Kejriwal’s Contempt: दिल्ली हाई कोर्ट से केजरीवाल के खिलाफ अवमानना PIL से जस्टिस तेजस कारिया अलग हो गए।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच के सामने यह मामला सूचीबद्ध (Listed) था। जस्टिस कारिया के हटने के बाद, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस याचिका को कल (गुरुवार) ऐसी बेंच के सामने पेश किया जाए जिसका वह हिस्सा न हों। एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट के अनुसार, जस्टिस तेजस कारिया ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है। यह याचिका शराब नीति मामले (Liquor Policy Case) से जुड़ी अदालती कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर अवैध रूप से प्रसारित करने के खिलाफ दायर की गई थी।
न्यायाधीश ने खुद को अलग क्यों किया? (Reason for Recusal)
- जस्टिस तेजस कारिया द्वारा सुनवाई से हटने का कारण उनके न्यायिक सेवा में आने से पहले के पेशेवर संबंध हैं।
- पूर्व पेशेवर अनुभव: न्यायाधीश बनने से पहले जस्टिस कारिया एक प्रमुख लॉ फर्म में पार्टनर थे।
- सोशल मीडिया कनेक्शन: उस दौरान उन्होंने Meta (Facebook/WhatsApp) जैसे सोशल मीडिया दिग्गजों का कई मामलों में प्रतिनिधित्व किया था।
- हितों का टकराव (Conflict of Interest): चूंकि इस PIL में Meta, X (Twitter) और Google को भी पक्षकार (Parties) बनाया गया है, इसलिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने मामले से हटना उचित समझा।
याचिका का मुख्य मुद्दा क्या है? (The Allegation)
- एडवोकेट वैभव सिंह द्वारा दायर इस PIL में निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं।
- अवैध रिकॉर्डिंग: आरोप है कि 13 अप्रैल, 2026 को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में अरविंद केजरीवाल की पेशी के दौरान अदालती कार्यवाही को अनधिकृत रूप से रिकॉर्ड किया गया।
- सोशल मीडिया पर प्रसार: AAP नेताओं और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने इन वीडियो क्लिप्स को ‘जानबूझकर और इरादतन’ सोशल मीडिया पर साझा किया।
- नियमों का उल्लंघन: याचिकाकर्ता का कहना है कि यह हाई कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है और इससे न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश की गई है।
याचिकाकर्ता की मांगें
- PIL में अदालत से निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।
- SIT जांच: मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।
- अवमानना कार्यवाही: उन सभी लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt) की कार्यवाही शुरू हो जिन्होंने वीडियो अपलोड या शेयर किया।
- कंटेंट हटाना: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया जाए कि वे इन अनधिकृत वीडियो को तुरंत अपने प्लेटफॉर्म से हटाएं।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| न्यायाधीश | जस्टिस तेजस कारिया (बेंच से अलग हुए)। |
| प्रतिवादी | अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, Meta, X, Google आदि। |
| मूल घटना | 13 अप्रैल की अदालती कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग। |
| अगली सुनवाई | 23 अप्रैल, 2026 (नई बेंच के सामने)। |
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का रुख
सोमवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भी केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा से केस से हटने (Recusal) की मांग की थी। जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट कहा था कि किसी वादी (Litigant) को बिना ठोस आधार के “जज चुनने” की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जुडिशियल एथिक्स का पालन
जस्टिस तेजस कारिया का यह कदम भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता और ‘जुडिशियल एथिक्स’ को दर्शाता है। भले ही कोई सीधा लाभ न हो, लेकिन यदि न्यायाधीश का किसी पक्षकार के साथ पुराना पेशेवर संबंध रहा है, तो निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत खुद को अलग करना एक स्वस्थ परंपरा मानी जाती है।

