Saturday, September 19, 2026
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Matrimonial Law: झूठे आरोप लगाकर पत्नी को कोर्ट घसीटना भी क्रूरता है…जो खुद प्रताड़ित करे, उसे तलाक का अधिकार नहीं, समझिए पूरे केस को

Matrimonial Law: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की बेंच ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में ‘क्रूरता’ (Cruelty) की नई व्याख्या करते हुए पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में पीड़ित असल में आक्रामक (Aggressor) बन गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी पर झूठे आरोप लगाना और उसे बार-बार कानूनी मुकदमों में घसीटना खुद पति द्वारा की गई ‘क्रूरता’ है। यह मामला एक ऐसे पति का था जिसने अपनी पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था, लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि प्रताड़ना असल में पत्नी की ओर से नहीं, बल्कि पति की ओर से हो रही थी।

पति के दावे और समझौते का विवाद

  • दहेज और पैसे का आरोप: पति का दावा था कि पत्नी ने उससे 12 लाख रुपये लेकर जनवरी 2022 में आपसी सहमति से तलाक का समझौता किया था, लेकिन बाद में वह मुकर गई।
  • जीवनशैली का विवाद: पति के वकील ने तर्क दिया कि पत्नी को ‘सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स’ (श्रेष्ठता की भावना) है क्योंकि वह पॉश इलाके में पली-बढ़ी है, जबकि पति गांव में रहता है। आरोप था कि वह पति पर पैतृक संपत्ति बेचकर शहर में फ्लैट लेने का दबाव बना रही थी।
  • गंभीर आरोप: पति ने पत्नी पर बिना बताए गर्भपात (Abortion) कराने और परिवार के साथ दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया था।

कोर्ट का फैसला: क्रूरता केवल अवैध कृत्य नहीं

  • अदालत ने ‘क्रूरता’ को परिभाषित करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
  • झूठे आरोप भी क्रूरता हैं: कोर्ट ने कहा कि क्रूरता का मतलब सिर्फ शारीरिक हिंसा या दहेज मांगना ही नहीं है। अदालती कार्यवाही के दौरान जीवनसाथी के खिलाफ “झूठे और अपमानजनक आरोप” लगाना भी मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
  • सबूतों का अभाव: पति अपनी पत्नी के गर्भवती होने या गर्भपात कराने के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
  • पुनर्मिलन की उम्मीद: कोर्ट ने नोट किया कि पति ने खुद गवाही में कहा कि वह अपनी पत्नी को साथ रखने के लिए तैयार है। इसका मतलब है कि रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और सुलह की गुंजाइश बाकी है।

पत्नी का पक्ष: साजिश का शिकार

  • पत्नी के वकील ने पति के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें एक ‘साजिश’ बताया।
  • फर्जी हस्ताक्षर: आरोप लगाया गया कि 12 लाख रुपये वाला समझौता पत्र पति ने खुद पत्नी के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर तैयार किया था।
  • दूसरी शादी की मंशा: पत्नी का तर्क था कि पति उसे घर से निकालकर दूसरी शादी करना चाहता है, इसलिए वह उसे झूठे केसों में फंसा रहा है।
  • सुलह की इच्छा: पत्नी ने कोर्ट में कहा कि वह आज भी अपने पति के साथ रहने को तैयार है और उसने कभी तलाक नहीं मांगा।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मामलाहिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की अपील।
फैसलाफैमिली कोर्ट के तलाक न देने के फैसले को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा।
कोर्ट की सीखमुकदमेबाजी का दुरुपयोग (Misuse of Litigation) खुद एक प्रताड़ना है।
महत्वपूर्ण तथ्यपति आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा, जबकि पत्नी साथ रहने को तैयार थी।

कानून का ढाल की तरह इस्तेमाल, तलवार की तरह नहीं

झारखंड हाई कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो तलाक पाने के लिए अपने जीवनसाथी पर मनगढ़ंत और गंभीर आरोप लगाते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि यदि आप खुद ‘अग्रसर’ (Aggressor) होकर दूसरे पक्ष को कानूनी रूप से परेशान कर रहे हैं, तो आप ‘क्रूरता’ के आधार पर राहत पाने के हकदार नहीं हैं।

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