Saturday, June 20, 2026
HomeBREAKING INDIAJudge Threaten: महिला जज से दुर्व्यवहार को लेकर वकील की सजा बरकरार…कड़कड़डूमा...

Judge Threaten: महिला जज से दुर्व्यवहार को लेकर वकील की सजा बरकरार…कड़कड़डूमा कोर्ट का मामला

Judge Threaten: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, किसी जज को धमकाना या डराना, खासकर लैंगिक गाली-गलौज के जरिए, न्याय की आत्मा पर हमला है। इसको लेकर सख्त जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

यह रही हाईकोर्ट जज की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, न्यायपालिका में कार्यरत महिलाओं को कभी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी की इच्छा पर निर्भर हैं या असहाय हैं। इस दौरान अदालत ने नरमी बरतने से इनकार करते हुए एक वकील की सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा। अदालत ने सजा के आदेश को संशोधित करते हुए निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की कुल सजा 18 महीने होगी। इसमें से 5 महीने 17 दिन पहले ही आरोपी ने काट लिए हैं।

न्यायिक शिष्टाचार व संस्थागत ईमानदारी पर हमला…

दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि जब एक न्यायिक अधिकारी, जो न्याय देने के पवित्र कर्तव्य का पालन कर रही होती है। उस समय उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई जाती है, तो यह न्यायिक शिष्टाचार और संस्थागत ईमानदारी की बुनियाद पर ही हमला है। कोर्ट ने कहा, यह केवल व्यक्तिगत दुर्व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसा मामला है जिसमें न्याय के साथ अन्याय हुआ। जहां एक जज, जो कानून की निष्पक्ष आवाज का प्रतीक है, अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए व्यक्तिगत हमले का निशाना बनी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि कभी-कभी न्याय की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को भी लैंगिक गाली-गलौज से पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

महिलाएं अभी भी बराबरी के स्तर पर सुरक्षित नहीं: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि जब एक महिला जज को एक वकील द्वारा व्यक्तिगत बेइज्जती और अपमान का शिकार बनाया जाता है। यह न केवल व्यक्तिगत गलत व्यवहार होता है, बल्कि यह इस बात को भी दर्शाता है कि महिलाएं, यहां तक कि न्याय के सर्वोच्च मंचों पर भी, प्रणालीगत असुरक्षा का सामना करती हैं। कोर्ट ने कहा, जब एक पुरुष वकील अपनी स्थिति का इस्तेमाल कर एक महिला न्यायिक अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, तब यह केवल एक न्यायिक अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार का मामला नहीं रहता। यह एक बड़ी चुनौती का प्रतिबिंब बन जाता है, जो यह दिखाता है कि महिलाएं, न्यायिक व्यवस्था में भी, अब तक बराबरी के स्तर पर सुरक्षित नहीं हो पाई हैं।

न्यायपालिका सबके लिए न्याय करती है…

कोर्ट ने यह भी जोड़ा, “जब एक महिला, विशेष रूप से न्यायपालिका में बैठी हुई महिला, अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों का सामना करती है, तो यह वर्षों की प्रगति को खत्म कर देने की धमकी बन जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया एक अकेली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बेंच और बार के बीच सहयोग का कार्य है। कोर्ट ने कहा कि परंपरागत रूप से न्याय को अंधा माना जाता है। मगर यह ‘अंधापन’ आंखों पर बंधी पट्टी का प्रतीक है, जो उसे लिंग, धर्म, जाति, वर्ग, सामाजिक हैसियत या सत्ता के आधार पर भेदभाव नहीं करने देता। वह दोनों पक्षों को निष्पक्षता से सुनता है। कोर्ट ने कहा, इस पृष्ठभूमि में यह सुरक्षित रूप से कहा जा सकता है कि न्याय ऊपर बताए गए अर्थों में भले ही ‘अंधा’ हो, लेकिन ‘मौन’ नहीं है। न्यायपालिका का असली सार यह है कि वह निर्भीक होकर सबके लिए न्याय करती है और यही उसे भरोसेमंद बनाता है।

यह है पूरा घटनाक्रम

  1. दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 30 अक्टूबर 2015 को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक अधिवक्ता ने कोर्टरूम के भीतर खुलेआम हंगामा मचाया और पीठासीन न्यायाधीश के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के समय महिला मजिस्ट्रेट छठी मंजिल पर अपने कोर्टरूम में सुनवाई की अध्यक्षता कर रही थीं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता संजय राठौर, जो वाहन संख्या UP14CT0689 के मालिक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, अपने एक सहयोगी के साथ कोर्टरूम में दाखिल हुए। जब उन्हें बताया गया कि उनका चालान मामला 31 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया है, तो वह अचानक उग्र हो गए और खुलेआम चिल्लाने लगे। उन्होंने न्यायाधीश से कहा, “ऐसे कर दिया एडजर्न मैटर, ऐसे कैसे डेट दे दी, मैं कह रहा हूं, अभी लो मैटर, आर्डर करो अभी।” न्यायाधीश ने जब उनसे वकालतनामा दिखाने को कहा, तो उन्होंने घमंडपूर्वक जवाब दिया कि “देख लो, चालान के साथ में लगा है, उसी में मेरा नाम है।” इसके बावजूद अधिवक्ता शांत नहीं हुए, बल्कि और अधिक आक्रामक हो गए। उन्होंने कोर्टरूम का माहौल बिगाड़ दिया और बार-बार मेज पीटते हुए न्यायिक कार्य में बाधा डालने लगे।
  2. जब मजिस्ट्रेट ने फिर से समझाया कि मामला पहले ही स्थगित हो चुका है, तो अधिवक्ता ने डाइस की ओर बढ़कर धमकी दी, “ऐसा करो, मैटर ट्रांसफर कर दो सीएमएम को, आर्डर करो अभी, ऐसे कैसे एडजर्न कर दिया मैटर।” उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले को ट्रांसफर कराने के लिए कल खुद हाईकोर्ट जाएंगे और शिकायत करेंगे। इस दौरान उन्होंने कई बार कहा, “मैं देखता हूं तुम्हें अभी, आर्डर करो अभी, दस्ती दो कॉपी।” शिकायत के मुताबिक, जब मजिस्ट्रेट ने उन्हें कोर्टरूम से बाहर जाने को कहा, तो अधिवक्ता ने और भी उग्र होकर चिल्लाया, “मैं कहीं नहीं जाऊंगा, मैं देखता हूं किसमें दम है मुझे बाहर निकालने का।” इसके बाद उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणी की: “चढ्ढी फाड़ कर रख दूंगा।” न्यायाधीश ने उनके नशे में होने की आशंका जताते हुए कोर्ट स्टाफ से उनका ब्रेथ एनालिसिस टेस्ट कराने को कहा, लेकिन इससे पहले ही अधिवक्ता कोर्टरूम से भाग निकले। जाते-जाते भी उन्होंने महिला मजिस्ट्रेट के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना से आहत मजिस्ट्रेट ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता ने न केवल उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि न्यायालय की मर्यादा का भी अपमान किया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
37 ° C
37 °
37 °
35 %
3.6kmh
86 %
Fri
37 °
Sat
44 °
Sun
44 °
Mon
44 °
Tue
45 °

Recent Comments