Justice for Jharkhand Daughter: झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो के एक सनसनीखेज मिसिंग केस (Missing Case) में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस और फोरेंसिक लैब को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाईकाेर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की बेंच ने निर्देश दिया है कि बोकारो से बरामद मानव कंकाल के नमूनों को कोलकाता स्थित सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) भेजा जाए। कोर्ट ने लैब को 2 सप्ताह के भीतर DNA मिलान की रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। 8 महीने से लापता एक युवती का कंकाल मिलने के बाद अब उसकी पहचान पुख्ता करने के लिए DNA मिलान (DNA Matching) का सहारा लिया जा रहा है।
मामला क्या था? (The Tragic Disappearance)
- लापता: 18 वर्षीय छात्रा जुलाई 2024 में ‘चास कॉलेज’ (पिंडराजोरा) में ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने गई थी, जिसके बाद वह कभी घर नहीं लौटी। 24 जुलाई को अपहरण की शिकायत दर्ज की गई थी।
- बरामदगी: 12 अप्रैल, 2026 को पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने हत्या की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर 19 हड्डियां, बाल के गुच्छे, कपड़े और हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद किया गया।
- हत्या का कारण: पुलिस के अनुसार, आरोपी के साथ युवती का प्रेम प्रसंग था और वह शादी के लिए दबाव बना रही थी, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस प्रशासन पर ‘हंटर’: केवल छोटे पुलिसकर्मियों पर गाज क्यों?
- हाई कोर्ट ने पुलिस की सुस्त जांच और देरी से हुई कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई।
- सामूहिक निलंबन: कोर्ट को बताया गया कि लापरवाही के आरोप में पिंडराजोरा थाने के 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
- कोर्ट की टिप्पणी: बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मियों का निलंबन काफी नहीं है। इस मामले की निगरानी कर रहे DSP, SP और DIG रैंक के अधिकारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए थी।
- DGP को तलब: सुनवाई के दौरान झारखंड के DGP, बोकारो SP और SIT के सदस्य व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद थे।
DNA टेस्ट और पोस्ट-मॉर्टम का महत्व
- अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों (Scientific Evidence) की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए।
- DNA मिलान: बरामद हड्डियों और बालों का DNA टेस्ट, लापता युवती की मां (रेखा देवी) और पिता के DNA नमूनों से किया जाएगा।
- विशेषज्ञ जांच: कंकाल का पोस्ट-मॉर्टम रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में कराने का आदेश दिया गया है।
- कोलकाता लैब: रिपोर्ट के लिए कोलकाता CFSL को प्राथमिकता दी गई है ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| मुख्य आदेश | 2 हफ्ते में DNA मिलान रिपोर्ट पेश करने का निर्देश। |
| कंकाल की स्थिति | 19 हड्डियां और बाल बरामद (8 महीने पुरानी लाश)। |
| प्रशासनिक कार्रवाई | 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड; उच्चाधिकारियों पर भी कार्रवाई के संकेत। |
| अगली सुनवाई | 15 दिन बाद (रिपोर्ट प्राप्त होने पर)। |
सिस्टम की विफलता और न्यायिक सक्रियता
यह मामला झारखंड में कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की ‘लेट-लतीफी’ को उजागर करता है। 8 महीने तक एक माँ अपनी बेटी की तलाश में भटकती रही और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। हाई कोर्ट की सक्रियता ने अब न केवल जांच में तेजी लाई है, बल्कि लापरवाह अधिकारियों के मन में डर भी पैदा किया है।

