Tuesday, September 1, 2026
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Kejriwal vs Justice Sharma: जज के बच्चों को केंद्र सरकार दे रही है हजारों केस…केजरीवाल के हलफनामा में ताजा आरोप पढ़ें

Kejriwal vs Justice Sharma: अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल ताजा हलफनामा भारतीय न्यायपालिका में ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) और ‘जज के हटने’ (Recusal) की बहस को एक नए स्तर पर ले गया है।

आबकारी नीति मामले में सुनवाई

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले (Excise Policy Case) में सीबीआई की याचिका की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ एक पूरक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें RTI से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी की केंद्र सरकार में बतौर वकील भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार के साथ पेशेवर संबंधों को आधार बनाकर निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

हलफनामे के मुख्य आरोप (Key Allegations)

  • केजरीवाल ने RTI और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर कई दावे किए हैं।
  • पैनल वकील के रूप में नियुक्ति: जस्टिस शर्मा के बेटे ईशान शर्मा सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के ‘ग्रुप A’ पैनल काउंसिल हैं। उनकी बेटी शांभवी शर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में सरकारी वकील (Govt Pleader) और सुप्रीम कोर्ट में ‘ग्रुप C’ पैनल काउंसिल हैं।
  • हजारों केस का आवंटन: RTI डेटा के अनुसार, ईशान शर्मा को 2023 से 2025 के बीच कुल 5,904 केस आवंटित किए गए (2023: 2487, 2024: 1784, 2025: 1633)।
  • सॉलिसिटर जनरल की भूमिका: केजरीवाल का तर्क है कि इन वकीलों को काम आवंटित करने में सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के कार्यालय की मुख्य भूमिका होती है। चूंकि SG खुद इस केस में CBI की ओर से पेश हो रहे हैं, इसलिए यह “सीधा हितों का टकराव” है।

‘Recusal’ (सुनवाई से हटने) की मांग का आधार

  • केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वे जज की नियत पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि ‘पूर्वाग्रह की आशंका’ (Apprehension of Bias) की बात कर रहे हैं।
  • न्याय दिखना चाहिए: कानून का सिद्धांत है कि “न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।”
  • राजनीतिक संवेदनशीलता: चूंकि केजरीवाल एक प्रमुख विपक्षी नेता हैं और जांच एक केंद्रीय एजेंसी (CBI) कर रही है, इसलिए निष्पक्षता की धारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
  • पेशेवर लाभ: हलफनामे के अनुसार, ये मानद पद नहीं हैं बल्कि इनसे वित्तीय लाभ और पेशेवर अनुभव जुड़ा है, जो एक “सक्रिय और निरंतर” संबंध को दर्शाता है।

अदालती प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

  • केजरीवाल ने सुनवाई के तरीके पर भी प्रक्रियात्मक चिंताएं जताई हैं।
  • अतिरिक्त समय की सुनवाई: हलफनामे में दावा किया गया कि उनके जाने के बाद शाम 7 बजे तक सुनवाई चलती रही, जिससे उन्हें अपनी बात (Rejoinder) रखने का मौका नहीं मिला।
  • मुख्य मामले में आदेश: उन्होंने आपत्ति जताई कि जब रिक्यूजल (हटने) की अर्जी लंबित थी, तब कोर्ट ने मुख्य मामले में प्रभावी आदेश कैसे पारित किए।

मामले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
ईशान शर्मा (बेटा)SC में केंद्र सरकार के ‘ग्रुप A’ पैनल काउंसिल; 5,000+ केस आवंटित।
शांभवी शर्मा (बेटी)दिल्ली HC में सरकारी वकील और SC में पैनल काउंसिल।
तर्कसॉलिसिटर जनरल ही इन पैनलों को काम बांटते हैं और वही इस केस में विरोधी पक्ष हैं।
प्रार्थनाजस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करें।

न्यायपालिका की साख का सवाल

यह मामला भारतीय न्यायपालिका के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह जजों के परिवार के सदस्यों की पेशेवर स्वतंत्रता और न्यायिक निष्पक्षता के बीच की बारीक रेखा पर सवाल उठाता है। यदि कोई जज इस आधार पर हटता है, तो यह भविष्य में कई अन्य जजों के लिए भी मिसाल बन सकता है जिनके परिजन सरकारी पैनलों में शामिल हैं।

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