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (ECL) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद आधिकारिक आवास में रुकना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी है। कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि यदि कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद कंपनी का क्वार्टर खाली नहीं करता है, तो नियोक्ता (Employer) उसकी ग्रैच्युटी (Gratuity) की राशि से ‘दंडात्मक किराया’ (Penal Rent) काटने का हकदार है।
मामला क्या था? (The Disputed Quarter)
- पृष्ठभूमि: एक महिला कर्मचारी, जो 1987 से ECL में कंपाउंडर के रूप में कार्यरत थीं, 30 जून 2022 को सेवानिवृत्त (Superannuated) हुईं।
- अवैध कब्जा: रिटायरमेंट के समय उन्हें आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक क्वार्टर खाली नहीं किया और वहां की बिजली-पानी का खर्च भी कंपनी ही उठा रही है।
- निचली अथॉरिटी का आदेश: ग्रैच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत ‘कंट्रोलिंग अथॉरिटी’ और ‘अपीलीय अथॉरिटी’ ने कंपनी को कर्मचारी की 18.99 लाख रुपये की पूरी ग्रैच्युटी जारी करने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “दुष्प्रचार को बढ़ावा नहीं दे सकते”
- जस्टिस शम्पा दत्त ने ग्रैच्युटी जारी करने के पुराने आदेशों को चुनौती देते हुए अपनी टिप्पणी दी।
- गलत मिसाल: “यदि ऐसे आचरण को सहन किया जाता है, तो यह दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे ऐसी स्थिति पैदा होगी जहाँ सेवारत कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पाएगा।”
- लाइसेंस की समाप्ति: रिटायरमेंट के दिन ही कर्मचारी का उस आवास में रहने का लाइसेंस खत्म हो जाता है। उसके बाद वहां रुकना ‘अवैध’ माना जाएगा।
दंडात्मक किराया और सरकारी बकाया
- अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति लाभों से कटौती संभव है।
- सरकारी बकाया: बकाया किराया और दंडात्मक शुल्क (Penal Rent) ‘सरकारी बकाया’ की श्रेणी में आते हैं।
- कटौती का अधिकार: नियोक्ता के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह रिटायरमेंट के बाद के लाभों, जिसमें ग्रैच्युटी भी शामिल है, से इन शुल्कों की वसूली करे।
कोर्ट का अंतिम निर्देश
- हाई कोर्ट ने ECL की याचिका स्वीकार करते हुए कई आदेश दिए।
- पैसे की वापसी: ग्रैच्युटी की जमा राशि (18.99 लाख रुपये) कंपनी को वापस की जाए।
- किराया वसूली: कंपनी इस राशि से तब तक का किराया और जुर्माना काटने के लिए स्वतंत्र है, जब तक कर्मचारी आवास खाली नहीं कर देता।
- अंतिम भुगतान: एक बार आवास खाली होने के बाद, कुल बकाया राशि काटकर शेष राशि (यदि कोई हो) कर्मचारी को 15 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष: सेवा और सुविधा का संतुलन
यह फैसला कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के उस सर्कुलर (11 नवंबर, 2021) को भी मजबूती देता है, जिसमें सभी सहायक कंपनियों को सेवानिवृत्त कर्मचारियों से क्वार्टर खाली कराने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ग्रैच्युटी का अधिकार आवास पर अवैध कब्जे के अधिकार के साथ नहीं चल सकता।

