Wednesday, July 15, 2026
HomeScam NoseCompensation Scam: 24 साल से लापता हैं 37 लाख रुपये…गुरुग्राम की इस...

Compensation Scam: 24 साल से लापता हैं 37 लाख रुपये…गुरुग्राम की इस घटना को जानकार आप भी हो जाएंगे हैरान

Compensation Scam: गुरुग्राम की एक अदालत ने विधवा महिला और उसकी दो बेटियों के जमीन मुआवजे के 37.78 लाख रुपये के रहस्यमयी तरीके से गायब होने के मामले में FIR दर्ज करने और SIT जांच का कड़ा आदेश दिया है।

गुड़गांव की जिला अदालत के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज डॉ. गगन गीत कौर ने ‘मूर्ति देवी व अन्य बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यह “गंभीर सवाल” है कि आखिर मुआवजे की रकम किसके पास गई। अदालत ने पाया कि 24 साल पुराने इस मामले में सरकारी रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों में भारी विसंगतियां (Discrepancies) हैं, जो एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करती हैं।

मामला क्या है? (The Missing 37.78 Lakhs)

  • पीड़ित: मूर्ति देवी (स्वर्गीय राम कंवर की पत्नी) और उनकी दो बेटियां।
  • विवाद: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 1 दिसंबर 2000 को चेक (नंबर 681461) के जरिए 37.78 लाख रुपये जमा किए गए थे, जिन्हें बाद में 6 डिमांड ड्राफ्ट्स (DD) में बदला गया।
  • दावा: विधवा और उनकी बेटियों का कहना है कि उन्हें यह पैसा कभी मिला ही नहीं। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद भी इस रकम का कोई सुराग नहीं मिला।

जांच में सामने आईं चौंकाने वाली कमियां

  • अदालत ने जब रिकॉर्ड खंगाले, तो कई संदिग्ध बातें सामने आईं।
  • बैंक का टालमटोल: ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (अब PNB) ने पुष्टि की कि ड्राफ्ट ‘कैश’ (Encashed) हो चुके हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि पैसा किसने और कब निकाला। कोर्ट ने बैंक के जवाब को “गोलमोल” (Evasive) करार दिया।
  • रिकॉर्ड में हेराफेरी: लैंड एक्विजिशन कलेक्टर (LAC) के डिस्पैच रजिस्टर में ओवरराइटिंग और डुप्लीकेट एंट्री मिलीं। फाइल एंट्री का तरीका भी मानक प्रक्रिया से अलग था।
  • प्रक्रिया का उल्लंघन: साल 2000 में मुआवजा आमतौर पर सरकारी खजाने (Treasury) में जमा होता था, लेकिन इस मामले में पैसा डिमांड ड्राफ्ट के जरिए निकाला गया, जिसका कोई ‘ऑडिट ट्रेल’ नहीं है।

कोर्ट का सख्त आदेश: “FIR और SIT जांच”

  • दस्तावेजों में विसंगतियों और गायब रिकॉर्ड को देखते हुए, कोर्ट ने निर्देश दिए हैं।
  • पुलिस कमिश्नर को निर्देश: गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर को तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया है।
  • SIT का गठन: मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) बनाने को कहा गया है।
  • रिकॉर्ड की सुरक्षा: सभी मूल रिकॉर्ड को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में रखने का आदेश दिया गया है ताकि उनके साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

केस की टाइमलाइन (Chronology of the Case)

निष्कर्ष: न्याय की लंबी लड़ाई

यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार और बैंकिंग सिस्टम की खामियों का एक बड़ा उदाहरण है। 24 साल बाद भी एक विधवा को अपने हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद जगी है कि “सच्चाई सामने आएगी” और असली दोषियों को सजा मिलेगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
32.1 ° C
32.1 °
32.1 °
61 %
1.6kmh
95 %
Tue
32 °
Wed
39 °
Thu
36 °
Fri
32 °
Sat
36 °