Friday, September 18, 2026
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Inter-Faith Guardianship: आपको पता है…मुस्लिम बच्ची का गार्जियन बनेंगे हिंदू दंपति, बच्चा जिसे मां-पिता माने, वही उसका घर है, पढ़ें पूरी खबर

Inter-Faith Guardianship: मद्रास हाई कोर्ट ने मानवता और बाल कल्याण (Child Welfare) की दिशा में एक मिसाल कायम करते हुए एक हिंदू दंपति को मुस्लिम बच्ची का कानूनी अभिभावक (Legal Guardian) नियुक्त किया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी बच्चे के भविष्य और उसकी भलाई के आगे धर्म की दीवारें मायने नहीं रखतीं। यह मामला मदुरै के एक हिंदू दंपति और एक मुस्लिम दिहाड़ी मजदूर महिला से जुड़ा है। अदालत ने पारिवारिक अदालत (Family Court) के उस फैसले को पलट दिया जिसमें ‘अजनबी’ होने के आधार पर गार्जियनशिप देने से इनकार कर दिया गया था।

मामले की मानवीय पृष्ठभूमि (The Heart of the Matter)

  • दंपति की स्थिति: एक हिंदू व्यक्ति और उनकी पत्नी की शादी 2012 में हुई थी। संतान न होने के कारण वे एक बच्चा गोद लेना चाहते थे।
  • जैविक माँ की मजबूरी: एक मुस्लिम महिला (विधवा), जो पिछले 10 वर्षों से इस दंपति को जानती थी, आर्थिक तंगी के कारण अपने तीसरे बच्चे (बेटी) की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने में असमर्थ थी। उसने स्वेच्छा से अपनी बच्ची इस दंपति को सौंप दी।
  • भावनात्मक जुड़ाव: जन्म के समय से ही बच्ची इस हिंदू दंपति के पास है। वह उन्हें ही ‘माता-पिता’ मानती है और अपनी सगी माँ को ‘आंटी’ (Aunt) कहकर बुलाती है।

गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 की व्याख्या

  • जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश और जस्टिस के. के. रामकृष्णन की बेंच ने कानून के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
  • धर्म-तटस्थ कानून (Religion-Neutral): कोर्ट ने कहा कि ‘गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट’ धर्म-निरपेक्ष है। यह हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो किसी नाबालिग का अभिभावक बनना चाहता है।
  • धारा 17 (Section 17): इस धारा के तहत कोर्ट को गार्जियन नियुक्त करते समय बच्चे की उम्र, लिंग और धर्म के साथ-साथ प्रस्तावित गार्जियन के चरित्र और क्षमता पर विचार करना होता है। लेकिन इन सबसे ऊपर ‘बच्चे का कल्याण’ (Welfare of the Child) सर्वोपरि है।

पैरेंट्स पैट्रिया’ (Parens Patriae) क्षेत्राधिकार

  • अदालत ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत का उपयोग किया।
  • अभिभावक के रूप में राज्य: कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वह ‘पैरेंट्स पैट्रिया’ अधिकार क्षेत्र का उपयोग कर रहा है, जिसका अर्थ है कि राज्य (अदालत) उस बच्चे का संरक्षक है जिसकी देखभाल करने वाला कोई कानूनी सहारा न हो।
  • संतुलन: कोर्ट को पक्षों की भावनाओं और बच्चे के सर्वोत्तम हित के बीच संतुलन बनाना होता है। चूंकि बच्ची जन्म से ही इस दंपति के साथ है, इसलिए उसे उनसे अलग करना उसके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए हानिकारक होता।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताहिंदू दंपति (जो बच्ची का पालन-पोषण कर रहे हैं)।
विवादफैमिली कोर्ट ने ‘अजनबी’ और ‘अलग धर्म’ के आधार पर अर्जी खारिज की थी।
हाई कोर्ट का तर्कजैविक माँ की पूर्ण सहमति है और बच्चा इसी परिवार में खुश है।
कानूनी संदेशबच्चे का कल्याण किसी भी धार्मिक या सामाजिक औपचारिकता से बड़ा है।
परिणामहिंदू व्यक्ति को बच्ची का ‘कानूनी गार्जियन’ नियुक्त किया गया।

मानवता की जीत

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि कानून केवल किताबी नियमों से नहीं, बल्कि संवेदनाओं और व्यावहारिक परिस्थितियों से चलता है। अदालत ने माना कि एक बच्ची को वह प्यार और सुरक्षा मिलना अधिक महत्वपूर्ण है जिसे वह अपना मानती है, बजाय इसके कि उसे किसी ‘तकनीकी’ या ‘धार्मिक’ आधार पर उसके वर्तमान माता-पिता से दूर कर दिया जाए।

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