Wednesday, September 9, 2026
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Heated Exchange: I-PAC पर SG Tushar Mehta vs Sr. Adv Menka Guruswami…लोकतंत्र में कोई ‘रानी’ या ‘ताज’ नहीं, जस्टिस पूछे- यहां रानी कौन है?

Heated Exchange: सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC पर छापेमारी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली।

अदालती कार्रवाई का हो रहा राजनीतिक इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच के सामने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जो ममता बनर्जी सरकार और I-PAC रेड से जुड़ी है। सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी के बीच यह विवाद अदालती कार्यवाही के सोशल मीडिया पर हो रहे ‘राजनीतिक इस्तेमाल’ और पश्चिम बंगाल सरकार की तुलना ‘क्राउन’ (ताज/महारानी) से किए जाने को लेकर हुआ।

सोशल मीडिया क्लिप पर विवाद

  • सुनवाई शुरू होते ही मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
  • आरोप: गुरुस्वामी ने कहा कि सुनवाई के वीडियो क्लिप को एक बड़ी राजनीतिक पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • चिंता: उन्होंने तर्क दिया कि कोर्ट की कार्यवाही का इस्तेमाल चुनावी अभियान और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

‘क्राउन’ और ‘क्वीन’ वाला बयान (The “Crown” Contention)

  • विवाद की जड़ उस बहस में थी जहां गुरुस्वामी ने प्रसिद्ध न्यायविद् एच. एम. सीरवाई की संविधान पर टिप्पणी का हवाला दिया था।
  • दलील: उन्होंने कहा था कि “क्राउन (ताज) के खिलाफ कोई मैंडेमस (Mandamus – परमादेश) जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि रानी खुद को आदेश नहीं दे सकती…।”
  • जस्टिस का सवाल: इस पर जस्टिस मिश्रा ने मुस्कुराते हुए पूछा था— “यहां रानी कौन है?”
  • SG का पलटवार: तुषार मेहता ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “क्या प्रतिवादी (राज्य सरकार) क्राउन हैं? सौभाग्य से हम एक लोकतंत्र में हैं, यहां कोई क्राउन नहीं है।”

तुषार मेहता का करारा जवाब

  • गुरुस्वामी की सोशल मीडिया वाली शिकायत पर SG मेहता ने चुटकी लिया।
  • प्रतिक्रिया: वीडियो शायद इसलिए वायरल हो रहा है क्योंकि आपने पश्चिम बंगाल सरकार की तुलना ‘क्राउन’ से की है।
  • सच्चाई: मेहता ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में कोई भी संप्रभु या रानी नहीं है, और ऐसी दलीलें सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित करती ही हैं।

कानूनी पेच: अनुच्छेद 131 बनाम अनुच्छेद 32

  • बहस का तकनीकी पहलू यह है कि क्या ED सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट आ सकती है।
  • गुरुस्वामी का तर्क: यह मूल रूप से केंद्र और राज्य के बीच का विवाद है, जिसके लिए अनुच्छेद 131 के तहत मुकदमा (Suit) दायर किया जाना चाहिए, न कि रिट याचिका।
  • अदालत का रुख: बेंच फिलहाल इस याचिका की ‘सुनवाई योग्यता’ (Maintainability) पर विचार कर रही है और गुरुस्वामी की ‘अनुच्छेद 131’ वाली दलील से पूरी तरह सहमत नहीं दिखी।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

पक्षमुख्य तर्क/बयान
मेनका गुरुस्वामीअदालती कार्यवाही का राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर दुरुपयोग कर रहे हैं।
तुषार मेहतालोकतंत्र में कोई ‘रानी’ या ‘ताज’ नहीं होता; तुलना गलत थी।
विवादित संदर्भपश्चिम बंगाल सरकार की तुलना ‘क्राउन’ से करना।
बेंच की टिप्पणी“यहाँ रानी कौन है?” — जस्टिस पी. के. मिश्रा।

अदालती शिष्टाचार और डिजिटल युग

यह मामला दिखाता है कि डिजिटल युग में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग या रिकॉर्डिंग कितनी संवेदनशील हो सकती है। जहाँ वकील ऐतिहासिक कानूनी मिसालों (जैसे ब्रिटिश कानून) का हवाला देते हैं, वहीं सोशल मीडिया पर उनके अर्थ अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखे जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल कानूनी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, न कि बाहर हो रही चर्चाओं पर।

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