हाईकोर्ट द्वारा तय की गई सख्त शर्तें
अदालत ने आरोपी को 4 सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने या गिरफ्तारी की स्थिति में अग्रिम ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन इसके साथ कई कड़ी शर्तें लगाईं:
- ज़मानती दस्तावेज: आरोपी को ₹10,000 का ज़मानत बांड और दो प्रतिभूतियां (Sureties) जमा करनी होंगी। इनमें से एक ज़मानतदार आरोपी का पारिवारिक रिश्तेदार होना चाहिए, जो पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर ID जैसे वैध पहचान पत्र से अपनी पहचान सत्यापित करे।
- पुलिस स्टेशन में उपस्थिति: आरोपी को पहले 1 महीने तक रोजाना संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगानी होगी। इसके बाद अगले 6 महीनों तक हर 15 दिन में एक बार थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी और इसका प्रमाणपत्र ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा।
- मुकदमे में सहयोग: यदि आरोपी बिना किसी उचित कारण के लगातार दो तिथियों पर सुनवाई से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।
पटना: पटना हाईकोर्ट ने बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में अभियुक्त को एक अत्यंत अनूठी और सामाजिक शर्त के आधार पर अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान की है।
न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकल पीठ ने सीवान जिले के गोरियाकोठी थाने में दर्ज मामले में आरोपी प्रवीण आनंद की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने 112.320 लीटर विदेशी व्हिस्की की कथित बरामदगी से जुड़े मामले में आरोपी को गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय (Civil Court) परिसर के सौंदर्यीकरण और गमले (Flower Pots) खरीदने हेतु ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ (DLSA) में ₹15,000 जमा करने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां और विधिक आधार
1. सचेत कब्जे (Conscious Possession) से जब्ती का अभाव
- अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि पुलिस द्वारा जब्त की गई कार से 112.320 लीटर व्हिस्की की कथित बरामदगी के समय याचिकाकर्ता के प्रत्यक्ष या सचेत कब्जे से कोई मादक पदार्थ/शराब बरामद नहीं हुई थी।
- हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ (Full Bench) के पूर्व ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार—यदि एफआईआर के प्राथमिक अवलोकन से उत्पाद कानून के तहत प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध नहीं बनता है, तो वैधानिक रोक (Statutory Bar under Section 76(2) of Excise Act) के बावजूद अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य होती है।
2. अदालत परिसर के लिए गमलों की खरीद की अनूठी शर्त
- सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने स्वेच्छा से प्रस्ताव रखा कि याचिकाकर्ता मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय परिसर के सौंदर्यीकरण हेतु गमले खरीदने के लिए ₹15,000 का योगदान देना चाहता है।
- अदालत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि यह राशि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्थानीय शाखा द्वारा जारी डिमांड ड्राफ्ट (DD) के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), मुजफ्फरपुर के पक्ष में जमा कराई जाए।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (सीवान शराब जब्ती मामला)
- घटना व प्राथमिकी: 22 फरवरी को सीवान जिले के गोरियाकोठी पुलिस स्टेशन में बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
- पुलिस का दावा: पुलिस ने एक कार को रोककर तलाशी के दौरान उसमें से कुल 112.320 लीटर व्हिस्की जब्त करने का दावा किया था और मामले में प्रवीण आनंद को नामजद किया था।
- अग्रिम राहत की मांग: गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जमानत की कड़ी वैधानिक व प्रक्रियात्मक शर्तें
उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देते हुए अभियुक्त पर निम्नलिखित कड़ी शर्तें अधिरोपित की हैं:
- निजी मुचलका व सत्यापन: आदेश प्राप्ति के 4 सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करने या गिरफ्तार होने की स्थिति में ₹10,000 का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे।
- पारिवारिक जमानतदार की पहचान: कम कम एक जमानतदार परिवार का सदस्य/रिश्तेदार होना अनिवार्य है, जिसे अपनी पहचान साबित करने के लिए वैध सरकारी पहचान पत्र (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, पैन कार्ड आदि) प्रस्तुत करना होगा।
- थाने में उपस्थिति का कड़ा रोस्टर:
- पहले 1 माह तक प्रतिदिन संबंधित थाने में हाजिरी दर्ज करानी होगी।
- अगले 6 माह तक प्रत्येक 15 दिन (Fortnightly) पर थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
- अवधि पूरी होने पर संबंधित थाना प्रभारी का उपस्थिति प्रमाण पत्र ट्रायल कोर्ट में दाखिल करना होगा।
- अनुपस्थिति व अपराध पर जमानत रद्दीकरण: ट्रायल कोर्ट की लगातार 2 तारीखों पर बिना ठोस कारण अनुपस्थित रहने या गवाहों को प्रभावित/धमकाने अथवा कोई नया अपराध करने की स्थिति में राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: आपराधिक विविध याचिका (अग्रिम जमानत – बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद शुल्क मामला)
- प्रासंगिक कानून: बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम (संशोधित); भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482 / CrPC की धारा 438
- पीठ: न्यायमूर्ति राजीव रॉय (पटना उच्च न्यायालय)
Whisky Case: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति राजीव रॉय (Justice Rajiv Roy) |
| संबंधित कानून | बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद संशोधन अधिनियम (Bihar Prohibition and Excise Act) |
| मुख्य विवाद | 112.320 लीटर विदेशी शराब की जब्ती मामले में अग्रिम जमानत। |
| अनोखी शर्त | मुज़फ़्फ़रपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से कोर्ट परिसर के लिए ₹15,000 के गमले खरीदने की शर्त। |

