Sunday, September 20, 2026
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 Judicial crisis in Pakistan: लाहौर हाईकोर्ट के जजों का इस्तीफा…इस्लामाबाद में न्यायिक संकट गहराया

 Judicial crisis in Pakistan: पाकिस्तान में नया 27वां संवैधानिक संशोधन लागू होने के बाद छिड़े न्यायिक विवाद ने 15 नवंबर 2025 को और तूल पकड़ लिया।

वरिष्ठ जज न्यायमूर्ति शम्स महमूद मिर्ज़ा ने इस्तीफ़ा

लाहौर हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज न्यायमूर्ति शम्स महमूद मिर्ज़ा ने इस्तीफ़ा दे दिया, जिससे वे इस संशोधन के खिलाफ पद छोड़ने वाले पहले हाईकोर्ट जज बन गए। इससे पहले दो सुप्रीम कोर्ट जज—न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह और न्यायमूर्ति अथर मिनल्लाह—भी इस्तीफा दे चुके हैं।

यह है विवादित 27वां संवैधानिक संशोधन

नए संशोधन के तहत

  • फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (FCC) की स्थापना की गई है, जो संविधान से जुड़े सभी मामलों की अंतिम प्राधिकारी होगी।
  • मौजूदा सुप्रीम कोर्ट अब केवल सिविल और क्रिमिनल मामलों तक सीमित हो जाएगी।
  • नया अनुच्छेद 189 लागू होने से सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक सर्वोच्चता समाप्त मानी जा रही है।
  • आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर अब 2030 तक नए पदनाम चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में अपने पद पर बने रह सकेंगे।
  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और विधिक विशेषज्ञों ने इस संशोधन को “न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला” बताया है।

लाहौर हाईकोर्ट जज का इस्तीफ़ा

न्यायमूर्ति शम्स महमूद मिर्ज़ा, जिनकी सेवानिवृत्ति 6 मार्च 2028 को होनी थी, ने संशोधन का विरोध करते हुए इस्तीफ़ा भेजा। वे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI के वरिष्ठ नेता और वकील सलमान अक़्रम राजा के बहनोई भी हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जजों का कड़ा विरोध

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जजों ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी द्वारा संशोधन को मंज़ूरी दिए जाने के कुछ ही घंटे बाद इस्तीफ़ा दे दिया।

न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह ने कहा कि यह संशोधन

“संविधान पर गंभीर हमला” है, “सुप्रीम कोर्ट को तोड़ता है”, “न्यायपालिका को कार्यपालिका के नियंत्रण में धकेलता है” और “लोकतांत्रिक ढांचे के हृदय पर चोट” करता है। जजों का कहना है कि FCC की स्थापना से सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्च संवैधानिक भूमिका समाप्त हो गई है और उसे “दूसरी पायदान” की अदालत बना दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता

इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरीस्ट्स (ICJ) ने 27वें संशोधन को “न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खुला हमला (flagrant attack)” बताया है।

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