Saturday, July 25, 2026
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Medical Board: सिर्फ ब्लड प्रेशर के उतार-चढ़ाव से उम्मीदवार अयोग्य होंगे या नहीं…सीआरपीएफ में कांस्टेबल भर्ती का यह केस पढ़कर स्पष्ट हो जाएगा

Medical Board: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF) में कांस्टेबल भर्ती के एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में मेडिकल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मेडिकल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए

अदालत ने साफ किया है कि चिकित्सीय परीक्षण के दौरान केवल ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) में उतार-चढ़ाव दिखने मात्र से किसी उम्मीदवार को नौकरी के लिए ‘अनफिट’ (अयोग्य) घोषित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके पीछे की वास्तविक वजह का पता न लगाया जाए। जस्टिस शमीमा जहां की एकल पीठ ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि मेडिकल बोर्ड ने यह जांचने की जहमत ही नहीं उठाई कि उम्मीदवार का ब्लड प्रेशर किसी बीमारी की वजह से बढ़ा हुआ था या फिर जांच के समय होने वाली घबराहट/उत्सुकता (Excitement) के कारण यह अस्थायी (Transient) था।

यह रही अदालत की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि केवल याचिकाकर्ता के ब्लड प्रेशर को मापकर, जो कि उस समय घट-बढ़ रहा था, उसकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया गया। इस बात का कोई निष्कर्ष (Finding) नहीं दर्ज किया गया कि इस फ्लक्चुएशन का कारण क्या था—क्या यह किसी बीमारी की वजह से था या फिर घबराहट के कारण क्षणिक था। इसके अलावा, ऐसा प्रतीत होता है कि या तो जरूरी टेस्ट किए ही नहीं गए, या फिर रिपोर्टों पर विचार किए बिना ही उम्मीदवार को अनफिट घोषित कर दिया गया।

क्या था पूरा मामला? (लिखित और फिजिकल पास, मेडिकल में अटका)

यह याचिका सीआरपीएफ (CRPF) कांस्टेबल पद के एक अभ्यर्थी ने दायर की थी, जिसने भर्ती प्रक्रिया के सभी कठिन चरणों को सफलतापूर्वक पार कर लिया था।

भर्ती का सफर: अभ्यर्थी ने 5 सितंबर 2024 को कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। उसने कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) पास की, जिसके बाद उसने फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) को भी सफलतापूर्वक पास कर लिया।

मेडिकल बोर्ड का झटका: नवंबर 2025 में हुए ‘विस्तृत चिकित्सा परीक्षण’ (DME) के दौरान उसे हाइपरटेंशन (High BP) के आधार पर अनफिट घोषित कर दिया गया।

रिव्यू बोर्ड की लापरवाही: इस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थी ने ‘रिव्यू मेडिकल एग्जामिनेशन’ (RME) के लिए आवेदन किया। 19 नवंबर 2025 को रिव्यू मेडिकल बोर्ड ने भी बिना किसी गहन जांच के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए उसके उतार-चढ़ाव वाले ब्लड प्रेशर के आधार पर उसे अंतिम रूप से खारिज (Reject) कर दिया।

2021 की संशोधित गाइडलाइंस का उल्लंघन

अदालत ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 31 मई 2021 को जारी ‘सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), NSG और असम राइफल्स में भर्ती के लिए संशोधित चिकित्सा परीक्षण दिशानिर्देश’ (Uniform Guidelines for MET) का खुला उल्लंघन किया है।

अदालत ने इन गाइडलाइंस के क्लॉज 6 और 7 (विशेषकर सब-क्लॉज ‘e’) की व्याख्या करते हुए ये बातें स्पष्ट कीं

अस्पताल में भर्ती करना अनिवार्य: दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार को हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के कारण शुरुआती मेडिकल में छांट दिया जाता है, तो रिव्यू मेडिकल बोर्ड की यह जिम्मेदारी है कि वह उस उम्मीदवार को अस्पताल में भर्ती (Admit) करे।

विशेषज्ञ की राय: अस्पताल में रखने के बाद उम्मीदवार की लगातार मॉनिटरिंग होनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर सरकारी मेडिकल कॉलेज के स्पेशलिस्ट या सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर की राय ली जानी चाहिए।

घबराहट बनाम बीमारी का अंतर: बोर्ड को अनिवार्य रूप से इस निष्कर्ष पर पहुंचना होता है कि ब्लड प्रेशर का बढ़ना केवल ‘एग्जामिनेशन हॉल एंग्जायटी’ (परीक्षा के डर या उत्साह) के कारण अस्थायी था या फिर वह सचमुच किसी क्रोनिक बीमारी से पीड़ित है। मौजूदा मामले में बोर्ड ने ऐसा कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं अपनाया।

विश्लेषण: हाई कोर्ट का निर्देश और कानूनी स्टैंड

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर. बोरा और आर. मेधी ने दलीलें पेश कीं, जबकि सरकार की ओर से स्थाई वकील एस. बरुआ ने मेडिकल बोर्ड के फैसले का बचाव किया था।

मामला और चरणवर्तमान स्थिति और कोर्ट का आदेश
रिव्यू मेडिकल बोर्ड की रिपोर्टहाई कोर्ट ने 19 नवंबर 2025 की रिव्यू बोर्ड की रिपोर्ट को पूरी तरह से रद्द (Set Aside) कर दिया है।
री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) का आदेशअदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ५ मई २०२१ की आधिकारिक गाइडलाइंस के तहत निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करते हुए उम्मीदवार की फिटनेस का दोबारा मूल्यांकन करें।
भविष्य के लिए मिसालयह फैसला साफ करता है कि सेना और अर्धसैनिक बलों की भर्तियों में मेडिकल बोर्ड मनमाने ढंग से बिना पुख्ता क्लिनिकल सबूतों के किसी भी अभ्यर्थी का करियर खत्म नहीं कर सकते।
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