Monday, October 19, 2026
HomeLaworder HindiWomen Reservation Bill: बिना परिसीमन के लागू हो महिला आरक्षण कानून…वर्ष 2029...

Women Reservation Bill: बिना परिसीमन के लागू हो महिला आरक्षण कानून…वर्ष 2029 के चुनावों को लेकर केंद्र सरकार से यह मांगा जवाब, जानिए

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण कानून को तुरंत जमीन पर उतारने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

देश की संसद में महिला आरक्षण बिल को ठंडे बस्ते में डाला

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने एडवोकेट योगमाया एम.जी. द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। दरअसल, देश की संसद ने साल 2023 में ऐतिहासिक ‘महिला आरक्षण कानून’ (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) तो पास कर दिया, लेकिन उसे जनगणना और परिसीमन (Delimitation) जैसी अंतहीन प्रक्रियाओं की बेड़ियों में जकड़कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 13.6% और राज्यसभा में लगभग 14% है, जो वैश्विक औसत से बहुत नीचे है। यदि परिसीमन का इंतजार किया गया, तो देश की आधी आबादी साल 2029 के आम चुनावों में भी अपने इस संवैधानिक हक से वंचित रह जाएगी।

मामला क्या है?: क्यों फंसा हुआ है महिला आरक्षण का पेंच?

संसद ने 2023 में 128वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया था। लेकिन कानून में एक शर्त जोड़ दी गई।

शर्त क्या थी?: यह आरक्षण कानून तब लागू होगा जब कानून बनने के बाद देश में पहली ‘जनगणना’ (Census) होगी और उसके आधार पर ‘परिसीमन’ (सीटों का नए सिरे से निर्धारण) की प्रक्रिया पूरी होगी।

2026 का हालिया राजनीतिक घटनाक्रम: यह याचिका इसलिए बेहद अहम हो जाती है क्योंकि हाल ही में संसद में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 (जो लोकसभा की सीटें बढ़ाने और देशव्यापी परिसीमन के लिए लाया गया था) आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण खारिज हो गया। इसके बाद केंद्र सरकार को परिसीमन विधेयक, 2026 भी वापस लेना पड़ा। इससे परिसीमन की समयसीमा पूरी तरह अनिश्चित हो गई है।

याचिकाकर्ता की दलील: 2001 या 2011 के आंकड़ों का इस्तेमाल करें

वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एस. नप्पिनाई के माध्यम से दायर इस याचिका में कोर्ट के सामने एक बहुत ही तार्किक और व्यावहारिक विकल्प रखा गया है।

भविष्य का इंतजार क्यों?: याचिका में दलील दी गई है कि चूंकि परिसीमन का भविष्य अब अधर में लटक गया है, इसलिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह भविष्य की किसी जनगणना का इंतजार किए बिना 2001 या 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन अधिनियम, 2002 के तहत महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तुरंत लागू करे।

विरासत बनाम जमीनी नेतृत्व: याचिका में भारतीय राजनीति की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए कहा गया कि वर्तमान में जो भी महिलाएं संसद में पहुंचती हैं, उनमें से अधिकांश राजनीतिक वंश (Political Lineage), पारिवारिक पृष्ठभूमि, पार्टी के रसूख या सेलिब्रिटी स्टेटस के कारण आती हैं। स्वतंत्र रूप से जमीनी स्तर (Grassroots) से संघर्ष करके आने वाली महिलाओं के लिए राजनीति के दरवाजे बंद हैं। यह आरक्षण संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जमीनी महिला नेताओं को नीति-निर्माण में लाने का एक सुधारात्मक जरिया है।

पुरुष सांसदों के मुकाबले महिलाएं अधिक प्रभावी: याचिका में रिसर्च का हवाला

याचिका में कई केस स्टडीज और शोध का हवाला देकर महिला नेतृत्व की विधिक और प्रशासनिक क्षमताओं को साबित किया गया है।

बेहतर परफॉर्मेंस: शोध बताते हैं कि कम विकसित निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) में महिला विधायक और सांसद अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) को पूरा करने में अधिक प्रभावी साबित होती हैं।

कम भ्रष्टाचार और स्वच्छ छवि: डेटा दिखाता है कि महिला जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले दर्ज होने की संभावना बहुत कम होती है और वे व्यक्तिगत वित्तीय लाभ के लिए सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करने में कम संलिप्त पाई जाती हैं।

विधिक केस शीट: सुप्रीम कोर्ट बनाम भारत संघ (महिला आरक्षण क्रियान्वयन वाद)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्चतम न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय
संबंधित अदालतसुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन
केस संदर्भयोगमाया एम.जी. बनाम भारत संघ (2026)
मूल कानूनसंविधान (128वां संशोधन) अधिनियम, 2023
संसद का हालिया घटनाक्रम131वां संविधान संशोधन (परिसीमन विधेयक), 2026 संसद में खारिज
याचिका की मुख्य मांगपरिसीमन और नई जनगणना का इंतजार किए बिना 2029 के चुनावों में 33% महिला आरक्षण लागू हो

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ द्वारा केंद्र सरकार को जारी यह नोटिस देश की आधी आबादी के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए एक नई उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट की यह विधिक समीक्षा तय करेगी कि महिला आरक्षण केवल एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगा या 2029 में देश की संसद सचमुच एक नए और समावेशी स्वरूप में दिखाई देगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
few clouds
25.7 ° C
25.7 °
25.7 °
70 %
2.1kmh
18 %
Mon
31 °
Tue
30 °
Wed
31 °
Thu
30 °
Fri
30 °

Recent Comments