Saturday, September 19, 2026
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Unmarried Sister: बालिग भाई हकदार नहीं, लेकिन अविवाहित बेटी का अधिकार…मां व बड़ी बहन से अविवाहित बहन को मिलेगी मेंटेनेंस, जरूर पढ़ें

Unmarried Sister: कर्नाटक हाई कोर्ट ने पारिवारिक भरण-पोषण (Family Maintenance) के मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल पेश की है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक अविवाहित महिला अपनी माँ और अपनी बड़ी बहन (जिसे अनुकंपा नियुक्ति मिली थी) से हर महीने 20,000 रुपये का भरण-पोषण और अपनी शादी के खर्च पाने की हकदार है। यह मामला मैसूरु के टी. मदैया के परिवार से जुड़ा है, जिनकी मृत्यु के बाद उनकी बड़ी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) मिली थी।

मामले की पृष्ठभूमि: अनुकंपा नियुक्ति और वादा

  • विवाद की जड़: पिता की मृत्यु के बाद बड़ी बेटी दर्शिनी (34) को MUDA में नौकरी मिली। आरोप है कि नौकरी मिलते समय उन्होंने शपथ पत्र दिया था कि वह पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाएंगी।
  • आरोप: दूसरी बेटी धनुश्री (31) और बेटे धनुष (29) ने आरोप लगाया कि माँ (रिटायर्ड हेडमिस्ट्रेस) और बड़ी बहन ने नौकरी मिलने और शादी के बाद उन्हें अकेला छोड़ दिया और उनकी देखभाल नहीं की।

कोर्ट का फैसला: बहन vs भाई (The Legal Distinction)

जस्टिस मन्मथ राव की बेंच ने मेंटेनेंस के हक को लेकर दो अलग-अलग निष्कर्ष निकाले।

A. अविवाहित बेटी (धनुश्री) के लिए

  • हक बरकरार: कोर्ट ने कहा कि भले ही वह बालिग हो गई है, लेकिन अविवाहित होने के कारण वह मेंटेनेंस और शादी के खर्च की हकदार है।
  • मेंटेनेंस: उसे माँ से 20,000 रुपये और बड़ी बहन से 7,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे। साथ ही शादी के लिए माँ से 10 लाख और बहन से 2 लाख रुपये का योगदान भी मिलेगा।

बालिग भाई (धनुष) के लिए

  • अर्जी खारिज: कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें भाई को पैसे देने की बात कही गई थी।
  • कारण: जस्टिस राव ने स्पष्ट किया कि चूंकि भाई ने अपनी शिक्षा पूरी कर ली है और वह बालिग (Majority) हो चुका है, इसलिए कानूनन वह अपनी माँ या बहन से मेंटेनेंस पाने का हकदार नहीं है।

अनुकंपा नियुक्ति की शर्तें (Conditions of Compassionate Job)

इस केस में एक महत्वपूर्ण बिंदु ‘अंडरटेकिंग’ (Undertaking) था। जब कोई व्यक्ति अपने पिता या परिवार के सदस्य की जगह सरकारी नौकरी पाता है, तो वह कानूनी रूप से शेष आश्रितों की देखभाल करने के लिए बाध्य होता है। बड़ी बहन द्वारा इस वादे को न निभाना कोर्ट के सख्त रुख का एक बड़ा कारण बना।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

पक्षकोर्ट का आदेश (Final Ruling)
अविवाहित बहनप्रति माह ₹27,000 (कुल) + ₹12 लाख शादी का खर्च।
बालिग भाईकोई मेंटेनेंस नहीं (चूंकि वह स्वस्थ और शिक्षित बालिग पुरुष है)।
बड़ी बहनपिता की जगह नौकरी मिली, इसलिए जिम्मेदारी उठानी होगी।
माँपेंशन और आय होने के कारण बेटी के भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार।

सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारी

कर्नाटक हाई कोर्ट का यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि भारतीय कानून में अविवाहित बेटियों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। यह फैसला उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो अनुकंपा नियुक्ति लेकर अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं। वहीं, सक्षम और बालिग बेटों को अपनी आजीविका के लिए स्वयं जिम्मेदार ठहराया गया है।

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